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भगवंत मान: नेताओं पर तंज कसने से पंजाबी सियासत के केंद्र तक

By BBC News हिन्दी
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आम आदमी पार्टी ने पंजाब में पार्टी के पुराने और विश्वस्त नेता भगवंत मान को आगामी विधानसभा चुनाव में अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया है. उनके नाम का एलान पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किया.

aap declared Bhagwant Mann as cm face in punjab election 2022

भगवंत मान को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की औपचारिक घोषणा के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ''पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री का चेहरा बनने के लिए सरदार भगवंत मान को बधाई. पूरा पंजाब आम आदमी पार्टी को एक उम्मीद की तरह देख रहा है. यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है और मैं इस बात को लेकर निश्चिंत हूँ कि भगवंत मान सभी पंजाबियों के चेहरे पर मुस्कान वापस लाएंगे.''

भगवंत मान को लोग बतौर कॉमेडियन और एक राजनेता के रूप में जानते हैं. वे पंजाब में संगरूर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार आम आदमी पार्टी के सांसद हैं. वो पार्टी की पंजाब इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद से भगवंत मान पार्टी के स्टार प्रचारक रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में वे पार्टी के अकेले ऐसे नेता हैं जिनकी पूरे पंजाब में अपील है. उन्हें आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति और सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में भी देखा जाता रहा है.

भगवंत मान की राजनीति, कला और निजी ज़िंदगी की कुछ झलकियाँ.

भगवंत मान के कुछ रोचक किस्से

आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के मीडिया सलाहकार और पूर्व पत्रकार मंजीत सिंह सिद्धू भगवंत मान के सहपाठी रहे हैं. उनके अनुसार भगवंत मान के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू ये है कि उनमें अपना पक्ष रखने की एनर्जी है. वे जितने जोश के साथ हज़ारों लोगों को संबोधित करते हैं उतने ही जोश और गंभीरता के साथ दो-चार लोगों से भी बात करते हैं.

मंजीत सिद्धू के मुताबिक ज्यादातर लोग भगवंत को लोग कॉमेडियन और नेता के तौर पर ही जानते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि वे बहुत गहरे कवि भी हैं.

हालाँकि वो कहते हैं कि उन्होंने अभी तक अपनी कविताओं की एक पुस्तक प्रकाशित नहीं करवाई है.

भगवंत मान को खेलों में भी दिलचस्पी है. उन्हें एनबीए, क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल मैच देखना पसंद है. वे दुनिया भर के खिलाड़ियों को फॉलो करते हैं साथ ही उनके बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं. वे कभी-कभी रात में अलार्म लगाकर सोते हैं और रात को 2-3 बजे उठकर मैच देखते हैं.

भगवंत मान ने अपने गांव के लगभग सभी सहपाठियों और मित्रों को हवाई जहाज़ में यात्रा करवाई है.

मंजीत सिद्धू बताते हैं कि वे जब भी पंजाब के बाहर शो करने जाते हैं तो अपने किसी ना किसी दोस्त को अपने साथ घुमाने ले जाते हैं. मोबाइल नंबर मौखिक रूप से याद रखना उनका एक खास गुण है.

कहते हैं कि अखबार और रेडियो के साथ उनका खास लगाव है. वो सुबह उठकर अखबारों के ज़िलों तक के संस्करण देखते हैं. इनके बारे में वे कहते हैं इनसे राज्य के हर कोने के बारे में ग्राउंड की जानकारी मिलती है. रेडियो के ऊपर मैचों की कमेंट्री सुनना उनकी बचपन की आदत है और इसे उन्होंने आज तक नहीं छोड़ा है.

कॉमेडी में शुरुआती क़दम

भगवंत मान का जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरूर जिले शीमा मंडी के करीब सतोज गांव में हुआ था. उनके पिता महिंदर सिंह एक सरकारी अध्यापक थे और मां हरपाल कौर गृहिणी हैं.

स्नातक की पढ़ाई पूरी कर भगवंत मान कॉमेडी के क्षेत्र में आ गए. संगरुर के सुनाम शहीद उधम सिंह कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने कॉमेडी और कविता में कई प्रतियोगिताएं जीती. इसके साथ ही वे प्रोफेशनल कॉमेडियन बन गए.

उनकी पहली कॉमेडी और गानों की पैरोडी की टेप 1992 में 'गोबी दी ए कच्चिए व्यापारने' आई थी. वे कॉमेडी की दुनिया में छा गए.

बारहवीं करने के बाद उन्होंने बीकॉम में दाखिला लिया लेकिन कॉमेडी के प्रोफेशन में व्यस्त होने के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी. 1992 से 2013 तक कॉमेडी की 25 एल्बम रिकॉर्ड करवाई. उन्होंने पांच गानों की टेप भी रिलीज की हैं. भगवंत मान 1994 से 2015 तक 13 हिंदी फिल्मों और विज्ञापनों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है.

'जुगनू', 'झंडा सिंह', 'बीबो बुआ', 'पप्पू पास' जैसे कॉमेडी पात्र भगवंत मान की ही देन हैं. जगतार जग्गी और राणा रणबीर के साथ कॉमेडी कर चुके भगवंत मान ने 'जुगनू मस्त मस्त' जैसे कॉमेडी टीवी शो और 'नो लाइफ विद वाइफ' जैसे स्टेज शो किए हैं.

