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कोरोना वायरस के बीच अमिताभ बच्चन ने शेयर की पिता की कविता, उजाले की किरण दिखाती है 'अंधेरे का दीपक' की पंक्तियां

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नई दिल्ली। भारत सहित पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस (कोविड-19) संकट का सामना कर रही है। बहुत से लोग अपनों को इस वायरस के चलते खो रहे हैं, तो बड़ी संख्या में रोजाना लोगों के संक्रमित होने की खबर भी आ रही है। ऐसे में लोगों के बीच वायरस को लेकर डर भी बना हुआ है। इस बीच बॉलीवुड मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सकारात्मकता फैलाने की कोशिश की है। अभिनेता ने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखी गई एक कविता शेयर की है। जो लोगों को काफी पसंद आ रही है।

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कविता का अंग्रेजी मतलब भी बताया

कविता का अंग्रेजी मतलब भी बताया

अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ये कविता शेयर की है। कविता को शेयर करते हुए अमिताभ ने कैप्शन में इसका अंग्रेजी मतलब भी बताया है। उन्होंने लिखा है कि इस कविता का भावार्थ है कि 'हां रात अंधेरी है लेकिन छोटा सा लैंप जलाना कहां मना है। जिस सपने के घर को आपने स्नेह और प्रेम से बनाया, वह ढह गया, तो ईंट, पत्थर, कंकड़ों को जुटाकर एक शांति की छोटी सी कुटिया बनाना कब मना है। मेरे श्रद्धेय बाबू जी हरिवंश राय बच्चन के काव्यात्मक शब्दों में।'

कविता का शीर्षक है- 'अंधेरे का दीपक'

कविता का शीर्षक है- 'अंधेरे का दीपक'

कविता इस प्रकार है-

है अंधेरी रात पर

दीवा जलाना कब मना है?

कल्पना के हाथ से कम

नीय जो मंदिर बना था,

भावना के हाथ ने जिनमें

वितानों को तना था,

स्वप्न ने अपने करों से

था जिसे रुचि से संवारा

स्वर्ग के दुष्प्राय रंगों

से, रसों से जो सना था,

ढह गया वह तो जुटाकर

ईंट, पत्थर, कंकड़ों को

एक अपनी शांति की

कुटिया बनाना कब मना है?

सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं अमिताभ

सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं अमिताभ

बता दें अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। वह अपने विचार, पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर शेयर करते हैं। दो दिन पहले अमिताभ बच्चन ने इंस्टाग्राम पर लिखा था- 'इस Lockdown के काल में जितना मैंने सीखा, समझा, और जाना, उतना मैं अपने 78 वर्षों के जीवन काल में न सीख सका, न समझ सका और न ही जान सका! इस सच्चाई को व्यक्त करना, इसी सीख, समझ और जानने का परिणाम है!'

प्रवासी मजदूरों की कर रहे मदद

प्रवासी मजदूरों की कर रहे मदद

बता दें बिग बी हाजी अली ट्रस्ट और पीर मखदूम ट्रस्ट के साथ मिलकर प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे हैं। वह न केवल इन लोगों को इनके घरों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं बल्कि रोजाना 4500 पैकेट पके हुऐ खाने के भी बांट रहे हैं। वह ऐसा 28 मार्च से ही कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश यादव बिग बी की ओर से इस कार्य को देख रहे हैं। ये खाना मुंबई के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जिनमें अरब गली, एंटॉप हिल, वर्ली लोटस, महिम दरगाह, हाजी अली दरगाह, धारावी और सायान शामिल हैं। वहीं वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन अब ब्रह्मास्त्र, चेहरे, झुंड और गुलाबो सिताबो जैसी फिल्मों में दिखाई देंगे।

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English summary
actor amitabh bachchan shared poem of father harivansh rai bachchan for positivity amid covid19
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