सपा-बसपा के बीच गठबंधन के बाद पी चिदंबरम को अभी भी है इस बात की उम्मीद
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बाद लगातार सियासी सरगर्मी बढ़ रही है। एक तरफ जहां कांग्रेस इस गठबंधन पर कुछ भी खुलकर बोलने से बच रही है तो दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को इस बात की उम्मीद है कि सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन में अभी भी अंतिम फैसला होना बाकी है। चिदंबरम ने कहा कि मुमकिन है कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन में शायद यह अंतिम फैसला नहीं है। हमे लगता है कि चुनाव की तारीख करीब आने तक इस गठबंधन पर फिर से विचार किया जाएगा और एक बड़े गठबंधन का गठन होगा।

पी चिदंबरम ने ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। गौर करने वाली बात यह है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा ने एक साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। सपा और बसपा एक साथ मिलकर अगले लोकसभा चुनाव में 38-39 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। हालांकि इस गठबंधन में कांग्रेस को महज दो ही सीटें दी गई है। पार्टी की परंपरागत अमेठी और रायबरेली सीट को सपा और बसपा ने छोड़ने का फैसला लिया है।
इस गठबंधन के बारे में मायावती ने कहा कि कांग्रेस से साथ गठबंधन करने में हमे कुछ खास फायदा नहीं हो रहा था। लिहाजा हमने फैसला लिया कि हम कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। कांग्रेस के महासचिव गुलाम नबी आजाद ने इस गठबंधन के बारे में कुछ भी आधिकारिक रूप से कहने से इनकार कर दिया। सपा और बसपा के बीच गठबंधन पर सपा के पूर्व नेता शिवपाल यादव ने बड़ा बयान देते हुए अखिलेश यादव को चेताया कि मायावती गठबंधन के बाद दलित, ओबीसी और मुसलमानों का वोट हासिल करेंगी और चुनाव बाद भाजपा के साथ हाथ मिला लेंगी।
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