3 कारण जिसकी वजह से अमेठी में हार सकते हैं राहुल

राहुल के सामने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुमार विश्वास और भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी पहाड़ बन कर खड़ी हो गई है। इन दोनों ने कांग्रेस के युवराज के लिए आसान जीत की राह मुश्किल कर दी है। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए तो उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े होंगे और उनका राजनीतिक करियर भी खत्म हो सकता है। हलांकि इसके आसार कम ही दिख रहे है, लेकिन राजनीति में कब पासा पलट जाए कहना मुश्किल है। आपको उन तीन वजहों से रुबरु करवाते है जिसके कारण हो सकता है कि रहुल की अमेठी से जीत की श्रृखंला टूट जाए।
इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव को देखें तो राहुल को लगभग 72 फीसदी वट मिले थे। इस बार जब कि चुनौतियां सामने है तो राहुल की नजर अमेठी की 1.5 लाख मुस्लिम वोटरों पर है। भाजपा की छोड़िए अगर ये वोटबैंक राहुल की बजाए आम आदमी पार्टी की ओर मुड़ गए तो राहुल गांधी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।
राहुल गांधी और उनका परिवार अमेठी को अपने परिवार का हिस्सा बताते रहे है। उसे अपनी कर्मभूमि के तौर पर पेश करते रहे है, लेकिन केन्द्र में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद अमेठी की अनदेखी किए जाने से यहां की जनता नाराज है। यहां विकास न होने की वजह से ज्यादातर लोग असंतुष्ट हैं। लोगों का मानना है कि उनको जो मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। ऐसे में अगर लोगों ने अपनी नाराजगी को वोट के जरिए जाहिर कर दिया तो राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती है।
वहीं राहुल के लिए प्रचार में उतरी प्रियंका गांधी भी अमेठी की जनता को कुछ कास खुश नहींकर पाई है। उनकी सभाओं में खाली पड़ी कुर्सियां इस बात की गवाही देती है कि लोग प्रियंका से नाराज है। ऐसे में अगर अमेठी की जनता से अपने वोट की ताकत के जरिए राहुल से नाराजगी दिखा दी तो उनका करियर खत्म होना लाजिमी है, क्योंकि अमेठी में अपनी सीट न बचा पाने पर राहुल का ताक पार्टी से खत्म हो जाएगा।












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