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महिलाओं के 10 कानूनी अधिकार जो बनाते हैं उन्हें और मजबूत

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लखनऊ। महिलाओं को किसी भी मानव सभ्यता की नींव माना जाता है, उनके बिना किसी भी सभ्य समाज की कल्पना कोरी है। ऐसे में आधुनिक समाज में महिलाओं को सशक्तिकरण और उन्हें और आजादी पाने का पुरुषों की तुलना में अधिक आवश्यकता है। महिलाओं के अधिकारों को लेकर हमेशा से ही अलग चर्चा होती रही है।

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एक तरफ जहां भारत में महिलाओं को देवी माना जाता है और उन्हें पूजा जाता है। लेकिन इन सबसे इतर जो ज्यादा जरूरी है वह है उन्हें उनका अधिकार, सुरक्षा, समाज में दर्जा दिलाया जाए बजाए उनकी पूजा करने के। आज हम आपको महिलाओं के उन अधिकारों से रूबरू करायेंगे जो महिलाओं को समाज में सुरक्षित और बेहतर जीवन जीने की आजादी देते हैं।

जीरो एफआईआर का अधिकार

जीरो एफआईआर का अधिकार

रेप पीड़िता महिला किसी भी पुलिस स्टेशन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कोई भी पुलिस स्टेशन रेप पीड़िता को यह कहकर वापस नहीं कर सकता है कि यह मामला उसकी सीमा के बाहर का है।

पुलिस स्टेशन पर नहीं बुलाये जाने का अधिकार

पुलिस स्टेशन पर नहीं बुलाये जाने का अधिकार

सीआरपीसी की धारा 160 के तहत महिलाओं को पुलिस स्टेशन पर पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जा सकता है। पुलिस महिला कॉस्टेबल या महिला के परिवार के सदस्य या उसकी महिला मित्र की उपस्थिति में महिला के घर पर ही उससे पूछताछ कर सकती है।

किसी भी समय शिकायत का अधिकार

किसी भी समय शिकायत का अधिकार

महिलायें समाज में परिवार की इज्जत, रिश्तेदारों से मिलने वाली धमकी सहित तमाम वजहों से पुलिस से मामले की शिकायत सही समय पर नहीं करती हैं। लेकिन अगर महिलाये किसी भी समय चाहे तो इन मामलों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं और पुलिस उन्हें यह कहकर लौटा नहीं सकती है कि शिकायत काफी देर से की जा रही है।

फ्री में कानून सलाह

फ्री में कानून सलाह

पुलिस स्टेशन पर शिकायत करने गयी महिला को फ्री में कानूनी सलाह प्राप्त करने का अधिकार है।

गोपनीयता का अधिकार

गोपनीयता का अधिकार

बलात्कार पीड़िता महिला को यह अधिकार है कि वह गोपनीय तरीके से अपना बयान दर्ज कराये। उसे अधिकार है कि बिना किसी और की उपस्थिति में मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करा सकती है। वह चाहे तो महिला पुलिसकर्मी या अन्य पुलिस अधिकारी को अकेले में अपना बयान दे सकती है। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत महिला को अधिकार है।

इंटरनेट के माध्यम से शिकायत का अधिकार

इंटरनेट के माध्यम से शिकायत का अधिकार

अगर किसी वजह से महिलायें पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने नहीं जा सकती हैं तो वह ई मेल या रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। महिलायें डीसीपी स्तर या किसी भी अधिकारी को शिकायत भेज सकती हैं, जिसके बाद अधिकारी संबंधित पुलिस स्टेशन पर मामला भेज देते हैं। साथ ही इस बात का निर्देश देते हैं कि मामले में उचित कार्यवाही की जाए।

नो अरेस्ट का अधिकार

नो अरेस्ट का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार महिलाओं को सूरज ढलने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। यही नहीं महिला कॉस्टेबल की उपस्थिति में भी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। बड़े अपराध की स्थिति में भी पुलिस को मजिस्ट्रेट की अनुमति का पत्र लाना आवश्यक है।

पहचान की गोपनीयता का अधिकार

पहचान की गोपनीयता का अधिकार

किसी भी स्थिति में महिला की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। किसी भी सूरत में ना तो पुलिस और ना ही मीडिया महिला की पहचान को सार्वजनिक कर सकती है। आईपीसी की धारा 228-ए के तहत महिलाओं को यह अधिकार देता है। ऐसा करना कानूनी अपराध है।

मेडिकल के क्षेत्र में अधिकार

मेडिकल के क्षेत्र में अधिकार

महिला के साथ रेप हुआ है या नहीं वह मेडिकल टेस्ट से ही साबित होता है। कानून के अनुसार धारा 162-ए के तहत महिला का मेडिकल टेस्ट कराया जाना आवश्यक है। महिला को मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी पाने का अधिकार है। रेप एक अपराध है नाकि कोई मेडिकल टर्म, ऐसे में डॉक्टर को सिर्फ यह बयान देने का अधिकार है कि महिला के साथ संबंध स्थापित किया गया है अथवा नहीं। ऐसे में डॉक्टर के पास यह अधिकार नहीं होता है कि वह इस बात का फैसला करे कि रेप हुआ है या नहीं।

शारीरिक शोषण से मुक्ति का अधिकार

शारीरिक शोषण से मुक्ति का अधिकार

किसी भी कंपनी या संस्था में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को पाने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी सरकारी या गैरसरकारी संस्थाओं में एक कमेटी होनी चाहिए जिसका जिम्मा एक महिला के हाथ में होना चाहिए जो इन मामलों की सुनावाई करे। कमेटी में 50 फीसदी महिलाओं का होना भी आवश्यक है।

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English summary
10 legal rights of women which give them protection against crime. Women have right in all condition to demand it at relevant time.
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