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CAA पर मचे बवाल के बाद अब भाजपा क्या पूरा कर पाएगी ये वादा ?

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बेंगलुरु। नागरिकता संसोधन एक्ट लागू किए जाने के बाद से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम का यह कहते हुए बचाव किया है कि इसे 130 करोड़ नागरिकों का समर्थन हासिल है क्योंकि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में यह बीजेपी के घोषणा पत्र का हिस्सा था। बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में "पड़ोसी देशों में उत्पीड़न झेलने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने वाला" कानून बनाने का वादा किया था। जिसको मोदी सरकार ने पूरा भी किया। नागरिकता संशोधन एक्ट, 2019 को हाल ही में सदन से मंजूरी मिली है। लेकिन कांग्रेस,वामदल समेत अन्‍य विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

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पूर्वोत्तर समेत देश के हर राज्य में नागरिकता कानून के साथ एनआरसी का भी जमकर विरोध हो रहा हैं। विपक्षी दल मोदी सरकार पर इस एक्ट को लागू करने का फैसला वापस लेने के लिए हर तरीके से दबाव बना रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या अब मोदी सरकार उन मुद्दों पर आगे कदम बढ़ाएगी या विचार करेंगी, जो बीजेपी के घोषणा पत्र में थे? भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र पर गौर करिए अभी कई कदम ऐसे हैं जिनपर भाजपा आगे चलकर अमल कर सकती है और अगर ऐसा हुआ तो उन पर ऐसे ही विवाद भी होंगे। आइए जानते है वे कौन से हैं मुद्दे?

समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता

बीजेपी ने अपने समान नागरिक संहिता को लेकर भी चुनावी वादा किया था। 2019 के आम चुनाव के घोषणा पत्र में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के तहत समान नागरिक संहिता का प्रावधान है। बीजेपी का मानना है कि ​जब तक भारत में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होगी तब तक लैंगिक समानता नहीं आएगी। यह सभी महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करता है और बीजेपी समान नागरिक संहिता को लाने के संकल्प को दोहराती है। लोगों का मानना है कि सभी के लिए कानून में एक समानता से देश में एकता बढ़ेगी और जिस देश में नागरिकों में एकता होती है, किसी प्रकार भेदभाव नहीं होता है। इससे देश तेजी से विकास के रास्‍ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा। यही नहीं जो अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग कानून की वजह से न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

मोदी सरकार का अगला कदम

माना जा रहा है कि नागरिकता संसोधन एक्ट के बाद मोदी सरकार घोषणा पत्र के इस वादे को पूरा करने के लिए अगला कदम बढ़ा सकती हैं। समान नागरिक संहिता अथवा समान आचार संहिता का अर्थ एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) कानून होता है जो सभी धर्म के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही 'समान नागरिक संहिता' का मूल भावना है। यह किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है।

इस कारण इस पर भी हो सकता है विवाद

देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून। यानी ये एक तरह का निष्‍पक्ष कानून होगा। जब ये कानून बन जाएगा तो हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी को एक ही कानून का पालन करना होगा। यानी मुस्लिम तीन शादियां भी नहीं कर सकेंगे। इसलिए भी भविष्‍य में यह कानून लागू किया जाता है तो उस पर भी विवाद हो सकता हैं। मालूम हो कि भारत में गोवा ऐसा अकेला राज्य हैं जहां यह कानून लागू है।

एनआरसी

एनआरसी

बीजेपी के घोषणा पत्र में कहा गया था कि अवैध आप्रवासन के चलते कई इलाकों में व्यापक पैमाने पर सांस्कृतिक और भाषाई बदलाव आए हैं, इसके चलते स्थानीय लोगों की जीविका और रोजगार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। हम प्राथमिकता के साथ इन इलाकों में नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजनशिप तैयार करवाएंगे। भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी एनआरसी लागू किया जाएगा। बता दें कुछ माह असम में एनआरसी की नयी लिस्‍ट जारी की गयी थी जिसमें लाखों लोगों को एनआरसी में जगह नहीं मिली थी। इतनाा ही नहीं पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्‍य राज्यों में नागरिकता संसोधन एक्ट के विरोध के साथ एनआरसी का भी जमकर विरोध हो रहा हैं। देश भर में एनआरसी लागू करके मोदी सरकार घुसपैठियों को देश से निकाल बाहर करना चाहती हैं। वहीं माना जा रहा है विपक्षी पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के चलते इसका विरोध कर लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं।

