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अग्निपथ योजना: क्या हैं अग्निवीरों की आशंकाएं और सरकार कैसे दूर कर रही है मिथक ? सबकुछ जानिए

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नई दिल्ली, 17 जून: सशस्त्र सेना में भर्ती की नई स्कीम 'अग्निपथ योजना' का विरोध बहुत ही ज्यादा हिंसक हो चुका है। प्रदर्शन का केंद्र बिहार है, जहां ट्रेनें फूंकी जा रही हैं, लेकिन इस हिंसा से पैदा हुई आग की लपटें, यूपी, हरियाणा से लेकर कई राज्यों तक फैल चुकी है। सरकार बार-बार समझाने की कोशिश कर रही है, इससे जुड़े मिथकों को दूर करना चाह रही है। लेकिन, फिलहाल युवा प्रदर्शनकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं और देश की सेवा के लिए जान की बाजी लगाने वाली नौकरी में जाने के लिए आम भारतीयों की संपत्ति को ही नष्ट किए जा रहे हैं। बहरहाल, आइए जानते हैं कि युवा प्रदर्शनकारियों के मन में इस 'अग्निपथ योजना' को लेकर क्या चिंताएं हैं और सरकार की ओर से उनकी चिंता के समाधान के लिए क्या किया जा रहा है?

'अग्निपथ योजना' पर सरकार फिलहाल अडिग

'अग्निपथ योजना' पर सरकार फिलहाल अडिग

'अग्निपथ योजना' के विरोध में प्रदर्शन हिंसक होते जाने के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को तीन ट्वीट किए हैं, जिससे जाहिर होता है कि सरकार फिलहाल अपने फैसले से पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा है कि 'अग्निपथ योजना' भारत के युवाओं को देश की रक्षा व्यवस्था से जुड़ने और देश सेवा करने का सुनहरा अवसर है।' उन्होंने कहा है कि दो वर्ष से सेना में भर्ती नहीं होने के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अग्निवीरों की भर्ती की उम्र सीमा सिर्फ इस बार के लिए 21 साल से बढ़ाकर 23 साल की गई है। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, 'मैं युवाओं से अपील करता हूं कि सेना में भर्ती की प्रक्रिया कुछ ही दिनों में प्रारम्भ होने जा रही है। वे इसके लिए अपनी तैयारी शुरू करें।'

इस योजना को लेकर अग्निवीरों की आशंकाएं क्या हैं ?

इस योजना को लेकर अग्निवीरों की आशंकाएं क्या हैं ?

'अग्निपथ योजना' को लेकर एक तो यह दलील दी जा रही है कि सिर्फ 4 वर्षों की सेवा का मतलब है कि सेना में प्रोफेशनलिज्म नहीं रह जाएगी और ना ही रेजिमेंट वाली प्रकृति बचेगी और ना ही सेना वाली युद्ध भावना रह जाएगी। लेकिन, विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह ये है कि सेना में जाने के इच्छुक युवाओं को यह लग रहा है कि चार साल तक सेना की नौकरी के बाद उनका भविष्य अनिश्चित हो जाएगा। क्योंकि, रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर अग्निवीरों को नए सिरे से रोजगार के दूसरे विकल्प तलाशने होंगे, जो कि उनके लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल साबित हो सकता है।

सरकार ने भी 'मिथक' दूर करने के लिए खोला मोर्चा

सरकार ने भी 'मिथक' दूर करने के लिए खोला मोर्चा

केंद्र सरकार ने भी 'अग्निपथ योजना' से जुड़े तमाम भ्रमों को दूर करने के लिए मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने भरोसा दिया है कि कई अग्निवीरों का चार साल बाद स्थायी कैडर में चुनाव हो जाएगा। बाकी जो लोग स्थायी कैडर नहीं बन पाएंगे उन्हें करीब 12 लाख रुपये का वित्तीय पैकेज मिलेगा, जिससे वह नए रोजगार की शुरुआत कर सकते हैं। अपना व्यवसाय शुरू करने वालों को बैंक लोन में भी प्राथमिकता दी जाएगी। जो आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें 12वीं पास का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। उनके लिए ब्रिजिंग कोर्स का भी इंतजाम किया जाएगा। लेकिन, जो आगे भी नौकरी ही करना चाहेंगे, उन्हें भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), असम राइफल्स और पुलिस या इस तरह के दूसरे बलों में प्राथमिकता मिलेगी। ऐसे अग्निवीरों का इंजीनियरिंग, लॉ एंड ऑर्डर में अनुभव मिलेगा और उनकी स्किल भी बढ़ेगी। इसका लाभ प्रमुख कंपनियों और आईटी सेक्टर में भी मिल सकता है। कई कंपनियां अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की भी घोषणा कर चुके हैं।

