अब इराक नहीं लौटना चाहती हैं नर्सें, केंद्र सरकार को कहा शुक्रिया

Iraq-nurses
कोच्चि। युद्ध से जर्जर इराक में तकरीबन एक माह सांसत में बिताने के बाद शनिवार को देश लौटीं ज्यादातर नर्सें अब वहां नहीं लौटना चाहतीं।

45 अन्य नर्सों के साथ कोच्चि हवाई अड्डे पहुंची सैंड्रा सेबेश्यिन ने कहा, हम वापस नहीं जाएंगे। वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं है। हम अपनी जान एक बार फिर दांव पर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं।

कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद 46 नर्सों का केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी और नर्सों के रिश्तेदारों ने उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया।

कोट्टायम से ताल्लुक रखने वाली सैंड्रा ने बताया कि वह पिछले साल 16 अगस्त को इराक गई थी। उसे और अन्य नर्सों को पिछले चार महीने से गवर्नमेंट तिकरित ट्रेनिंग हास्पिटल से तनख्वाह नहीं मिली।

उसने बताया, पहले 23 नर्सों का हमारा बैच था और फिर इस साल फरवरी में 15 और शामिल हो गईं।

आईएसआईएस उग्रवादियों के हाथों बंधक बनाए जाने पर सैंड्रा और एक अन्य नर्स नीनू जोस ने कहा कि उन्हें वहां से पहले ही जाने को कहा गया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था क्योंकि भारतीय दूतावास ने उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी थी।

इससे पहले गुरुवार को जब इन नर्सों को आईएसआईएस के आतंकियों ने बंधक बनाया था, उस समय नर्सों के परिजनों के साथ ही साथ नर्सों में भी सरकार के रवैये को लेकर खासी नाराजगी थी। नर्से सरकार के रवैये से इतना

दुखी थीं कि उन्‍होंने यहां तक कह डाला कि अब सरकार उनके लिए अगर कॉफिन का इंतजाम कर सकती है, तो कर दे। शनिवार को जब यह नर्सें अपने वतन वापस लौट आईं तो परिजनों के साथ ही साथ इन नर्सों ने भी केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया।

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