Adani Port की बड़ी अंतरराष्ट्रीय जीत: NQXT ऑस्ट्रेलिया का अधिग्रहण पूरा, कमाई के अनुमान में भारी उछाल
अडानी पोर्ट्स (APSEZ) ने ऑस्ट्रेलिया के नॉर्थ क्वींसलैंड एक्सपोर्ट टर्मिनल (NQXT) को पूरी तरह से खरीदने का काम पूरा कर लिया है। इस खरीदारी का सबसे बड़ा लक्ष्य साल 2030 तक कंपनी की सामान संभालने की क्षमता (कार्गो हैंडलिंग) को 1 अरब टन तक पहुंचाना है।
यह सौदा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्ते पर अडानी पोर्ट्स की पकड़ को बहुत मजबूत बना देगा। इस टर्मिनल के पास हर साल 5 करोड़ टन सामान भेजने की क्षमता है और यह उत्तरी क्वींसलैंड में बहुत लंबे समय के लिए किराए (लीज) पर मिला हुआ है।

भारत की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी APSEZ ने छोटे शेयरधारकों, भारतीय रिजर्व बैंक और ऑस्ट्रेलिया की निवेश एजेंसी से सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद यह सौदा पूरा किया है। इसके बदले में APSEZ ने बेचने वाली कंपनी को नकद पैसे के बजाय अपनी कंपनी के 14 करोड़ से ज्यादा शेयर दिए हैं।
इस टर्मिनल के आने के बाद अडानी पोर्ट्स की भविष्य की कमाई के अनुमान भी बढ़ गए हैं। साल 2026 के लिए कंपनी की संभावित कमाई का अंदाजा अब 21,000 करोड़ से बढ़कर करीब 23,350 करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह, कंपनी द्वारा साल भर में संभाले जाने वाले कुल सामान का वजन भी अब 55 करोड़ मीट्रिक टन के करीब पहुंच सकता है।
APSEZ के सीईओ अश्विनी गुप्ता ने इसे कंपनी की तरक्की का एक बहुत बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल बहुत अच्छी जगह पर स्थित है और इसके विकास की काफी संभावनाएं हैं। उनके मुताबिक, इजराइल, श्रीलंका और तंजानिया के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के इस टर्मिनल से दुनिया भर के व्यापार पर कंपनी का असर और बढ़ जाएगा।
यह टर्मिनल कमाई के मामले में बहुत भरोसेमंद है क्योंकि इसके ग्राहकों के साथ पक्के और सुरक्षित समझौते हैं। यह गहरे समुद्र के किनारे बना है, जिससे बड़े जहाजों का आना-जाना आसान होता है। यहाँ से ज्यादातर सामान (करीब 88%) भारत और चीन जैसे एशियाई देशों को भेजा जाता है। इस टर्मिनल को चलाने का अधिकार साल 2110 तक यानी अगले 85 सालों के लिए कंपनी के पास रहेगा।
इस टर्मिनल ने वहां के इलाके में करीब 8,000 लोगों को नौकरियां दी हैं और सुरक्षा व पर्यावरण के नियमों का भी यहाँ सख्ती से पालन होता है। आने वाले समय में यहाँ से साफ ईंधन (ग्रीन हाइड्रोजन) भेजने की भी योजना है।
अडानी समूह की यह कंपनी अब समुद्र के किनारे से लेकर ग्राहक के दरवाजे तक सामान पहुंचाने वाली एक बड़ी ताकत बन गई है। भारत के अलग-अलग तटों पर 15 बंदरगाहों और जहाजों के बड़े बेड़े के साथ, यह कंपनी भारत के कुल बंदरगाह व्यापार का लगभग 28% हिस्सा अकेले संभालती है।












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