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'जो डर गया, समझो मर गया'- Raghav Chadha को लेकर AAP ने खोला मोर्चा, आतिशी-सौरभ भारद्वाज ने गिनवाईं गलतियां

AAP Internal Dispute Raghav Chadha Vs AAP: आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बार फिर सनसनीखेज आंतरिक विवाद फूट पड़ा है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने गुरुवार को राज्यसभा में उपनेता (डिप्टी लीडर) पद से हटा दिया। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इस फैसले के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सदन में उठाए गए मुद्दों का जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अपनी 'खामोशी' पर सफाई दी।

लेकिन इसी वीडियो पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने पलटवार किया। दोनों ने चड्ढा पर सीधा हमला बोलते हुए AAP की मूल विचारधारा 'निडरता और जनता के मुद्दों पर लड़ाई' की याद दिलाई। साथ ही राघव की साफ-साफ गिनवाईं गलतियां...

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Saurabh Bharadwaj Counterattack Raghav Chadha: सौरभ भारद्वाज का तीखा पलटवार: 'जो डर गया, समझो मर गया'

AAP के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा के वीडियो पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा, 'राघव भईया, मैंने आपका वीडियो देखा। हम सब अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने सिर्फ एक ही चीज सीखी है - जो डर गया, वो मर गया।'

भारद्वाज ने आगे कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता जनता के मुद्दे सरकार की आंखों में आंख डालकर उठाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो भी गंभीर मुद्दा उठाता है, उसे केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर बैन कर रही है, FIR दर्ज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में 'सॉफ्ट पीआर' या 'समोसे' जैसे छोटे मुद्दों पर समय बर्बाद करने की बजाय देश के बड़े संकटों पर बोलना जरूरी है।

भारद्वाज ने खासतौर पर पश्चिम बंगाल का जिक्र किया, जहां चुनाव से पहले वोट काटने और फर्जी वोट बनाने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल चुनाव आयोग (CEC) के खिलाफ महाभियोग लाना चाहते थे, लेकिन AAP ने साइन करने से रोक दिया। 'जब विपक्ष वॉकआउट करता है, तो AAP वॉकआउट नहीं करती। आपने पिछले सालों में प्रधानमंत्री या BJP सरकार से कभी सवाल नहीं किया। पंजाब के मुद्दे उठाने से भी डरते हैं। भारद्वाज ने तंज कसा कि गुजरात में 160 कार्यकर्ताओं पर झूठे केस में FIR हुई, फिर भी चुप्पी।

Atishi Marlena ने खोली पोल: LPG संकट से लेकर बंगाल चुनाव तक - राघव जी, BJP से डर क्यों?

AAP की जानी-मानी नेता और दिल्ली कैबिनेट मंत्री आतिशी ने और भी तीखा हमला बोला। उन्होंने एक अलग वीडियो में चड्ढा से सीधे सवाल पूछे:-

  • 'राघव जी, आप BJP से इतना डरते क्यों हैं? मोदी जी से सवाल पूछने में डरते क्यों हैं?'
  • देश में LPG सिलेंडर का भारी संकट है। आम परिवारों को खाना बनाने में दिक्कत हो रही है, लेकिन आपने यह मुद्दा सदन में नहीं उठाया। जबकि AAP ने पंजाब और दिल्ली में इसे उठाया था।
  • पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का मिसयूज हो रहा है, वोट काटे जा रहे हैं। आपने एक बार भी बंगाल में लोकतंत्र पर हमले पर सवाल क्यों नहीं उठाया?

आतिशी ने चड्ढा की 'अनुपस्थिति' पर भी सवाल किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के तमाम नेता झूठे केस में जेल गए, तब चड्ढा लंदन में आंखों की सर्जरी कराने चले गए थे। आतिशी ने पूछा कि जब देश के लिए सड़क पर प्रदर्शन हो रहे थे और गिरफ्तारियां हो रही थीं, आप कहां थे?

AAP में गहराती कलह: 'केजरीवाल के सिपाही' vs 'सॉफ्ट अप्रोच' की बहस

यह विवाद सिर्फ पद हटाने तक सीमित नहीं है। यह AAP की अंदरूनी रणनीति पर गहरी बहस को उजागर करता है। एक तरफ केजरीवाल के करीबी नेता (भारद्वाज, आतिशी, संजय सिंह आदि) खुद को 'अरविंद केजरीवाल के सिपाही' बता रहे हैं और आक्रामक, निडर राजनीति की वकालत कर रहे हैं। दूसरी तरफ चड्ढा पर 'सॉफ्ट पीआर' और BJP से समझौता करने के आरोप लग रहे हैं।

चड्ढा ने अपने वीडियो में कहा था, 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं।' लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि संसद का सीमित समय बड़े मुद्दों के लिए है, न कि व्यक्तिगत इमेज बनाने के लिए। इस विवाद से AAP के अंदर दो धड़ों की तस्वीर साफ हो गई है - एक जो केजरीवाल की 'लड़ाकू' छवि पर जोर देता है, और दूसरा जो संसदीय रणनीति में नरम रुख अपनाने का पक्षधर माना जा रहा है।

AAP की एकजुटता की परीक्षा

AAP का मूल मंत्र हमेशा रहा है कि निडर होकर लड़ना। सौरभ भारद्वाज और आतिशी के बयानों ने यही मंत्र दोहराया है। राघव चड्ढा का भविष्य और पार्टी की एकता अब इसी बहस पर निर्भर करेगी। क्या यह विवाद AAP को और मजबूत बनाएगा या आंतरिक दरारें बढ़ाएगा? फिलहाल, 'जो डर गया, समझो मर गया' वाली लाइन पार्टी के अंदर गूंज रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रही है।

ब्लू-आइड बॉय से साइडलाइन तक: राघव चड्ढा की बदलती राजनीति की कहानी
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