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20 साल के 15 सबसे संवदेनशील केस जो जूनियर जजों की अदालत ने सुने

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20 साल के 15 संवदेनशील केस जो जूनियर जजों की अदालत ने सुने

नई दिल्ली। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज मीडिया के सामने आए और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका अच्छे लोकतंत्र की निशानी है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भी लिखा। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने शुक्रवार को अपनी पीसी में जो भी बातें रखी, उस पर कानूनी जानकारों ने जो निष्कर्ष निकाला उसमें सबसे अहम यही रहा कि कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले वरिष्ठ जजों की जगह जूनियर जजों की अदालत को सौंपे गए हैं। वरिष्ठ जजों की नाराजगी के पीछे जानकारों ने यही वजह प्रमुख माना है। वहीं टीओआई में छपी रिपोर्ट पर गौर करें तो पिछले 20 साल में 15 बेहद संवेदनशील केस ऐसे रहे जिन्हें जूनियर सुप्रीम कोर्ट के जजों को सौंपा गया। इन केसों में राजीव गांधी हत्याकांड, बोफोर्स कांड, बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला समेत कई दूसरे अहम केस शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 बेंच हैं

सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 बेंच हैं

सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 बेंच हैं जिनको 14 सबसे सीनियर जज हेड करते हैं। चीफ जस्टिस कोर्ट नंबर एक को हेड करते हैं और उनके बाद के नंबर की अदालत को उसी क्रम में सीनियर मोस्ट जज हेड करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों जिस तरह से मीडिया के सामने आए और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके काम नहीं कर रहा, इसके पीछे कानूनी जानकारों का मानना यही है कि संवेदनशील मामलों की सुनवाई सबसे वरिष्ठ जजों की जगह सुप्रीम कोर्ट के जूनियर जजों को सौंपे जाने से वो आहत हैं। इसीलिए चार वरिष्ठ जजों ने अपनी बात सबके सामने रखी है। बोफोर्स घोटाला, राजीव गांधी हत्याकांड, बाबरी मस्जिद विध्वंस केस, सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर केस, बेस्ट बेकरी मामला और बीसीसीआई के संचालन को लेकर चल रहे केस जैसे संवेदनशील मामले में एक बात अहम है कि इन सभी केस को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जूनियर जजों को सौंपा है। जानकारों के मुताबिक इसी को लेकर वरिष्ठ जज नाराज हैं। अंग्रेजी अखबार टीओआई में छपी रिपोर्ट के आधार पर एक नजर उन महत्वपूर्ण मामलों पर जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के जूनियर जजों की बेंच को सौंपा गया है...

राजीव गांधी हत्याकांड और बोफोर्स केस

राजीव गांधी हत्याकांड और बोफोर्स केस

राजीव गांधी हत्याकांड (1998): साल 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी और अन्य को दोषी ठहराए जाने के खिलाफ मामला, कोर्ट नंबर 8 में ये मामला चल रहा है। जस्टिस केटी थॉमस इस केस के हेड जज हैं। ये देश का सबसे उच्च प्रोफाइल मामला था, लेकिन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने इसे तीन जूनियर जजों केटी थॉमस, डीपी वाधवा और एसएसएम कादरी को सौंप दिया। उस समय इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठाया गया।

बोफोर्स केस (1999): बोफोर्स केस में सीबीआई ने 1999 में चार्जशीट फाइल की, इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसमें एनआरआई कारोबारी श्रीचंद और गोपीचंद हिंदुजा को इसमें आरोपी बनाया गया। ट्रायल कोर्ट ने उनकी बेल खारिज कर दी। इसके बाद हिंदुजा बंधुओं ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के अपील की। इस मामले को चीफ जस्टिस ने कोर्ट नंबर 8 को सौंप दिया। जस्टिस एमबी शाह इस केस के हेड जज हैं। हिंदुजा बंधुओं को 15 करोड़ के बॉन्ड पर जमानत मिल गई।

बेस्ट बेकरी केस कोर्ट नंबर 11 को

बेस्ट बेकरी केस कोर्ट नंबर 11 को

बेस्ट बेकरी केस (2004): साल 2004 में जाहिरा हबीबुल्ला शेख ने बेस्ट बेकरी मामले में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की। इस मामला कोर्ट नंबर 11 में गया, जस्टिस अरिजित पसायत इस केस के हेड जज हैं।

एमपी-एमएलए को सजा पर अयोग्य ठहराए जाने का मामला (2005): साल 2005 में लिली थॉमस ने एक याचिका दायर की थी, इसमें दो साल या उससे ज्यादा की सजा पर सांसद-विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की अपील की गई। इस गेमचेंजिंग याचिका को तत्कालीन चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर 9 को सौंपा है। जस्टिस एके पटनायक इस केस के हेड जज हैं।

सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर केस (2007): रुबाबुद्दीन शेख ने अपने भाई सोहराबुद्दीन शेख के फर्जी एंकाउंटर को लेकर 2007 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। राजनीतिक तौर पर बेहद गंभीर इस मामले को कोर्ट नंबर 11 को सौंपा गया। जस्टिस तरुण चटर्जी इस केस के हेड जज हैं।

रामजेठमलानी काला धन मामला- कोर्ट नंबर 9 में

रामजेठमलानी काला धन मामला- कोर्ट नंबर 9 में

रामजेठमलानी काला धन मामला (2009): 2009 में वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट में कालेधन को लेकर एक याचिका दायर की। 2014 में ये याचिका चुनावी मुद्दा भी बना। सीजेआई ने ये मामला कोर्ट नंबर 9 को सौंपा। जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी इस केस के चीफ जस्टिस हैं। जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी और एसएस निज्जर इसे देख रहे हैं।

स्पेक्ट्रम घोटाला केस (2010): प्रशांत भूषण के नेतृत्व वाले एनजीओ ने साल 2010 में स्पेक्ट्रम घोटाला मामले याचिका दायर की। इसमें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया। ये मामला मुख्य न्यायाधीश ने कोर्ट नंबर 11 को सौंपा, जस्टिस जीएस सिंघवी और जस्टिस एके गांगुली इसके जज हैं।

एलजीबीटीक्यू केस (2010): साल 2010 में ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने एलजीबीटीक्यू समुदाय को लेकर ऐतिहासिक निर्णय दिया। इसके खिलाफ सुरेश कुमार कौशल ने याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की। इस केस को कोर्ट नंबर 11 को सौंपा गया। जस्टिस जीएस सिंघवी इस केस के हेड जज हुए।

एलके आडवाणी को बाबरी मामले से बरी किया जाना 2011: कोर्ट नंबर 8

एलके आडवाणी को बाबरी मामले से बरी किया जाना 2011: कोर्ट नंबर 8

लालकृष्ण आडवाणी को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बरी किया जाना (2011): बाबरी विध्वंस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी को बरी कर दिया। इस मामले में सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 2011 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उस समय ये मामला कोर्ट नंबर 8 में गया। जस्टिस वीएस सिरपुरकर और जस्टिस टीएस ठाकुर की बेंच ने इसे सुना। बाद में कोर्ट नंबर 11 में जस्टिस एचएल दत्तु और जस्टिस चंद्रमौली प्रसाद ने इसे सुना। इसके बाद कोर्ट नंबर 9 में जस्टिस एमवाई इकबाल और जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने 2016 में इस पर सुनवाई की। इसके बाद इस मामले को कोर्ट नंबर 6 में जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने सुनवाई की।

आधार की वैधता का मामला (2012): आधार की वैधता का मामला कोर्ट नंबर 5 में है, जस्टिस बीएस चौहान इसके हेड जज हैं।

कोयला घोटाला केस (2012): कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितता के मामले में याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई, जिसे कोर्ट नंबर 7 को सौंपा गया। जस्टिस आरएम लोढ़ा इसके हेड जज हैं। एडवोकेट एमएल शर्मा ने कोयला घोटाले को लेकर याचिका दायर की थी।

आईटी एक्ट की धारा 66 A की वैधता का मामला (2012): आईटी एक्ट की धारा 66 A की वैधता का मामला 2012 सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। ये मामला कोर्ट नंबर 11 को सौंपा गया, जस्टिस एचएल गोखले इसके हेड जज थे। बाद में जस्टिस जे चेलमेश्वर की बेंच को इसे सौंपा गया।

राहुल गांधी केस में किशोर समरीते की अपील का केस 2012: कोर्ट नंबर 8

राहुल गांधी केस में किशोर समरीते की अपील का केस 2012: कोर्ट नंबर 8

राहुल गांधी केस में किशोर समरीते की अपील का केस (2012): राहुल गांधी केस में किशोर समरीते की अपील पर मामला कोर्ट नंबर 8 को सौंपा गया। जस्टिस वीएस सिरपुरकर इसके हेड जज थे, बाद में जस्टिस बीएस चौहान की अदालत में भी इस केस की सुनवाई हुई।

बीसीसीआई केस 2013: बीसीसीआई के ठीक से संचालन को लेकर याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। इस मामले को कोर्ट नंबर 6 को सौंपा गया। जस्टिस एके पटनायक इस केस के हेड जज हैं।

विजय माल्या केस (2016): भगोड़े कारोबारी विजय माल्या से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं। चीफ जस्टिस ने ये मामला कोर्ट नंबर 10 को सौंपा है। जस्टिस के जोसेफ इस केस हेड जज हैं।

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English summary
15 ‘super sensitive’ cases in past 20 years went to junior Supreme Court judges.
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