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धोनी के वो 5 फैसले जिसने सभी को चौंका दिया, लेकिन भारत की झोली में आई थी जीत

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नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी ने 74 वें स्वतंत्रता दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। धोनी का उदय एक ऐसे युवा कप्तान तौर पर हुआ जो अक्सर अपने फैसलों से चौंका देते थे। उन्हें एक तेज दिमाग वाला क्रिकेटर माना जा था। उनके कैरियर की कई ऐसी कहानियां हैं जो आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देती थीं। क्रिकेट की दुनिया में रिकी पॉन्टिंग, स्टीव वॉ, कपिल देव, इमरान खान जैसे महान कप्तान आए हैं, लेकिन एमएस धोनी इन सभी में बेहद ही खास हैं। धोनी दुनिया के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के सभी खिताब अपने नाम किये हैं। धोनी ने क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे फैसले लिए जिसने सभी चौंका दिया, लेकिन अंत में उन फैसलों ने भारत के लिए जीत की इबारत लिखी। आईए हम आपको ऐसे ही फैसलों से रूबरू करवाते हैं।

2007 का आईसीसी वर्ल्ड टी 20 फाइनल

2007 का आईसीसी वर्ल्ड टी 20 फाइनल

बात 2007 के आईसीसी वर्ल्ड टी 20 फाइनल की है। भारत के सबसे भरोसेमंद बॉलर हरभजन सिंह का एक ओवर बाकी था और मैच भी सिर्फ एक ओवर का बचा था। पाकिस्तान को जीत के लिए 13रन चाहिए थे। पहले वर्ल्ड टी 20 फाइनल में धोनी ने सभी को चौंकाते हुए ओवर जोगिंदर शर्मा को दिया। उस समय क्रीज पर मिस्बाह-उल-हक थे, जो 35 गेंदों पर 37 * रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। धोनी ने जोगिंदर को मौका इसलिए दिया क्योंकि मिस्बाह ने 17 वें ओवर में हरभजन की गेंद पर तीन छक्के लगाए थे। अंतिम में जोगिंदर की पहली गेंद खाली गई लेकिन दूसरी गेंद पर मिस्बाह ने छक्का मार दिया। जिससे भारतीय खेमे में निराशा छा गई। लेकिन अगली गेंद पर मिस्बाह ने शॉर्ट लेग की ओर शॉट मारा जो सीधी श्रीसंत के हाथों में समा गई। जिसके बाद भारत ने इतिहास रच दिया।

    MS Dhoni retirement: Reason behind MS Dhoni's retirement from International cricket | वनइंडिया हिंदी
    2008 ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला

    2008 ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला

    2008 में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला से महेंद्र सिंह धोनी ने सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को ड्रॉप करने का फैसला किया। तब तक भारत के दोनों पूर्व कप्तान अपने शानदार करियर के दौरान 50 ओवर के प्रारूप में लगभग 23,000 रन बना चुके थे। जिसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई। जब इस बारे में पूछा गया तो बीसीसीआई सचिव निरंजन शाह ने कहा था कि टीम में क्षेत्ररक्षण क्षमताओं पर जोर दिया गया है और मुख्य चयनकर्ता और टीम प्रबंधन दौरे के लिए एक युवा क्षेत्ररक्षण चाहते हैं। हालांकि इस श्रृखंला में भारत को हार का सामना करना पड़ा।

    भारत बनाम श्रीलंका, 2011 विश्व कप फाइनल

    भारत बनाम श्रीलंका, 2011 विश्व कप फाइनल

    युवराज सिंह 2011 में बल्ले और गेंद दोनों के साथ जबरदस्त फॉर्म में विश्व कप टूर्नामेंट खेल रहे थे। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में, भारत को कुल 275 रनों का पीछा करना था। श्रीलंका की गेंदबाजी आगे वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर सस्ते में आउट हो गए। विराट कोहली और गौतम गंभीर ने एक साझेदारी की। लेकिन कोहली भी आउट हो गए। उस समय भारत को जीत के लिए 161 रन की जरूरत थी। युवराज सिंह फॉर्म में चल रहे थे लेकिन धोनी ने खुद चार नंबर पर आने का फैसला किया। जिससे सब चौंक गए। लेकिन उन्होंने उस पोजीशन पर शानदार खेल दिखाते हुए 79 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाकर भारत की जीत की दहलीज पर पहुंचाया।

    2012 की सीबी त्रिकोणीय श्रृंखला

    2012 की सीबी त्रिकोणीय श्रृंखला

    भारत में खिलाड़ियों को खेल से ज्यादा पूजा जाता है और यही कारण है कि ड्रेसिंग रूम में कुछ भगवान जैसी शख्सियतों को दूसरों की तुलना में ज्यादा समय मिला। धोनी ने यह सुनिश्चित किया कि वह टीम के अंदर यह बदलाव लाएंगे। क्योंकि 2008 में 'बेहतर क्षेत्ररक्षकों' का चयन करने के बाद उनके टीम के प्रदर्शन में सुधार हुआ था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 2012 की सीबी त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की तिकड़ी को ड्रॉप कर दिया। भारत यह श्रृखला हार गया क्योंकि शीर्ष क्रम रन बनाने में फेल रहा। लेकिन इस और साफ इशारा था कि, भारत के शीर्ष क्रम को मजबूत करने की जरूरत है।

    2013 चैंपियंस ट्रॉफी

    2013 चैंपियंस ट्रॉफी

    वर्ष 2013 धोनी के लिए विशेष था क्योंकि यह तब है जब वह विश्व टी 20, विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने वाले एकमात्र कप्तान बन चुके थे। यह वर्ष उस क्रिकेटर के लिए भी खास था क्योंकि, धोनी ने उसकी किस्मत बदल दी थी। क्रिकेटर का नाम है रोहित शर्मा। धोनी ने रोहित को जबरदस्त तरीके से प्रमोट किया। रोहित 2007 से भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन वह बीच-बीच में ड्रॉप कर दिए जा रहे थे। धोनी ने उन्हें पहली बार दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान 2011 में पारी को खोलने का मौका दिया, लेकिन वह तीन पारियों में सिर्फ 29 रन ही बना सके।

    जनवरी 2013 में, रोहित को धोनी ने इंग्लैंड के खिलाफ मौका दिया गया। रोहित ने मोहाली में 83 रन बनाए और इसके बाद उन्होंने पीछे कभी मुड़कर नहीं देखा। धवन और रोहित ने भारत के शीर्ष क्रम को पुनर्जीवित किया और भारत ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती।

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    English summary
    5 bold decisions of MS Dhoni that shocked everyone
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