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आखिर इमरान सरकार सेना प्रमुख के पद पर बाज़वा को ही क्‍यों रखना चाहते हैं ?

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    Pakistan Army Chief General Bajwa is not a Muslim? |वनइंडिया हिंदी

    बेंगलुरु। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बैंच ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के सेवाकाल में बढ़ाने का नोटिफ़िकेशन पर एक दिन के लिए रोक लगाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया। इस नोटिस ने इमरान खान की नींद हराम कर दी। आनन-फानन में पाकिस्‍तान की इमरान सरकार ने मंगलवार को देश के सेना प्रमुख जावेद बाजवा के कार्यकाल विस्‍तार के लिए सेना नियमों तक में संशोधन तक करवा डाला।

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    इमरान सरकार का बाजवा के बीच गहरे प्रेम की आखिर वजह क्या हैं ? इसके साथ यह भी सवाल उठता है कि आखिर इमरान सरकार सेना प्रमुख के पद पर बाजवा को ही क्‍यों रखना चाहती है ? जानें इसके पीछे की खास वजह...

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    पहले बता दें ये वहीं बाजवा हैं जो पिछले दिनों इमरान सरकार को हटाकर तख्‍तापलट कर देने के मंसूबे बना रहे थे। दरअसल, इमरान सरकार की तख्‍तापलट की खबर पाकिस्‍तान प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले दिनों की अचानक छुट्टी पर जाने के बाद चर्चा में आयी थी।तख्‍तापलट के कयास इसलिए लगाए गए क्योंकि इमरान, पाकिस्‍तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से मिलने के बाद ही छुट्टी पर गए थे। खबरों के अनुसार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से फेल इमरान सरकार से सेना प्रमुख बाववा लंबे समय से नाराज भी चल रहे थे।

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    बाजवा के कार्यकाल में सीएम इमरान खान की की कुर्सी पर खतरा मंडराने के बावजूद इमरान बाजवा की कुर्सी बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।

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    गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पर भरोसा जताते हुए उनका कार्यकाल अगले तीन साल के लिए बढ़ा दिया था। उन्‍होंने ये कदम जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के सख्त रुख और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद बौखलाहट में उठाया था। जम्मू-कश्मीर में बने हालात में पाकिस्तान के इस कदम को बेहद अहम माना गया था। उनका यह सेवा विस्‍तार रिटायर होने के म‍हज तीन महीने किया गया था। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने तब यह कहा था देश की अमन और शांति के लिए बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाया गया है।

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    इसी कार्यकाल को बढ़ाए जाने के बाद ज्यूरिस्टिस फ़ाउंडेशन की ओर से जनरल बाजवा के सेवाकाल में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ याचिका सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। मंगलवार को चीफ़ जस्टिस आसिफ़ खोसा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई शुरू हुई तो तो याचिकाकर्ता अदालत में पेश नहीं हुए और अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया लेकिन अदालत ने इसे जनहित के मामले में तब्दील कर दिया।

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    इसके साथ ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बैंच ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के सेवाकाल में बढ़ोतरी का नोटिफ़िकेशन पर कल तक के लिए रोक लगाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया और बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को निलंबित कर दिया था। जिसके बाद इमरान सरकार ने बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए सेना नियम 255 में संसोधन तक कर दिया ताकि उनके सेना प्रमुख के कार्यकाल में आ रही रुकावट को दूर किया जा सके। गौरतलब है कि कोर्ट ने कहा था कि सेना के नियमों में ऐसा कोई प्रवधान नहीं है।

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    नवंबर 2016 में पाकिस्तानी सेना जनरल कमर जावेद बाजवा को पाकिस्तानी सेना के 16वें सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। बाजवा को 29 नवंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए जनरल राहिल शरीफ की जगह सेना प्रमुख बनाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने बाजवा के हाथों में सेना की कमान दी थी। बाजवा साल 1980 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए थे। उन्हें बलोच रेजीमेंट में कमीशन मिला था। उन्हें पाकिस्तानी सेना के सबसे बड़े सम्मान निशान ए इम्तियाज़ से भी नवाज़ा जा चुका है।

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    अभी भी कश्‍मीर मुद्दे पर पाकिस्‍तान हर मुद्दे पर भारत से मात खाता आया हैं इस कारण सीमा पर भारत और पाकिस्‍तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पाकिस्‍तान सरकार के लिए सेना प्रमुख बाजवा एक बड़ी जरूरत बन चुकी हैं। इमरान सरकार को लगता है कि सीमा के हालात से निपटने के लिए बाजवा के अनुभव का लाभ लिया जा सकता है। कमर जावेद बाजवा को कश्मीर मुद्दों का जानकार माना जाता है। बाजवा के पास भारत के साथ लगी नियंत्रण रेखा का भी लंबा अनुभव है। बाजवा 1982 में पाकिस्तानी सेना की सिंध रेजिमेंट में कमीशन होकर पहुंचे थे। बाजवा को 2011 में हिलाल-ए-इम्तियाज से नवाजा जा चुका है।

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    बाजवा ने पाकिस्तान की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कॉर्प-10 का भी नेतृत्व किया है। यह कॉर्प पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में तैनात है। बाजवा ने कश्मीर और उत्तरी इलाकों में लंबे समय तक बतौर सेनाधिकारी सेवा दी है, इसलिए उन्हें इन इलाकों की खासी समझ है। कांगों में शांति मिशन के दौरान भी ब्रिगेडियर रहते हुए बाजवा ने अपनी सेवाएं दीं।

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    कमर बाजवा को पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों की भी खासी समझ है, क्योंकि वे गिलगित-बल्तिस्तान में फोर्स कमांडर की पोस्ट पर भी रह चुके हैं। कमर बाजवा बलोच रेजिमेंट में भी सेना अधिकारी रह चुके हैं। सेना प्रमुख से पहले कमर बाजवा पाकिस्तानी सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) में ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट के इंस्पेक्टर जनरल थे। राहिल शरीफ भी आर्मी चीफ बनने से पहले इस पोस्ट पर रह चुके हैं। पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को डार्क हॉर्स कहा जाता है। बाजवा का संबंध क्वेटा के इंफेन्ट्री स्कूल और बलोच रेजीमेंट से है। इसी रेजीमेंट से पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान, जनरल असलम बेग और जनरल कियानी भी आगे बढ़े थे। इसीलिए उन्हें डार्क हॉर्स माना जाता है।

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    English summary
    Imran government of Pakistan changed the rules of the army so that Javed Bajwa remained in the post of army chief,
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