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1984 anti Sikh riots:"केरोसीन डालकर आग लगा दी, बुझाने के लिए नाले में कूदे तो निकालकर फिर लगा दी"

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नई दिल्‍ली। 'मुझे उसके शब्‍द आज भी याद हैं, वो कह रहा था- डूब मरो तुमसे एक सरदार भी नहीं जलता। इतनी बात कहकर दिल्‍ली पुलिस इंस्‍पेक्‍टर ने दंगाइयों को माचिस दी। ईश्‍वर शराबी नाम के शख्‍स ने मेरे पिता के ऊपर केरोसीन डाला। मैंने उस पुलिसवाले वाले की वर्दी पर लगी नेम प्‍लेट पढ़ी, उसका नाम था- इंस्‍पेक्‍टर कौशिक। उसने किशन खोकर नाम के व्‍यक्ति को माचिस दी और उसने मेरे पिता को आग लगा दी। मेरे पिता आग बुझाने के लिए नाले में कूद गए। दंगाइयों ने उन्‍हें बाहर निकाला और दोबारा आग लगा दी।' 1984 के सिख विरोधी दंगों को याद करते हुए यह दिल दहलाने वाली बात बताई है- निरप्रीत कौर ने। सज्‍जन कुमार को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में घटना के तीन चश्‍मदीद हैं- निरप्रीत कौर, जगदीश कौर और जगशेर सिंह। तीनों ने सज्‍जन कुमार के खिलाफ बरसों तक लड़ाई लड़ी, तब जाकर उन्‍हें इंसाफ मिला सका।

गुरुद्वारा के अध्‍यक्ष थे निर्मल सिंह, समझौते के नाम पर बुलाकर ले गए थे आदमी

गुरुद्वारा के अध्‍यक्ष थे निर्मल सिंह, समझौते के नाम पर बुलाकर ले गए थे आदमी

निरप्रीत कौर के पिता नाम है- निर्मल सिंह। तारीख थी 1 नवंबर 1984, समय सुबह के साढ़े पांच बजे का था और जगह थी- पालम की राजनगर कॉलोनी। इस कॉलोनी में काफी सिख परिवार रहते थे। जब दंगाई सब जगह तांडव मचा रहे थे तो यहां पर सिख अपनी सुरक्षा के लिए डटे थे। निरप्रीत कौर के पिता निर्मल सिंह टैक्‍सी स्‍टैंड चलाते थे और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्‍यक्ष भी थे। निरप्रीत ने बताया कि दो आदमी उनके पिता को समझौता कराने के बहाने से ले गए थे।

बलवान खोकर ने खुद को बताया सज्‍जन कुमार का भतीजा, वही, मेरे पिता को ले गया था

बलवान खोकर ने खुद को बताया सज्‍जन कुमार का भतीजा, वही, मेरे पिता को ले गया था

निरप्रीत कौर की उम्र उस समय 16 साल थी। 34 साल पुरानी उस भयावह घटना को याद करते हुए वह बताती हैं- 'बलवान खोकर और महेंद्र यादव नाम के दो शख्‍स उनके पिता निर्मल सिंह को समझौता कराने का बहाना बनाकर ले गए थे। बलवान खोकर ने खुद को सज्‍जन कुमार का भतीजा बताया था। मेरे पिता स्‍कूटर पर उनके साथ गए थे और इसी दौरान दंगाइयों की भीड़ के बीच वह घिर गए थे। मैंने देखा दंगाइयों ने गुरुद्वारे को आग लगा दी थी। मेरे पिता को भी जिंदा जला दिया गया था।

मेरे पति और बेटे की लाश पड़ी थी और पुलिसवाला पूछ रहा था- कितने मुर्गे भून दिए'

मेरे पति और बेटे की लाश पड़ी थी और पुलिसवाला पूछ रहा था- कितने मुर्गे भून दिए'

पालम की उसी राजनगर में एक और महिला ने अपने पति और बेटे को खोया। दंगाइयों ने उनके पति को भी जिंदा जला दिया था। इनका नाम है- जगदीश कौर। 79 साल की जगदीश कौर ने बताया कि उन्‍होंने उस दंगे में अपने पति, एक बेटे और तीन कजिंस को खोया। उन्‍होंने बताया कि उस दिन सज्‍जन कुमार ने भड़काऊ भाषण दिया। वह कह रहा था, 'सिख सांप के बच्‍चे हैं, इन्‍हें मारा जाना चाहिए, जलाया जाना चाहिए।' जगदीश कौर बताती हैं- 'मेरे पति और बेटे की बॉडी पुलिस पोस्‍ट पर पड़ी थी और एक पुलिसवाला दंगाइयों से पूछ रहा था- कितने मुर्गे भून दिए। उस दिन मेरा इंसानियत से भरोसा उठ गया था।'

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English summary
1984 Anti Sikh riots: Cop gave matchbox, Sajjan called us snakes, recalls petitioner Nirpreet Kaur
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