भारत में 2.1 मिलियन लोगों को है एचआईवी, विश्व के तीसरे नंबर पर भारत

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑरगनाइजेशन (NACO) ऑफ इंडिया के अनुसार भारत में कुल 2.1 मिलियन लोग इस जानलेवा वायरस से ग्रसित हैं। जिसका मतलब है कि हर 10 एशियन में से चार व्यक्ति एचआईवी का शिकार है।
एचआईवी उत्तरपूर्वी राज्यों की बड़ी समस्या
एचआईवी प्रभावित लोगों में से ज्यादातर ड्रग एडिक्ट, समलैंगिक, बाइसेक्सुअल और सेक्स वर्कर हैं। या नहीं तो मां की वजह से संक्रमित हुए बच्चे। वहीं, भूगौलिक दृष्टि से देखा जाए तो एचआईवी के सबसे ज्यादा केस उत्तरपूर्वी राज्यों पाए जाते हैं, खासकर मणिपुर(0.78 प्रतिशत) में। वहीं, आंध्र प्रदेश(0.76) और कर्नाटक(0.68) में एचआईवी प्रभावित मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है।
केवल 10% का ट्रीटमेंट
NACO ने यहां एचआईवी पीड़ितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अपने सेंटरर्स की संख्या भी बढ़ा दी है। पहले जहां भारत में 54 सेंटर थे जो एंटी रेट्रोवायरल दवाओं की फ्री सुविधा देते थे, आज इन सेंटरर्स की संख्या बढ़ाकर 96 कर दी गई है। पिछले वर्ष भारत में एचआईवी की वजह से 51 प्रतिशत लोग सिर्फ भारत में मरे थे। साथ ही अफसोस की बात है कि भारत में कुल एचआईवी प्रभावित लोगों में से सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों को ही मेडिकल ट्रीटमेंट मिल पाती है। जबकि ऐसे कई केस का तो पता तक नहीं चल पाता। लिहाजा, इस वजह से हेल्थ सेंटरर्स पर दवाब बढ़ा है।
पुरूषों की संख्या ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं से ज्यादा पुरूष एचआईवी से पीड़ित हैं। कुल एचआईवी लोगों में से 61 प्रतिशत लोग पुरूष हैं, जबकि 39 प्रतिशत महिलाएं। वहीं, इन महिलाओं में से 75 प्रतिशत महिलाएं वैसी हैं, जिनके पति ट्रक ड्राइवर या अन्य ऐसे घूमने वाले काम करते हैं। वहीं, प्रभावित लोगों में से बच्चों की संख्या 4.4 प्रतिशत है।
संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक इस घातक बीमारी पर कुछ हद तक काबू पा लिया जाएगा।












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