साबिर अली को बाहर करेगी भाजपा और फिर 'नो वेकेंसी'

सच पूछिए तो मुख्तार अब्बास नकवी का विरोध दर्ज कराना यह साफ संकेत दे रहा है कि अब भाजपा को अपने द्वार पर नो वेकेंसी का बोर्ड लगा देना चाहिये। अन्यथा इस चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हो सकता है।
मुख्तर अब्बास नकवी राष्ट्रवादी सोच रखते हैं और साबिर अली की सोच पूरी तरह सांप्रदायिक है। साबिर अली को जदयू से तब निकाला गया था। नकवी ने ट्वीट किया कि साबिर अली इंडियन मुजाहिदीन के दोस्त हैं और यासीन भटकल के करीबी आज साबिर आये हैं कल दाउद पार्टी में आयेगा। हालांकि इस ट्वीट को थोड़ी ही देर में नकवी ने डिलीट कर दिया। हाल के इतिहास को उठाकर देखें तो चंपारण के रहने वाले साबिर अली को जदयू से इसलिये निकाल दिया गया था, क्योंकि उन्होंने नरेंद्र मोदी की योजनाओं और नीतियों की तारीफ की थी।
आज क्या हो रहा है
भाजपा नेता बलवीर पुंज ने कहा कि यह राष्ट्रवादी नेताओं को बड़ा आघात है। भाजपा जिस तरह से प्रमोद मुतालिक को अपने साथ जोड़ा, भले ही बाद में अलग कर दिया, लेकिन मुतालिक को संज्ञान में लेने भर से ही दाग लग गये। अब साबिर अली के आने से पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचेगा, उन्हें बाहर कर देना चाहिये।
शिवसेना ने भी भाजपा को नसहीत दी है कि ऐन मौके पर इस प्रकार के जोड़-तोड़ न करे, इससे पार्टी को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के राम माधव ने भी साबिर अली को भाजपा में शामिल किये जाने का विरोध किया।












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