आम आदमी से हारा भ्रष्ट तंत्र, नास्तिक से आस्तिक बनें केजरीवाल

AAP wins critical trust vote in Delhi, People Happy
नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसकी स्वप्न में भी कल्पना किसी ने नहीं की थी। एक आम आदमी जिसका नाम अरविंद केजरीवाल है, जिन्होंने राजनीति में मात्र 11 महीने पहले कदम रखा था, आज प्रदेश की मुख्यमंत्री है, अपने हौसलों औऱ सच्चाई के बूते पर सत्ता पर काबिज होने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार आम आदमी पार्टी ने गुरूवार को सदन में विश्वासमत भी हासिल कर लिया है और अगले 6 महीने तक वह पूरी तरह से सत्ता पर रिजर्व हो गये हैं।

अपने आधे घंटे से ज्यादा के संबोधन में केजरीवाल ने सदन के सामने तीन सवाल रखे और कहा कि देश की आम जनता अब जाग गयी है। इसलिए अब मेरे सवालों का जवाब सभी राजनैतिक तंत्रों को सोचकर देना होगा। केजरीवाल के यह तीन सवाल थे..

1.दिल्ली से भ्रष्टाचार मिटाने में कौन-कौन सा दल आप के साथ है?
2. सच्चाई और ईमानदारी की लड़ाई में कौन-कौन शामिल होना चाहता है?
3. मेरी ओर से उठाये गये 17 मुद्दों पर कौन-कौन सदस्य हमारे साथ हैं?

केजरीवाल के इस बयान पर विपक्ष पार्टी के नेता हर्षवर्धन ने कड़ा विरोध किया औऱ कहा कि केजरीवाल ने बहुत बड़े-बड़े वादे किये हैं लेकिन केवल लच्छेदार भाषाओं से ही सत्ता नहीं चलती है, हिम्मत हैं तो अपनी कही हर बात को पूरा करके दिखायें।

जिस पर अरविंद केजरीवाल ने मुस्कुराते हुए कहा कि देश की राजनीति में उसी दिन दूषित हो गयी थी जिस दिन उसने आम आदमी को हल्के में ले लिया था। राजनेता भूल गये हैं कि खेत आम आदमी जोतता है नेता नहीं, कपड़े आम आदमी सीलता है नेता नहीं इसलिए आम आदमी को ललकारना अब लोग बंद कर दें। 4 और 8 दिसंबर को जो कुछ भी दिल्ली में हुआ वह आम आदमी की वजह से ही हुआ है जो कि किसी भी चमत्कार से कम नहीं है। इस चमत्कार से पहले मैं भगवान को नहीं मानता था लेकिन अब मानने लगा हूं।

इसलिए मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अगले 6 महीने में ही आप लोग वह सब देखेंगे जो कि मैंने औऱ मेरी पार्टी ने कहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की अल्पमत वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। सरकार को कांग्रेस के आठों विधायकों ने समर्थन दिया। 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटों वाली आप को सरकार बचाने के लिए कांग्रेस का समर्थन जरूरी था। आप को 37 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि विरोध में 32 मत पड़े। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 31 और उसकी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के एक विधायक ने सरकार के विरोध में मतदान किया।

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