कांग्रेस का 'चाणक्य' 5वीं बार राज्यसभा में, अहमद पटेल का क्रिकेटर से लेकर राजनीतिक सलाहकार तक का सफर

Written By: Amit
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नई दिल्ली। अहमद पटेल ने राज्यसभा चुनाव से एक सप्ताह पहले दिए अपने एक इंटर्व्यू में उन्होंने कहा था कि यह उनकी और अमित शाह की व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई है। यही वजह थी कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पॉलिटिकल एडवाइजर अहमद पटेल को राज्यसभा में जाने से रोकने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। हालांकि, कई राज्यों को केसरिया रंग में रंगने वाले शाह की रणनीति इस बार कामयाब नहीं हो पाई और पटेल एक बार फिर गुजरात से होकर 5वीं बार राज्यसभा पहुंच गए। एक नजर डालते हैं, अहमद पटेल पर जो कांग्रेस का 'चाणक्य' और सोनिया गांधी का राजनीतिक सलाहकार है, इसके अलाव वे अपने जमाने कोई टाइम एक बेहतरीन क्रिकेटर भी हुआ करते थे। आइए जानते हैं, ऐसे ही कुछ अनसुने किस्से...

सबसे कम उम्र में सांसद बन दिल्ली आए

सबसे कम उम्र में सांसद बन दिल्ली आए

अहमद पटेल गुजरात के भरूच से आते हैं, जिनके पास भारतीय राजनीति का करीब 40 साल का अनुभव है। 1977 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और 26 साल की उम्र में 60 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया। पटेल अपने जमाने के सबसे युवा सांसद बनकर दिल्ली आए थे। राजनीति के पंडित बताते है कि पटेल की उस जीत ने इंदिरा गांधी को भी हैरान कर दिया था। पटेल पहली बार कांग्रेस की सीट से उस टाइम जीतकर दिल्ली आए थे, जब पूरा मुल्क आपातकाल जैसी भयावह घटना से जूझ चुका था और कांग्रेस के खिलाफ विरोध की जबरदस्त लहर थी। पटेल की इस जीत के बाद कांग्रेस ने उन्हें गुजरात की यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनाया। उसके बाद पटेल के जीत का अंतर हमेशा बढ़ता ही गया।

Ahmed Patel कैसे बने Congress के Chanakya, जाने उनके Political Journey की ख़ास बातें ।वनइंडिया हिंदी
गांधी परिवार के हैं करीबी

गांधी परिवार के हैं करीबी

अहमद पटेल हमेशा से ही गांधी परिवार करीबी रहे हैं। जब वे पहली बार जीत कर आए, तो इंदिरा गांधी को उनके काम करने का तरीका पसंद था। 1985 में वे प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव भी रहे। 1985 से जनवरी 1986 तक अहमद पटेल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे। 1991 में जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने, तब अहमद पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया।

सोनिया गांधी के चाणक्य

सोनिया गांधी के चाणक्य

1993 में अहमद पटेल पहली बार राज्यसभा पहुंचे और उसके बाद उन्होंने सोनिया गांधी को भारतीय राजनीति में स्थापित करने के लिए एक चाणक्य के रूप हमेशा पर्दे के पिछे काम किया। 2001 में पटेल, सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बने। राजनीतिज्ञों का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए हर छोटे और बड़े फैसले उनके सलाहकार पटेल से होकर गुजरते हैं और वे ही उन्हें हर चीज के लिए एडवाइज देते हैं। पटेल बताते हैं, ‘मै सिर्फ सोनिया गांधी के एजेंडे पर अपनी पूरी ईमानदारी से काम करता हूं। 2005 और 2009 के यूपीए की जीत में पटेल का अहम योगदान माना जाता है।

क्रिकेटर हुआ करते थे पटेल

क्रिकेटर हुआ करते थे पटेल

पटेल एक बहुत अच्छे क्रिकेटर भी हैं, कॉलेज के जमाने में वे साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम के बैट्समैन हुआ करते थे। अहमद पटेल के दिमाग में क्या चलता है, इसके बारे में किसी को पता नहीं होता है। अहमद पटेल हिंदी अखबार ज्यादा पढ़ते हैं, उनका मानना है कि देश की जनता के बारे में आपको हिंदी अखबारों से ही पता चलता है। बहुत ही कम न्यूज देखने वाले और मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले, पटेल ने हमेशा से ही पर्दे के पीछे ही राजनीति की है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पटेल वो इंसान है जिन्हें कभी अपने विरोधियों से भी शिकायत नहीं रही। पटेल भले ही मीडिया से दूरी बनाए रखते हो लेकिन वे कांग्रेस के ना सिर्फ 'किंगमेकर' हैं बल्कि पार्टी के 'पावरफुल लीडर' भी हैं।

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English summary
Ahmed Patel retains his Rajya Sabha seat, know some facts about congress's chanakya
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