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करीब चार दशकों बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री SC में करेंगे वकालत, बेहद खास है वजह

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नई दिल्ली- करीब चार दशकों बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री वकील का कोट पहन कर किसी केस की पैरवी करते नजर आएंगे, वो भी सुप्रीम कोर्ट में। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बहुत ही खास वजह से अपने पुराने पेशे में वापस लौटने का फैसला किया है। ये वजह है नागरिकता (संशोधन) कानून का अदालत में विरोध करने का। असम में इस मसले को लेकर पहले ही काफी विरोध हो रहा है, लेकिन अब वहां की पूर्व सीएम ने इसे अदालत में लड़ने का फैसला किया है। गोगोई राजनीति में आने से पहले प्रैक्टिस किया करते थे, लेकिन सत्ता और सियासत के चक्कर में उन्हें उस पेशे से किनारा करना पड़ गया था।

36 साल बाद वकालत करेंगे गोगोई

36 साल बाद वकालत करेंगे गोगोई

असम के पूर्व मुख्मंत्री तरुण गोगोई करीब 36 वर्षों बाद वकीलों वाला लिबास पहनेंगे। गोगोई ने आखिरी बार 1983 में किसी केस की पैरवी की थी। फिर से अदालत में एक मुकदमें की पैरवी के लिए वे मंगलवार को ही गुवाहाटी से दिल्ली पहुंचे हैं। दरअसल, वे पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश करने के लिए दिल्ली आए हैं। ईटी से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि, 'जब नागरिकता (संशोधन) कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम बहस करेंगे तो मैं उनको सहयोग करूंगा।" हालांकि, बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और 22 जनवरी को सुनवाई की तारीख मुकर्रर कर दी। यानि गोगोई को अदालत में अपनी दलीलें रखने के लिए अभी एक महीने से ज्यादा वक्त तक इंतजार करना पड़ेगा।

यह कानून असंवैधानिक है- तरुण गोगोई

यह कानून असंवैधानिक है- तरुण गोगोई

कांग्रेस नेता तरुण गोगोई के मुताबिक इस कानून से पड़ने वाले असर पर राज्य की जनता को चर्चा करने का पूरा अधिकार है और कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि उन्हें किस मुद्दे पर बात करनी चाहिए। गोगोई ने अपना और अपनी पार्टी का यह पक्ष दोहराया है कि 'यह कानून असंवैधानिक है।' उन्होंने ये भी दावा किया कि 'जब मैं मुख्यमंत्री था तब मैंने पड़ोसी मुल्कों में उत्पीड़न की पीड़ा झेलकर भारत आने वाले शरणार्थियों को शरण दिए जाने की मांग की थी।' गौरतलब है कि नए नागरिकता कानून के विरोध पर फसाद सबसे पहले असम में ही शुरू हुआ था, लेकिन अब वहां हालात काफी हद तक नियंत्रित में आ चुके हैं।

हिंसा भड़काने वाली बातों से परहेज करें- मंत्री

हिंसा भड़काने वाली बातों से परहेज करें- मंत्री

इस बीच असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से कहा है कि उन मुद्दों पर बातचीत से परहेज करें, जो नागरिकता (संशोधन) कानून में है ही नहीं, क्योंकि इससे हिंसा भड़क सकती है। उन्होंने कहा है, 'जबकि, 2014 की समय-सीमा निर्धारित है, कुछ लगातार कहे जा रहे हैं कि लोगों का आने का सिलसिला जारी रहेगा। मैं कह रहा हूं कि यह लोगों को भड़काने जैसा है और यह सार्वजनिक शांति के खिलाफ है। इससे मौजूदा शांति भंग हो सकती है।'

हिंसा के बाद सत्याग्रह

हिंसा के बाद सत्याग्रह

इस बीच इस कानून के खिलाफ तूफान के बाद असम में सत्याग्रह मार्च का दौर शुरू हुआ है। मंगलवार को इस कानून के खिलाफ लोग ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन की ओर से आयोजित सत्याग्रह मार्च के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। वैसे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अभी भी ठप हैं और हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि इसे बहाल करने को लेकर गुरुवार को परिस्थितियों के आकलन के बाद ही विचार किया जाएगा।

इसे भी पढ़ें- नागरिकता संशोधन कानून पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र को जारी किया नोटिस

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English summary
After four decades, a former Chief Minister will advocate in SC, the reason is very special
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