आंध्र प्रदेश के कोरिंगा में 1839 में आया था सबसे भीषण चक्रवात, 3 लाख लोगों की गई थी जान

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पुडुचेरी पर 'निवार' तूफान का खतरा पूरा-पूरा मंडरा रहा है। हालांकि प्रशासन ने तैयारी पूरी कर रखी है। फिर भी लोग इस तूफान को लेकर काफी डरे हुए हैं। आपको बता दें कि निवार इस साल का चौथा चक्रवाती तूफान है। आपको बता दें कि भारत के इतिहास में जब बात सबसे भयंकर तूफान की होती है तो आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव कोरिंगा में आया तूफान अभी तक का सबसे भीषण चक्रवात माना जाता है। कोरिंग गांव आंध्र प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर गोदावरी के किनारे स्थित है।

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    इस तूफान में 3 लाख लोगों की चली गई थी जान

    178 साल पहले 25 नवंबर 1839 को आंध्र प्रदेश के कोरिंगा में आए इस भीषण तूफान में करीब 3 लाख लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। वर्ल्ड वाइड स्तर पर किसी भी तूफान में मरने वाले लोगों का ये आंकड़ा तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

    40 फीट ऊंची लहरें उठी थी तूफान के दौरान

    इस तूफान ने आंध्र प्रदेश को बुरी तरह से उजाड़ कर रख दिया था। खासकर कोरिंगा गांव को इस तूफान से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ था। उस वक्त टेक्नोलॉजी की कमी के कारण हवाओं की गति और समुद्र में उठी लहरों की ऊंचाई तो नहीं मापी जा सकी थी, लेकिन बताया जाता है कि लोगों ने 12 मीटर यानि कि 40 फीट ऊंची लहरों का सामना किया था।

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    25 हजार जहाज भी हो गए थे तहस-नहस

    कोरिंगा उस समय भारत के सबसे व्यस्ततम बंदरगाहों में से एक था। इसलिए इस तूफान की वजह से इस बंदरगाह पर करीब 25 हजार जहाज तहस-नहस हो गए थे। इस तूफान से कोरिंगा एकदम उजड़ गया था और इसका असर आज तक देखने को भी मिलता है। इतने सालों बाद तक आंध्र प्रदेश का ये छोटा सा गांव उस तूफान से नहीं उभर पाया है। हालांकि 1798 में भी कोरिंगा में एक तूफान आया था, जिसमें 20,000 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन उस तूफान से कोरिंगा बहुत अच्छी तरह से रिकवर हो गया था। कोरिंगा आज एक साधारण सा गांव बना हुआ है।

    कोरिंग की तबाही के बाद ही गढ़ा गया था 'चक्रवात' शब्द

    ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी हेनरी पिडिंगटन ने इस भयंकर तूफान पर किए गए अपने अध्ययन के परिणाम एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के सामने पेश किए। इस स्टडी में खास तौर पर कोरिंगा में 1789 और 1840 में आए तूफान का जिक्र था। इसी प्रेजेंटेशन के दौरान हेनरी ने हवाओं के इस तरह की गति को 'चक्रवात' का नाम दिया।

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