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जासूसी कांड के बाद बिहार भाजपा ये बड़े नेता निशाने पर, नीतीश के हैं खामखास

By अशोक कुमार शर्मा
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पटना। आरएसएस जासूसी कांड के बाद बिहार में नीतीश समर्थक भाजपा नेता निशाने पर आ गये हैं। आरएसएस का शीर्ष नेतृत्व इस बात से हैरान है कि भाजपा के सरकार में रहते जासूसी की चिट्ठी कैसे जारी हो गयी। अगर इस तरह की कोई चिट्ठी निकल भी गयी तो भाजपा के मंत्रियों को इसकी जानकारी क्यों न हुई ? इस प्रकरण से भाजपा की आंखें खुल गयी हैं। वह पूरे मामले का इंटरनल रिव्यू कर रही है। सियासी नफा-नुकसान का आकलन चल रहा है। बिहार भाजपा नेताओं को पार्टी हित में सचेत रहने के लिए कहा गया है। बिहार में भाजपा की फील्डिंग टाइट रखने के लिए केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पहले से तैनात हैं। जासूसी कांड पर भी उन्होंने जोरदार निशाना साधा है।

सरकार में रह कर भी भाजपा इतनी निरीह क्यों ?

सरकार में रह कर भी भाजपा इतनी निरीह क्यों ?

सुशील मोदी बिहार भाजपा के बड़े नेता हैं और सरकार में डिप्टी सीएम को ओहदे पर हैं। उन्हें नीतीश का अत्यंत करीबी माना जाता है। केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सुशील मोदी पर तंज कसा है कि अगर सरकार को आरएसएस और उससे जुड़े लोगों की जानकारी चाहिए थी तो उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी से ये पूछ लेनी चाहिए थी। सुशील मोदी संघ के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। वे सरकार को सब चीजें बता देते। इसकी खुफिया जांच की क्या जरूरत थी। फिलहाल सुशील मोदी निशाने पर हैं। जब सरकार में भाजपा का उप मुख्यमंत्री हो और उसको अपने मातृ संगठन की खैरियत की परवाह न हो, तो ये बहुत गंभीर बात है। क्या भाजपा के मंत्री सरकार में शोभा की वस्तु हैं ? सरकार में भागीदार रह कर भी भाजपा इतनी निरीह क्यों है ? संघ और भाजपा के कार्यकर्ता इससे बहुत निराश हैं।

आरएसएस की खुफिया जांच क्यों ?

आरएसएस की खुफिया जांच क्यों ?

संघ के नेताओं का सवाल है कि क्या आरएसएस प्रतिबंधित संगठन है जो उससे जुड़े लोगों की खुफिया जानकारी इकट्ठी की जा रही है ? हद तो ये है कि सरकार ने संघ से जुड़े एक मात्र मुस्लिम संगठन, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को भी जांच के दायरे में रख दिया था। यह संगठन अल्पसंख्यक समुदाय को संघ से जोड़ने के लिए काम करता है। आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है जो देश और समाज को मजबूत करने के लिए काम करता रहा है। जब यह संगठन पारदर्शी है तो फिर इसकी जांच क्यों की गयी ? संघ के नेताओं का कहना है कि क्या नीतीश सरकार किसी मुस्लिम संगठन या मदरसे की जांच के लिए ऐसी कोई गुप्त चिट्ठी निकाल सकती है ? इंडियन मुजाहिदीन का कुख्यात आंतकी यासीन भटकल कई साल तक दरभंगा में रहा था। उसकी गिरफ्तारी भी बिहार नेपाल के बोर्डर पर हुई थी। उसे बिहार पुलिस ने ही अपने गिरफ्त में रखा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद दरभंगा मो़ड्यूल और कई स्लीपर सेल का खुलासा हुआ था। क्या नीतीश सरकार ने इनकी जांच करायी ? एक समाजसेवी और राष्ट्रवादी संगठन की जांच की आखिर जरूर क्यों पड़ी ? क्या इसका कोई राजनीति मकसद है ?

नीतीश के खास हैं सुशील मोदी

नीतीश के खास हैं सुशील मोदी

पिछले साल उपेन्द्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बीच जब 'नीच' शब्द को लेकर राजनीतिक लड़ाई हुई थी उस समय सुशील मोदी नीतीश के साथ खड़े थे। हालांकि इस विवाद से सुशील मोदी का कोई संबंध नहीं था फिर भी सुशील मोदी ने नीतीश के लिए बैटिंग की। सुशील मोदी ने ट्वीट के जरिये कहा था कि नीतीश कुमार ने उपेन्द्र कुशवाहा के लिए नीच शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। मैं भी उस कार्यक्रम में मौजूद था। कुशवाहा का नाम लिये बिना मोदी ने लिखा था, कुछ लोग जानबूझ कर शहीद बनने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सफलता नहीं मिलेगी। सुशील मोदी के इस ट्वीट पर कुशवाहा भड़क गये। उन्होंने सुशील मोदी को राजनीतिक पिछलग्गू तक कह दिया। कुशवाहा ने इशारों-इशारों में सुशील मोदी को नीतीश का भोंपू कहा था। 2005 में नीतीश-भाजपा के पहले कार्यकाल में जब एक बार जदयू में आंतरिक झगड़ा हुआ था उस समय भी सुशील मोदी, नीतीश के पक्ष में कूद पड़े थे। उस समय सुशील मोदी ने कहा था, जदयू का मतलब नीतीश कुमार और नीतीश का मतलब जदयू। नीतीश कुमार और सुशील मोदी छात्र जीवन से एक दूसरे के करीब रहे हैं। छात्र राजनीति में अगल अलग दल में रहते हुए भी दोनों मित्र रहे। ये दोस्ती आज तक कायम है।

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English summary
after rss spy scandal in Bihar BJP big leaders on target Shushil Kumar Modi Nitish Kumar
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