हौसले को सलाम: एसिड अटैक विक्टिम ने दिया नई जिंदगी को जन्म, लक्ष्मी बनी मां

नयी दिल्ली (ब्यूरो)। 10 साल पहले (22 अप्रैल 2005) एक दरिंदे ने उसके चेहरे को तेजाब से तो बिगाड़ दिया मगर उसके हौसलों का बाल तक बांका नहीं कर सके। नीचे जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो उसी हौसले और जज्बे का सबूत है। जी हां हम बात कर रहे हैं एसिड अटैक विक्टिम लक्ष्मी की जो मां बन गई है।

Acid attack victim Laxmi Saa became mother of beautiful baby Pihu

उसकी बेटी का नाम पीहू है और वो सात माह की हो गई है। लक्ष्मी ने पहली बार अपनी बेटी की तस्वीर शेयर की है। पीहू का ज्यादातर समय एसिड अटैक पीडि़ताओं के लिए काम करने वाले एनजीओ ‘स्टॉप एसिड अटैक कैंपेन' के ऑफिस की ‘छांव' में गुजरता है।

लिव इन रिलेशन में रहती हैं लक्ष्मी

लक्ष्मी अपने पार्टनर आलोक के साथ पिछले कुछ सालों से लिव इन रिलेशन में रह रही हैं। दोनों ने शादी ना किए बिना पूरी जिंदगी साथ रहने का फैसला किया है। पीहू को लेकर आलोक का कहना है कि 'पीहू की पूरी जिम्मेदारी लक्ष्मी ही उठाती है। ऐसे में, लड़कियों को अकेले पेरेंट बनने का हक मिलना चाहिए। आलोक ने कहा कि हम पीहू को स्कूल नहीं भेजेंगे और उसकी परवरिश बिल्कुल अलग तरह से करेंगे।'

एसिड से जले चेहरों को देखकर बिल्कुल भी नहीं डरती है पीहू

अगर आप एसिड से जले पीडि़तों के चेहरे देख लें तो शायद आप डर के मारे खाना छोड़ दें, लेकिन पीहू इन चेहरों से बिल्कुल नहीं डरती है। पीहू की सुबह और शाम इन्हीं चेहरों के बीच गुजरता है। पीहू अगर लक्ष्मी को ना देखे तो बेचैन हो जाती है। या यूं कह लें कि लक्ष्मी ही पीहू की मुस्कुराहट है।

 Acid attack victim Laxmi Saa

लक्ष्मी पूछती थी 'चेहरा देखकर बच्चा डरेगा तो नहीं'

आलोक ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान लक्ष्मी घबराई रहती थी और अकसर पूछती थी कि कहीं चेहरा देखकर उसका बच्चा डर तो नहीं जाएगा। आलोक ने बताया कि लक्ष्मी कभी-कभी रोने लगती थी। उसे समझाना पड़ता था कि उनकी बेटी आम बच्चों जैसी नहीं है, जो तेजाब पीड़ितों को देख भूत-भूत चिल्लाए। वो गर्व करेगी कि उसकी मां लक्ष्मी हैं।"

लक्ष्मी को मिशेल ओबामा ने दिया ‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ करेज' अवार्ड

लक्ष्मी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की खुली बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके अलावा 2014 में मिशेल ओबामा ने लक्ष्मी को ‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ करेज' अवॉर्ड से सम्मानित किया।

कब हुआ था लक्ष्मी पर एसिड अटैक और कैसा हुआ था महसूस

बीते साल वनइंडिया से खास बातचीत में लक्ष्मी ने बताया था कि बात 2005 की है जब उसकी उम्र 15 साल थी और वो 7वीं कक्षा में पढ़ती थी। उसकी उम्र के दोगुने से भी बड़े उम्र (32 वर्ष) के एक व्‍यक्ति ने उसे शादी के लिये प्रपोज किया था। लक्ष्‍मी ने उसे इंकार कर दिया था। लक्ष्‍मी ने बताया कि 22 अप्रैल 2005 की सुबह लगभग 10 बजकर 45 पर वो दिल्‍ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके खान मार्केट में एक बुक स्‍टोर पर जा रही थी कि वो युवक अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ आया और उसे धक्‍का दे दिया। धक्‍का लगते ही लक्ष्‍मी सड़क पर गिर गई और उस युवक ने उसके उपर तेजाब फेंक दिया।

लक्ष्मी ने बताया था कि पहले तो ठंडा सा लगा है फिर शरीर तेजी से जलने लगा था। कुछ ही सेकण्ड में मेरे चेहरे और कान के हिस्सों से मांस जलकर जमीन पर गिरने लगा था। एसिड बहुत तेज था जिसकी वजह से चमड़ी के साथ-साथ मेरी हड्डियां भी गलनी शुरू हो गई थीं। लक्ष्‍मी ने बताया कि वो 2 महीने से ज्‍यादा समय तक राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल में भर्ती रही थी। अस्‍पताल से निकलने के बाद घर आकर जब उन्‍होंने शीशा देखा तो उन्‍हें अहसास हो गया कि उनकी जिंदगी अब उजड़ चुकी है।

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