25% को सामान्य कैडर में जाने का मिल सकता है मौका

25% को सामान्य कैडर में जाने का मिल सकता है मौका

आंदोलनकारी इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि इस योजना में रिटायरमेंट बेनिफिट के तौर पर कोई पेंशन या ग्रेच्युटी की व्यवस्था नहीं है। लेकिन, सरकार का कहना है कि सिर्फ चार साल की सेवा में 12 लाख का पैकेज (सेवा निधि) और स्किल सर्टिफिकेट इसी को देखते हुए दिया जा रहा है। सरकार यह भी कह चुकी है कि लगभग 25% अग्निवीरों को सामान्य कैडर में बहाल किया जाएगा, जिससे वह आगे और 15 साल सेना में योगदान दे सकेंगे। बाकी 75% के लिए जो व्यवस्था की गई है, उसका जिक्र ऊपर किया जा चुका है।

बाकी आशंकाओं पर सरकार का जवाब

बाकी आशंकाओं पर सरकार का जवाब

एक मिथक यह भी है कि अग्निवीर समाज के लिए खतरा साबित हो सकते हैं और वह आतंकी संकठनों में शामिल हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि यह भारतीय सशस्त्र सेना की प्रकृति और मूल्यों का अपमान है। सरकार का कहना है कि जो युवा चार साल तक वर्दी पहन लेगा, वह पूरी जिंदगी देश के प्रति समर्पित रहेगा। एक दावा यह भी किया जा रहा है कि अग्निपथ योजना की वजह से युवाओं के लिए अवसर कम होंगे। लेकिन, सरकार का कहना है कि, दरअसल आने वाले वर्षों में सेना में भर्तियां तीन गुना बढ़ने की उम्मीद है। एक दावा यह किया जा रहा है कि 21 साल का युवा सेना के लिए अपरिपक्व और गैर-भरोसेमंग होंगे। सरकार का कहना है कि ज्यादातर देशों की सेना युवाओं पर ही निर्भर हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक युवाओं और अनुभवियों का 50-50 का तालमेल रहेगा।

किन देशों के मॉडलों को देखा गया है ?

किन देशों के मॉडलों को देखा गया है ?

अगला मिथक ये है कि इस योजना से सशस्त्र सेना पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि ज्यादातर देशों में इस तरह की कम समय की भर्ती योजना लागू है और सेना के नजरिए से युवा सैन्य बल वाली यह योजना काफी सोच-समझकर तैयार की गई है। सरकार का यह भी कहना है कि इस योजना को लागू करने से पहले इजरायल, अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस, यूके और जर्मनी के भर्ती मॉडलों को परखा गया है और फिर उसे हमारी सेना की जरूरतों के मुताबिक विकसित किया गया है।

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सेना में औसत उम्र 24-26 साल होने की उम्मीद

सेना में औसत उम्र 24-26 साल होने की उम्मीद

सूत्रों के मुताबिक 'पहले साल जितने अग्रिवीरों की नियुक्ति होगी वह सशस्त्र सेना का सिर्फ 3 फीसदी होगा।' यही नहीं, जो अग्निवीर चार साल बाद सेना के स्थायी कैडर में बहाल होंगे, वे और भी ज्यादा सक्षम होंगे। सरकार ने जो इसके फायदे गिनाए हैं, उसके मुताबिक इस योजना की वजह से सेना में मौजूदा औसत उम्र जो 32 साल है, वह घटकर 24-26 साल रह जाएगा। सरकार की यह भी दलील हो कि टेक-सेवी युवाओं की भर्ती के कारण भविष्य में युद्ध के लिए हमारी सेना ज्यादा तैयार होगी। यही नहीं, सेना का अनुशासन सीखने के बाद ये युवा समाज के लिए भी बेहतर साबित होंगे। सरकार इसके जरिए सैलरी और पेंशन के बढ़ते बोझ को भी सीमित करना चाहती है। बचे हुए पैसों का इस्तेमाल सेना के आधुनिकीकरण और तकनीक पर किया जा सकता है।

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English summary
agnipath scheme:The apprehensions of the youth about the Agneepath scheme and know everything from the government to clear their confusion
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