पुलवामा हमले के बाद चलती ट्रेन में दो कश्मीरी युवकों की पिटाई, गाली देकर स्टेशन पर उतारा
नई दिल्ली। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद से पूरा देश गुस्से में है। इस नापाक हरकत के वजह से कश्मीरी नागारिकों को भी निशाना बनना पड़ रहा है। कश्मीरी व्यापारी (जो कपड़ा और शॉल बेचते हैं ) अपने किराये के मकानों में दुबके हुए हैं। ताजा मामला हरियाणा के रोहतक में सामने आया है। यहां पैसेंजर ट्रेन में दो कश्मीरी युवकों की पिटाई की गई और गाली गलौज करते हुए उन्हें धक्का देकर स्टेशन पर उतार दिया गया। घटना से दोनों पीड़ित काफी घबराए हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक रोहतक के कमला नगर में किराये पर रहने वाले मुदस्सिर अहमद और जाबिद निवासी कुलगाम जम्मू-कश्मीर ने बताया कि सर्दी के मौसम में कश्मीर के लोग शॉल-लोई आदि सामान बेचने के लिए दिल्ली व हरियाणा आते हैं। सभी शहर में फेरी लगाकर अपना सामान बेचते हैं। मंगलवार को दिल्ली में रहने वाले उनके रिश्ते के भाई ताहिर खान व नदीम निवासी कुलगांवा शाल-लोई की तीन बड़ी गठरी रोहतक में बेचने के लिए नांगलोई रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचे।
पैसेंजर ट्रेन के आने पर दोनों भाई रोहतक आने के लिए पैसेंजर ट्रेन में सवार हो गए। जब ट्रेन में मौजूद यात्रियों को उनके कश्मीरी होने का पता चला तो उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। गाली-गलौज करते हुए जैसे ही ट्रेन रवाना हुई धक्का मारकर ट्रेन से उतार दिया गया। दोनों भाइयों ने सामान की गठरी उतारने का प्रयास किया तो उनको दोबारा से धक्का दे दिया। घायल भाइयों ने फोन पर उन्हें जानकारी देते हुए रोहतक स्टेशन पर ट्रेन के अंदर से गठरी उतारने के लिए कहा। फिर दोनों भाइयों ने नांगलोई के नजदीकी अस्पताल में उपचार करवाया। मुदस्सिर व जाबिद ने बताया कि वह तुरंत रेलवे स्टेशन पर आ गए। उन्होंने आरपीएफ को नांगलोई में हुई घटना की जानकारी देते ट्रेन के अंदर गठरी होने की जानकारी दी। ट्रेन प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई तो उन्होंने ट्रेन के हर कोच के अंदर गठरियों को तलाशा, मगर नहीं मिली।
प्रतिवर्ष 70 से 80 कश्मीरी आते है शॉल बेचने
शहर में हर वर्ष 70 से 80 कश्मीरी गर्म शॉल बेचने के लिए शहर में आते है। इनमें अधिकतर कपड़ा व्यापारी तो ऐसे है जो 12 साल से लगातार यहां पर आ रहे है और स्थानीय लोगों के साथ भी अच्छी जान पहचान हो चुकी है। हर वर्ष यह कपड़ा व्यापारी पटियाला चौक एरिया में छह से सात माह तक मकान किराये पर लेकर रहते है और उसके बाद वापस कश्मीर चले जाते है।












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