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फलों से कोरोना फैलाने का आरोप, आधार कार्ड देखने के बाद मिल रही है ठेले वालों को कॉलोनियों में एंट्री

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कुछ लोग कॉलोनी के अंदर एक मीटिंग में कह रहे हैं कि फल और सब्जी बेचने वाले लोगों से उनके आधार कार्ड मांगे जाएं...

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि कुछ फल विक्रेता जानबूझकर थूक लगाकर फल बेच रहे हैं। इस तरह के मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए कुछ फल विक्रेताओं को गिरफ्तार किया है। वहीं सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाओं के वीडियो वायरल होने के बाद बाकी फल विक्रेताओं के सामने भी समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल, फल विक्रेताओं की पहचान के लिए अब उनसे आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं। मामला देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक कॉलोनी के लोग ठेले पर फल और सब्जी बेचने वाले लोगों से उनकी पहचान के लिए आधार कार्ड मांगने की बात कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

क्या है पूरा मामला?

दैनिक भास्कर में छपी राहुल कोटियाल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कुछ लोग कॉलोनी के अंदर बैठकर एक मीटिंग कर रहे हैं। इस मीटिंग में फैसला लिया जा रहा है कि कॉलोनी के अंदर फल और सब्जी बेचने वाले लोगों से उनके आधार कार्ड मांगे जाएं और अगर वो मुसलमान है तो उसे कॉलोनी में ना घुसने दिया जाए। मीटिंग के इस फैसले के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि ये लोग फलों पर थूक लगाकर बीमारी फैला रहे हैं, इसलिए ऐसे लोगों को कॉलोनी में घुसने से रोका जाए।

'मुस्लिम फल विक्रेता को ना घुसने दिया जाए'

'मुस्लिम फल विक्रेता को ना घुसने दिया जाए'

वीडियो में एक शख्स जोर देकर कह रहा है कि कॉलोनी में किसी भी मुस्लिम फल या सब्जी विक्रेता को ना घुसने दिया जाए। वीडियो में यह भी नजर आ रहा है कि इस मीटिंग के दौरान ही दो सब्जी वाले कॉलोनी में आते हैं, जिन्हें देखते ही कुछ लोग उनके पास पहुंचकर उनसे उनका नाम पूछते हैं। इसके बाद दोनों सब्जी वालों से आधार कार्ड मांगा जाता है और ना दिखाने पर यह कहकर भगा दिया जाता है कि कल से आधार कार्ड या कोई पहचान पत्र लेकर आना। इस दौरान एक शख्स यह भी कहता है कि उसने एक फल वाले से नाम पूछा तो उसने अपना नाम मिश्रा बताया, जबकि वो मुसलमान था। इस वीडियो को बड़ी संख्या में लोग अपने फेसबुक पेज पर शेयर कर रहे हैं।

वीडियो कहां का है और कब बनाया गया?

वीडियो कहां का है और कब बनाया गया?

जांच पड़ताल करने पर पता चला कि यह वीडियो करीब दो महीने पुराना है और उत्तरी दिल्ली के शास्त्री नगर इलाके का है। हालांकि जब शास्त्री नगर इलाके में जाकर स्थानीय लोगों से इस वीडियो के बारे में बात की गई, तो ज्यादातर लोगों ने यह तो माना कि उन्होंने ये वीडियो देखा है, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ये वीडियो उनके यहां का है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उनकी कॉलोनी में हिंदू-मुसलमान में भेदभाव जैसी कोई बात नहीं है। इस दौरान एक सब्जी वाला मिला, जिसने बताया कि वीडियो इसी कॉलोनी का है और बी-ब्लॉक में हुई मीटिंग का है।

वीडियो में दिख रहे लोगों ने क्या कहा

वीडियो में दिख रहे लोगों ने क्या कहा

बी-ब्लॉक में जाकर जब वीडियो में दिख रहे घरों को ध्यान से देखा गया तो यह स्पष्ट हो गया कि वीडियो इसी कॉलोनी का है। इसके बाद कॉलोनी के 2-3 लोगों ने स्वीकार किया कि वीडियो में दिख रहे लोग वही हैं। इनका कहना था कि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें मुस्लिम फल विक्रेता थूक लगाकर फल बेच रहे हैं, इन लोगों की ऐसी हरकतों की वजह से हम लोगों ने इनके आने पर रोक लगाई है। हालांकि इन लोगों को ये जानकारी नहीं थी कि मीटिंग के दौरान ये वीडियो किसने बनाया।

देखिए वीडियो:-

वीडियो के बाद फल और सब्जी विक्रेताओं की मुश्किल

इस वीडियो को लेकर जब आस-पास के इलाकों में फल बेचने वाले लोगों से बात कई गई तो पता चला कि कॉलोनियों में घुसने पर उनसे उनके पहचान पत्र मांगे जा रहे हैं। मोहम्मद अनस नाम के फल विक्रेता ने बताया, ‘किसी भी गली-मोहल्ले में पिछले 3-4 दिनों से हमें लोग कॉलोनियों में घुसने नहीं दे रहे हैं। कॉलोनी के लोग पहले हमसे हमारा पहचान पत्र मांगते हैं और फिर हमारा नाम देखकर हमें भगा देते हैं। कभी-कभी लोग हमें गाली देकर भगाते हुए कहते हैं कि तुम लोग थूक लगाकर फल बेचते हो, आइंदा से इस कॉलोनी में मत आना।'

'ये हमारी रोजी-रोटी है, हम ऐसा गंदा काम क्यों करेंगे'

'ये हमारी रोजी-रोटी है, हम ऐसा गंदा काम क्यों करेंगे'

कुछ इसी तरह के अनुभव मोहम्मद सलमान नाम के फल विक्रेता ने भी बताए। उन्होंने कहा, 'ये हमारी रोजी-रोटी है, हम ऐसा गंदा काम क्यों करेंगे। जो भी ऐसा काम करता है वो बहुत गलत है, लेकिन उसकी कीमत हम लोग चुका रहे हैं।' कुछ और फल वालों से बातचीत में पता चला कि इस तरह की घटनाएं गुलाबी बाग, त्रिनगर, अंधा मुगल और आदर्श नगर जैसे कई इलाकों में हुई हैं, जहां फल बेचने वालों से उनका पहचान पत्र मांगा जा रहा है। एक फल विक्रेता ने बताया कि एक कॉलोनी में लाउड स्पीकर पर ऐलान करके कहा गया कि मुसलमान फल विक्रेता इस कॉलोनी में ना घुसें। इस बारे में जब संबंधित थाने के पुलिस अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला आया है और वो इस मामले की जांच कर रहे हैं।

इस वीडियो की वजह से खड़ा हुआ विवाद

दरअसल इस पूरे विवाद के पीछे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक अन्य वीडियो है, जिसमें एक मुस्लिम फल विक्रेता बार-बार अपने अंगूठे से फलों पर थूक लगा रहा है। जांच करने पर पता चला कि वायरल हो रहा ये वीडियो मध्य प्रदेश के रायसेन का है और जो फल विक्रेता इसमें नजर आ रहा है, उसका नाम शेरू मियां है। वीडियो सर्दियों के समय का है और करीब 2 महीने पुराना है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में शेरू के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। शेरू की बेटी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके पिता की मानसिक हालत ठीक नहीं है। हालांकि इस एक वीडियो की वजह से देश के कई राज्यों में फल विक्रेताओं को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

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