गायक करमजीत अनमोल को कॉमेडी शो के साथ जोड़ने और अभिनय में लाने वाले भगवंत मान ही थे.

करमजीत अनमोल उनके कॉलेज के दिनों के दोस्त हैं और वे पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम हैं.

भगवंत ने इंद्रजीत कौर के साथ शादी की. उनका एक बेटा और एक बेटी है. पत्नी भगवंत मान से अलग अमेरिका में रहती हैं. भगवंत मान अपनी मां के साथ गांव सतोज में रहते हैं.

उनकी एक बहन मनप्रीत कौर की शादी सतोज के करीब ही गांव में की हुई है.

घटना जो भगवंत मान को राजनीति में ले आई

भाषण देने का शौक भगवंत मान को बचपन से था. उस वक्त उन्हें ये भी नहीं पता था कि वे कॉमेडी कलाकार बनेंगे या राजनेता. मनजीत सिद्धू बताते हैं कि ''भगवंत मान खेतों में पानी देते समय और लकड़ी काटते समय 'कस्सी' के डंडे को ही माइक बना लेते थे और भाषण देते रहते थे.

सिद्धू बताते हैं कि कॉमेडी टेप के जरिए उन्होंने राजनीति और समाज के मुद्दों के ऊपर व्यंग्य करना उनकी कला का प्रमुख सरोकार रहा है.

2009-2010 में उन्होंने अखबारों के लिए नियमित कॉलम लिखना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने फाजिल्का इलाके में बच्चियों को अजीबो-गरीब बीमारी लगने की रिपोर्ट पढ़ी.

भगवंत मान अगले दिन ही नानक और आसपास के दोनों गांव में पहुंच गए. वहां पीने के पानी की समस्या थी, जिससे लोगों की हालत खराब हुई थी. कुछ अप्रवासी दोस्तों की मदद से भगवंत मान ने इस क्षेत्र में पानी का एक ट्यूबवेल लगाकर अपने स्तर पर कोशिश की।

उन्होंने कुछ सामाजिक और मीडिया क्षेत्र के लोगों को साथ लेकर इस मुद्दे को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया में उठाया. 2011 में प्रकाश सिंह बादल के भतीजे और तत्कालीन वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने अकाली दल से बगावत कर दी थी.

प्रख्यात कृषि विज्ञानी सरदार सिंह जोहल के नेतृत्व में जालंधर में पंजाब के मुद्दों को लेकर सम्मेलन का आयोजन किया गया. यहां भगवंत मान और मनप्रीत बादल की मुलाकात हुई और भगवंत मान को उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया.

भगवंत मान का राजनीतिक सफर

भगवंत मान ये यह बात राजनीति में कदम रखते हुए मीडिया से बातचीत के दौरान कही थी. ''मैं अपनी कॉमेडी के माध्यम से एक तरह की राजनीतिक और सामाजिक कॉमेंट्री ही करता रहा हूं. अब मुझे लगता है कि कीचड़ को साफ करने के लिए कीचड़ में उतरना पड़ेगा. इसलिए अब मैं सक्रिय राजनीति में आ गया हूं''.

उन्होंने कहा, ''अकाली और कांग्रेस ने मिलकर सत्ता का चक्र बनाया है. पंजाब के लोग इसमें पिस रहे हैं. पंजाब को एक विकल्प की जरूरत है. हम इसे देने की कोशिश करेंगे''.

भगवंत मान बतौर पेशेवर कलाकार राजनीतिक मंचों पर जाते रहे हैं लेकिन उन्होंने औपचारिक तौर पर राजनीति नहीं की. खासकर भगवंत मान ने तीसरे विकल्प के तौर पर बलवंत सिंह रामूवालिया की लोक भलाई पार्टी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए. लेकिन वे कभी किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए. अपने कॉलेज के दिनों में वे वामपंथ की विचारधारा से प्रभावित थे, लेकिन किसी पार्टी के सदस्य नहीं बने.

जब मनप्रीत बादल ने मार्च 2011 में पंजाब में पीपुल्स पार्टी का गठन किया, तो भगवंत मान भी राजनीति में कूद पड़े और पीपीपी के संस्थापक नेताओं में से एक बन गए.

दिग्गजों से हारे और हराया

फरवरी 2012 में पंजाब विधानसभा चुनाव में भगवंत मान ने लहरागागा निर्वाचन क्षेत्र से पीपीपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. भगवंत मान पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता राजिंदर कौर भट्टल के खिलाफ चुनाव हार गए.

2012 के विधानसभा चुनाव में पीपीपी को कोई सीट नहीं मिली और अकाली दल ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई. इसके बाद मनप्रीत सिंह बादल ने कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी शुरू कर दी. इसके बाद भगवंत मान ने कांग्रेस में शामिल होने के बजाय एक अलग रास्ता चुना और 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए.

अन्ना हजारे आंदोलन से उभरी आम आदमी पार्टी को पंजाब में भारी समर्थन मिला और 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने चार सीट जीतीं.