एक चुनाव/एक वोटर लिस्ट

एक चुनाव/एक वोटर लिस्ट

इसके अलावा बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि हम चुनावी खर्च कम करने, सरकारी संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करने और प्रभावी नीति निर्माण के लिए लोकसभा, विधानसभा, लोकल बॉडीज के चुनाव एक साथ कराने को प्रतिबद्ध हैं। हम सभी पार्टियों के साथ इस पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ताकि हर नागरिक अपने अधिकार का उपयोग कर सके, हर चुनाव में मतदान कर सके और विभिन्न मतदाता सूची के चलते होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए हम सभी चुनावों के लिए एक वोटर लिस्ट ​तैयार करना सुनिश्चित करेंगे। मोदी सरकार अगर ऐसा करती है तो भारत में जो आए दिन चुनाव होते हैं उससे मुक्ति मिल जाएगी । लेकिन इस मुद्दे विपक्ष एकमत नही है।

भाषाई लक्ष्य

भाषाई लक्ष्य

इस मसले पर बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था, हम भारत में लिखी और बोली जाने वाली सभी भाषाओं और बोलियों के अध्ययन के लिए एक टास्ट फोर्स का गठन करेंगे. हम कमजोर या विलुप्तप्राय बोलियों और भाषाओं के पुनरुद्धार और संवर्धन की दिशा में भी काम करेंगे। संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए हम यह सुनिश्चित करेंगे कि स्कूल स्तर पर संस्कृत पढ़ाई जाए। हम संस्कृत में शोध को बढ़ावा देने के लिए भारत भर के शोधकर्ताओं और विद्वानों को 100 पाणिनि फेलोशिप भी प्रदान करेंगे।

सिविल सर्विसेज और प्रशासनिक सुधार

सिविल सर्विसेज और प्रशासनिक सुधार

इस बारे में बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि भारत को एक विकसित देश में बदलने के लिए हमें "मिनिमम गवर्मेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस" पर काम करने की जरूरत है। हम सिविल सर्विसेस में सुधार करेंगे और यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इसे लागू करेंगे। नीतियों और समन्वय के बेहतर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए हम समान और पूरक विभागों का क्षेत्रीय मंत्रालयों में विलय करेंगे. यह नीति निर्माण और व्यापक तौर पर नीतियां बनाने के लिए सुचारु कार्यान्वयन में मदद करेगा।

सबरीमाला

सबरीमाला

सबरीमाला के मुद्दे पर बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था, हम यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सबरीमाला से संबंधित आस्था, परंपरा और पूजा अनुष्ठानों के विषय को व्यापक तरीके से प्रस्तुत किया जाए। हम विश्वास और विश्वास से जुड़े मुद्दों पर संवैधानिक संरक्षण को सुरक्षित करने का प्रयास करेंगे। बता दें सबरीमाला मुद्दे पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट मे चल रहा मामला के लिए दूसरी बेंच का गठन किया गया है।

सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने पूरे किए ये वादे

सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने पूरे किए ये वादे

भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर निर्माण का जनता से जो वादा किया अब उसे पूरा करने जा रही हैं। भाजपा की स्‍थापना के समय पार्टी के तीन प्रमुख एजेंडे थे जिसमें राममंदिर निर्माण और जम्मू कश्‍मीर से संविधान के अनुच्‍छेद 370 को रद्द करना शामिल था। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जम्मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने पर वोट मांगा था जिसे मोदी सरकार ने दोबारा सत्ता में आते ही पूरा किया।

तीन तलाक पर पूरा किया वादा

इतना ही नहीं जुलाई में संसद से तीन तलाक को खत्म करने वाला ​बिल पास हुआ जिसके जरिये मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक बोलकर ​तलाक लेने पर पाबंदी लगा दी गई। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने अपने यानी घोषणा पत्र में वादा किया था कि वह "तीन तलाक और हलाला निकाह जैसी प्रथा को खत्म करने का कानून" लाएगी। सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने अपना ये वादा पूरा किया।

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English summary
After the revision of the amended Citizenship Act, will the BJP now take any step on those issues? Know more what the BJP had done in the BJP manifesto
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