गोवा के बाद पंजाब में फंस सकती है आम आदमी पार्टी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का किया खुला उल्लंघन
आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए जो घोषणा पत्र जारी किया है, उसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया गया है।
नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पार्टी ने दावा किया कि अगर आप सरकार में आती है तो दलित को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। शुक्रवार को आप ने पंजाब चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी किया। हालांकि इस चुनावी वादे से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर गिया है। बता दें कि बीती 2 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट धर्म और जाति के आधार पर वोट मांगना गलत है। कोर्ट ने भाषा और समुदाय के नाम पर भी वोट मांगने को गैर-कानूनी करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की संवैधानिक पीठ ने ये फैसला सुनाया था। 4-3 के बहुमत से ये फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में साफ किया है कि अगर कोई भी उम्मीदवार चुनाव में धर्म, जाति, भाषा या फिर समुदाय के नाम वोट मांगता है तो ये गैरकानूनी है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष पद्धति है। इस आधार पर वोट मांगना संविधान की भावना के खिलाफ है। जन प्रतिनिधियों को अपना कामकाज धर्मनिरपेक्षता के आधार पर ही करना चाहिए। हिंदुत्व केस में सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। जबकि आप की ओर से कई घोषणा पत्र तमाम हिस्सों और अवसरों पर जारी किए गए हैं थे लेकिन इन सभी को जोड़ कर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया है।
घोषणा पत्र जारी करने के दौरान आप नेता और सांसद भगवंत मान के साथ-साथ तमाम अन्य नेता भी मौजूद थे। बता दें कि नवंबर 2016 में जारी किए गए घोषणा पत्र में भी आप ने दलित को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही थी। हालांकि पार्टी ने एक बार फिर से खुले तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। इससे पहले खुद आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी चुनाव आयोग ने फटकार लगाई थी, जब उन्होंने वोट के लिए पैसे स्वीकार करने की बात गोवा के एक रैली में कही थी। ये भी पढ़ें: राष्ट्रपति ने स्वीकार किया मेघालय के राज्यपाल का इस्तीफा, असम के राज्यपाल को दिया अतिरिक्त प्रभार












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