PM नरेंद्र मोदी जहां 45 घंटे करेंगे मेडिटेशन, जानें वहां की 5 दिलचस्प बातें, क्यों कन्याकुमारी को ही चुना?
PM Modi Meditation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मई से 1 जून तक तमिलनाडु के कन्याकुमारी में साधना करने जा रहे हैं। सियासत से दूर पीएम मोदी कन्याकुमारी में ध्यान मग्न होने की पूरी तैयारी में हैं। पीएम मोदी, जहां साधना करने जा रहे हैं, वहां कभी 1892 में दार्शनिक, लेखक और आध्यात्मिक नेता स्वामी विवेकानंद भी साधना करने गए थे।
स्वामी विवेकानंद 1892 में कन्याकुमारी के तट से तैरकर एक टापू पर पहुंचे थे और वहां तीन दिनों तक ध्यान किया और ज्ञान प्राप्त किया था। अब पीएम मोदी ने भी उसी शिला को चुना है ध्यान करने के लिए। इस जगह को विवेकानंद रॉक मेमोरियल (Vivekananda Rock) कहा जाता है। पीएम मोदी यहां 45 घंटों तक एकांत में मेडिटेशन करेंगे।

अब लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर मेडिटेशन के लिए पीएम मोदी ने कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल को ही क्यों चुना है? आइए जानें इसकी 5 खास बातें?
- 1. पीएम मोदी विवेकानंद रॉक में जहां मेडिटेशन करेंगे, वह एक छोटा चट्टानी टापू है जो कन्याकुमारी के वावथुराई समुद्र तट से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह मुख्य भूमि भारत का दक्षिणी छोर है और हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है। आज वावथुराई से 15 मिनट की फेरी सेवा के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है।

- 2.माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद के जीवन में समंदर के बीच स्थित इस शिला का वही महत्व है, जो कभी गौतम बुद्ध के लिए सारनाथ का था। 1892 में, स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी के तट से तैरकर इस शिला पर ध्यान लगाने के लिए गए थे। उनके शिष्यों का मानना है कि उन्होंने वहां तीन दिन और तीन रात ध्यान लगाया और ज्ञान प्राप्त किया। स्वामी विवेकानंद चार साल तक भारत के कोने-कोने में घूमते रहे और कन्याकुमारी में उन्होंने आखिरकार अपना दर्शन तैयार किया।
- 3.कन्याकुमारी की धार्मिक मान्यता भी बहुत है, कहा जाता है कि यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं, यहां के बारे में ये भी कहा जाता है कि यहां पर देवी पार्वती, कन्याकुमारी रूप में विराजमान हैं और भगवान शिव की प्रतीक्षा कर रही हैं। यहां पर मां पार्वती के दर्शन से समस्त मनोकामना की सिद्धि होती है।

- 4. कन्याकुमारी का आध्यात्मिक महत्व भी है। कहा जाता है कि, यहीं जीवन का आरंभ और अंत का आध्यात्मिक ज्ञान भगवान सूर्य देते हैं। इसे देखने के लिए यहां पर हर दिन बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं। यहां पर सूर्योदय के वक्त समुद्र से सूर्य का निकलना और सूर्यास्त के वक्त समुद्र में समा जाने वाला दृश्य हर किसी का मन मोह लेता है।
- 5. रिपोर्ट के मुताबिक भारत के इस दक्षिणी छोर का भी महत्व है। यहां पर भारत की पूर्वी और पश्चिमी तट रेखाएं आपस में मिलती हैं। इतना ही नहीं, ये हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के मिलने का भी केंद्र है।

PM मोदी ने विवेकानंद रॉक मेमोरियल को ध्यान लगाने के लिए क्यों चुना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानते आए हैं। युवावस्था में वे स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित आध्यात्मिक और परोपकारी संगठन रामकृष्ण मिशन के सदस्य भी थे।
पिछले साल मिशन की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा था, "स्वामी विवेकानंद के पास भारत के बारे में एक भव्य दृष्टिकोण था और मुझे यकीन है कि वे गर्व से भारत को इस दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए काम करते हुए देख रहे होंगे।"

पीएम मोदी का मेडिटेशन के लिए विवेकानंद रॉक का चुनाव करना, इस साल के लोकसभा चुनाव से भी जुड़ा है और इस लिहाज से अहम है। पीएम मोदी की दक्षिण की एक तिहाई से अधिक पिछले 3 सालों में हुई है, जिनमें सात यात्राएं अकेले 2024 में तमिलनाडु की हैं।
पांच दक्षिणी राज्य केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक, 543 लोकसभा सीटों में से 131 सीटें हैं। अकेले तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की भविष्यवाणी की है। पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि, ''हमने पहले ही माइंड-शेयर में उछाल देखा है, हम इस क्षेत्र में अपने लिए सीट शेयर और वोट शेयर में बड़ी उछाल देखेंगे।"












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