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53 साल तक इंसाफ मांगता रहा 108 साल का बुजुर्ग, SC में तारीख मिलने से पहले दुनिया छोड़ गया

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नई दिल्ली, 22 जुलाई: महाराष्ट्र के एक दूर-दराज गांव में 53 साल पहले एक व्यक्ति के साथ जमीन खरीदने में धोखाधड़ी हुई थी। 1968 से कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते वह शख्स 55 साल की अधेड़ उम्र से 108 साल का बुजुर्ग हो गया, लेकिन न्याय का उसका इंतजार कभी खत्म नहीं हुआ। बीते 12 जुलाई को ही सुप्रीम कोर्ट ने जब उसकी अपील पर सुनवाई करने की हामी भरी थी, तब अदालत में किसी को पता नहीं था कि यह खुशखबरी सुनने के लिए भी वह शख्स अब जीवित नहीं बचा है। जबकि, 33 साल पहले निचली अदालत ने उसके हक में फैसला सुनाया था, जिसे हाई कोर्ट ने पलट दिया था।

तारीख मिलने से पहले ही 108 साल के बुजुर्ग ने दुनिया छोड़ी

तारीख मिलने से पहले ही 108 साल के बुजुर्ग ने दुनिया छोड़ी

108 साल के सोपन नरसिंगा गायकवाड़ अब अपने 53 साल पुराने मुकदमे की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की पहली तारीख मिलने के लिए धरती पर नहीं हैं। उनका कानूनी वारिस ही अब देश की सर्वोच्च अदालत में उनके लिए न्याय की गुहार लगाएगा। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि बीते 12 जुलाई को जब सुप्रीम कोर्ट गायकवाड़ की अपील को सुनने के लिए राजी हुआ, इस खुशखबरी को सुनने के लिए भी वो खुद दुनिया में मौजूद नहीं थे। उस दिन सुप्रीम कोर्ट ने जमीन विवाद पर उनकी अपील सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था, जिसे वे 1968 से ही विभिन्न अदालतों में लड़ते आए थे। याचिकाकर्ता के वकील विराज कदम ने कहा है, 'दुर्भाग्य से वह व्यक्ति जो केस को ट्रायल कोर्ट से लड़ते-लड़ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, वह यह सुनने के लिए जीवित नहीं बचा कि अदालत ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।'

27 साल तक बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित रहा मामला

27 साल तक बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित रहा मामला

कदम ने कहा है, '12 जुलाई को अदालत में मामला आने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन गांव के इलाके से उनके निधन की सूचना सुनवाई के बाद ही आ पाई। अब उनके कानूनी वारिस इस मुकदमे को आगे बढ़ाएंगे।' देश की न्याय व्यवस्था की स्थिति देखिए कि अक्टूबर, 2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट से उनकी अपील ठुकराए जाने से पहले 27 साल तक उनका केस वहां लंबित पड़ा रहा था। सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने में देरी होने के बारे में उनके वकील ने कोर्ट में उनकी ज्यादा उम्र होने और महाराष्ट्र के दूर-दराज ग्रामीण इलाके में रहना कारण बताया है। क्योंकि, उन्हें हाई कोर्ट के फैसले की जानकारी मिलने में ही पहले सालों लग गए और उसके बाद कोविड-19 महामारी के चलते सबकुछ ठप पड़ गया। वैसे सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने अपील में काफी देरी होने पर नोटिस जारी किया है और दूसरी पार्टियों से भी 8 हफ्ते में जवाब दायर करने को कहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि याचिकार्ता 108 वर्ष के हैं और सबसे बड़ी बात कि हाई कोर्ट ने केस की मेरिट पर ध्यान नहीं दिया और वकीलों के नहीं पहुंचने की वजह से मुकदमे को खारिज कर दिया था।' बेंच ने कहा था कि हो सकता है कि याचिकार्ता के ग्रामीण इलाके से होने की वजह से संबंधित वकील केस खारिज होने के बाद उन तक नहीं पहुंच पाए होंगे।

क्या है पूरा मामला ?

क्या है पूरा मामला ?

सोपन नरसिंगा गायकवाड़ ने 1968 में एक प्लॉट खरीदा था। सेल डीड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पता चला कि जमीन के असली मालिक ने तो उसे पहले से ही बैंक के पास गिरवी रखकर लोन ले रखा है। बाद में जमीन के असली मालिक ने लोन नहीं चुकाया और बैंक ने गायकवाड़ की संपत्ति की कुर्की करने का नोटिस थमा दिया। गायकवाड़ ने यह कहते हुए जमीन के पुराने मालिक और बैंक के खिलाफ निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया कि वह जमीन के कानूनी खरीदार हैं और बैंक को उसके पुराने मालिक की दूसरी प्रॉपर्टी बेचकर अपने लोन की भरपाई करनी चाहिए। ट्रायल कोर्ट ने गायकवाड़ की दलीलों को मान लिया और 10 सितंबर, 1982 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ पहले जमीन के पुराने मालिक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की और 1987 में उसने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया। 1988 में गायकवाड़ ने हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दूसरी अपील दायर की। हाई कोर्ट को उनकी अपील पर फैसला सुनाने में 27 साल लग गए और आखिरकार 23 अक्टूबर, 2015 को उसे खारिज कर दिया।

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कितने मुकदमे अदालतों में लंबित हैं ?

कितने मुकदमे अदालतों में लंबित हैं ?

वजह जो भी रही हो लेकिन इस केस में हाई कोर्ट में मुकदमे का 27 वर्ष में निपटारा होना ही भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रही है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इस वक्त देश की विभिन्न अदालतों में 4 करोड़ से भी ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं-

  • सुप्रीम कोर्ट- 63,146
  • हाई कोर्ट- 56.43 लाख
  • जिला और निचली अदालतें- 3.71 करोड़
  • स्वीकृत पदों के मुकाबले जजों के खाली पद- 38.70% (29 जनवरी, 2021 तक)

(तीसरी तस्वीर-प्रतीकात्मक)

English summary
Sopan Narsinga Gaikwad, a 108-year-old from Maharashtra, who was fighting a land dispute since 1968, left the world before getting the first date in the Supreme Court
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