2017 में मायावती के लिए 5 सबसे बड़ी चुनौतियां

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के मद्देनजर सियासत दां अपने कई दांव पेंचों में बदलाव कर रहे हैं। जिस खेमे से अभी तक अलगाव या कमजोरी नजर आ रही थी। अब उन्हें मनाने के लिए राजनीति के पुरोधाओं ने कोशिशें तेज कर दी हैं। कुछ इसी तर्ज पर बसपा सुप्रीमों मायवती ने सपा हो या भाजपा दोनों पर जुबानी हमले करना शुरू कर दिया है।

वर्तमान में देखें तो 2017 विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी बसपा सुप्रीमों मायवती ब्राह्मणों से शंख बजवाने की पूरी तैयारी कर चुकी हैं। दरअसल ये हम नहीं बल्कि लखनऊ में खंभों से लटक रही वो तमाम होर्डिंग बयां कर रही हैं। जिनमें मायावती के साथ खिंचती हुई मुस्कान के साथ बहन जी के तमाम हिमायती ब्राह्मण भाई नजर आ रहे हैं। हालांकि यह प्रयोग कोई पहली बार नहीं है।

पढ़ें- राम मंदिर को लेकर क्या प्लानिंग है विहिप की?

इससे पहले साल 2004 में मायावती ने सिर्फ सात ब्राह्मणों को टिकट दिया था। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के ब्राह्मण प्रत्याशियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई। इनमें छह ब्राह्मण लोकसभा के लिए चुने गए। साल 2009 में अधिक ब्राह्मणों को टिकट देने के पीछे बसपा का साल 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किया गया सर्वधर्म समाज के नारे का किया गया परीक्षण था। जो कि काफी सफल भी रहा।

खैर इन सबके बीच 2017 में मायवती के सामने पांच बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जो स्लाइडर में पढ़ सकते हैं-

पहली चुनौती

पहली चुनौती

बसपा सरकार के दौरान स्मारकों में की गई फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार के कारण चर्चा में रही मायावती यूपी की जनता के दिमाग में किसी उपलब्धि के तौर पर जगह नहीं बना पाईं। हालांकि मायावती ने इस बात का भरोसा भी जताया था कि वह अब अगर मुख्यमंत्री बनती हैं तो पैसा स्मारकों आदि के फिजूल कामों में नहीं प्रयोग नहीं होगा। लेकिन बसपा सुप्रीमों की इस बात पर जनता पूरी तरह से विश्वास नहीं जुटा पा रही है।

दूसरी चुनौती

दूसरी चुनौती

उच्च मध्यमवर्गीय मतदाता सपा, बसपा और भाजपा को लेकर अभी गफलत की स्थिति में फंसा हुआ दिख रहा है। दरअसल मुलायम राज से छुटकारा पाने और माया राज में अधिकारों के मिलने की जनता को कोई गारंटी नहीं नजर आ रही। वहीं लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के द्वारा किए गए विकास के दावों में अभी जनता सच्चाई तलाश करने की कोशिश कर रही है। ये वर्ग परंपरागत तरीके से कांग्रेस और भाजपा को वोट देता रहा है लेकिन इस बार यह किस ओर रूख करेगा ये अभी स्पष्ट नहीं है।

तीसरी चुनौती

तीसरी चुनौती

वहीं अगर अल्पसंख्यक समुदाय की बात की जाए तो पहले की तरह अब मुस्लिम समुदाय सपा से खुश नहीं दिख रहा। लेकिन बसपा के साथ भी अल्पसंख्यकों का खासा जुड़ाव नहीं समझ आ रहा है।

चौथी चुनौती

चौथी चुनौती

जमीनों का अंधाधुंध अधिग्रहण, सत्ता का केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती को लेकर जनता अभी भी बसपा की खिलाफत में आवाज बुलंद कर रही है।

पांचवी चुनौती

पांचवी चुनौती

न तो लोग सपा के राज में हत्या, लूट, सांप्रदायिक घटनाओं एवं रेप के तमाम मामलों को अभी भूल पाए हैं और माया के राज में मनमानी से भी यूपी की जनता का मन खिन्न दिखाई पड़ रहा है। जिस पर अब बसपा सुप्रीमों किस तरह से खुद को बेहतर बताते हुए जनता के सामने रखती हैं, ये देखना काफी दिलचस्प होगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+