भगवंत मान इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रचार का चेहरा थे. उन्होंने लोकसभा क्षेत्र संगरूर से चुनाव लड़ा और अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह ढींडसा को 2,11,721 मतों के भारी अंतर से हराया.

इस चुनाव में कांग्रेस के नेता विजय इंदर सिंगला तीसरे नंबर पर रहे.

2019 के लोकसभा चुनाव के समय तक पंजाब में राजनीतिक हालात बदल चुके थे. 2017 के चुनावों में कांग्रेस ने फिर से सत्ता हासिल कर ली थी.

आम आदमी पार्टी भी विभाजित हो गई, सुखपाल खैरा की पंजाब एकता पार्टी और धर्मवीर गांधी की न्यू पंजाब पार्टी और बैंस भाइयों की लोक इंसाफ पार्टी ने गठबंधन बनाया, लेकिन इस गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिली.

शिरोमणि अकाली दल के साथ भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के अलावा, भगवंत मान एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने संगरूर से तीसरी पार्टी के रूप में फिर से चुनाव जीता और लोकसभा में पहुंचे.

इसके साथ ही भगवंत मान आम आदमी पार्टी में अग्रणी नेता के रूप में उभरे.

8 मई, 2017 को, भगवंत मान को आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन उन्होंने कुछ ही समय बाद इस्तीफा दे दिया. वे इस बात से नाराज थे कि अरविंद केजरीवाल ने ड्रग माफिया को कथित रूप से संरक्षण देने के लिए अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ मानहानि मामले में अदालत में माफी मांगी थी.

2017 के चुनाव में भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी की टिकट पर जलालाबाद से सुखबीर बादल के खिलाफ लड़ाई लड़ी लेकिन भगवंत मान बादल से 18500 वोटों से हार गए.

कांग्रेस ने यहां से रवनीत बिट्टू को भी बाहर कर दिया था, जिससे भगवंत मान को त्रिकोणीय मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था.

2019 के लोकसभा चुनाव में भगवंत मान ने 111,111 मतों के साथ फिर से चुनाव जीता.

शराब को लेकर विवाद

राजनेताओं पर अक्सर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, और धन इकट्ठा करने का आरोप लगाया जाता है.

लेकिन अपने करीब एक दशक के राजनीतिक करियर में भगवंत मान पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि वे शराब पीते थे.

यह बात आप के बागी नेता योगेंद्र यादव ने 2015 में कही थी. उन्होंने मीडिया में दावा किया था कि जुलाई 2014 में पार्टी सांसदों की एक बैठक बुलाई गई थी. भगवंत मान मेरे साथ बैठे थे, उनसे शराब की गंध आ रही थी.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाद में भगवंत मान पर मीडिया में शराब के आदी होने का आरोप लगाया. कैप्टन अमरिंदर सिंह के आरोपों के कुछ दिनों बाद आप के बागी नेता हरिंदर सिंह खालसा ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपनी सीट बदलने की लिखित अपील की क्योंकि उन्हें भगवंत मान से शराब की गंध आ रही थी.

संसद में उनके भाषणों के दौरान कई बार सत्ताधारी भाजपा के सदस्य उन पर शराब के नशे में संसद आने का आरोप लगाते रहे.

एक बार जब भगवंत मान संसद में एक बहस के दौरान बोल रहे थे तो एक बीजेपी सांसद उनके पास आकर उन्हें सूंघ रहे थे, ये वीडियो वायरल हो गया.

वैसे तो कई नेता शराब पीते हैं लेकिन भगवंत मान पर दिन में शराब के नशे में रहने का आरोप लगा था. भगवंत मान पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दौरान 2015 में हुई फायरिंग में मारे गए युवकों के प्रदर्शन के समय भी शराब पीने का भी आरोप था.

इवेंट के दौरान उनका स्टेज से निकलते हुए का वीडियो भी वायरल हो रहा था, जिसमें कुछ लोगों ने उन पर शराब पीने का आरोप लगाया था.

लेकिन वे चुपचाप कार में बैठ जाते हैं और यह कहते हुए निकल जाते हैं कि वे कोई विवाद पैदा नहीं करना चाहते. ये सारे आरोप उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं.

भगवंत पर गायक मनमीत अलीशेर के अंतिम संस्कार में शराब पीने का भी आरोप लगाया गया था, जिनकी नवंबर 2016 में ऑस्ट्रेलिया में हत्या कर दी गई थी.

भगवंत मान और उनके समर्थकों ने शराब के आरोपों को शिअद-भाजपा और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार की साजिश करार दिया.

पंजाब में भी भगवंत मान के नशे में होने का दावा करते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के कई वीडियो वायरल हुए हैं. भगवंत मान और उनके समर्थक इसे शिअद-भाजपा और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार की साजिश बताते हैं.

20 जनवरी, 2019 को, भगवंत मान ने बरनाला में एक पार्टी रैली के दौरान अपनी मां की उपस्थिति में घोषणा की कि उन्होंने 1 जनवरी, 2019 से शराब को नहीं छूने की शपथ ली है.

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