भारत में Internet Ban: 2021 के पहले 40 दिन में 10 बार किया जा चुका बंद, दुनियाभर में चर्चा

Internet Cuts In India: नई दिल्ली। पिछले दिनों अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN की एक रिपोर्ट अचानक तब चर्चा में आ गई जब उसे रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसी नामी हस्तियों ने ट्वीट किया था। सीएनएन की इस रिपोर्ट में किसान आंदोलन के दौरान इंटरनेट सेवा बंद किए जाने का जिक्र किया गया था। विदेशी हस्तियों के ट्वीट को लेकर भारत में खूब हंगामा मचा। इसे भारत के घरेलू मामले में विदेशी दुष्प्रचार कहा गया। लेकिन इस बीच जो खबर का मूल मुद्दा था यानि इंटरनेट शट डाउन का, वह दबा ही रह गया। शनिवार को सरकार ने एक बार फिर सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर से सटे इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया था।

Farmers Protest

40 दिन में 10 बार बंद हो चुका इंटरनेट
2021 को शुरू हुए अभी 40 दिन भी नहीं बीते हैं लेकिन केंद्र और राज्य की सरकारें कुल मिलाकर 10 बार इंटरनेट बंद कर चुकी हैं।

सिंघु, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर, जहां हजारों किसान दो महीने से ज्यादा समय से कृषि कानूनों के खिलाफ जमे हुए हैं, पिछले 26 जनवरी के बाद से ही इंटरनेट चालू नहीं हो पाया है। गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड में हिंसा के बाद सरकार ने यहां पर इंटरनेट बंद कर दिया था।

पिछले महीने ही इंटरनेट, एसएमएस और अन्य सेवाओं को दिल्ली और हरियाणा में कम से कम दो बार 24 घंटे से अधिक के लिए निलंबित किया जा चुका है।

कश्मीर में सबसे लंबा शटडाउन
अगर किसी चुनी हुई सरकार द्वारा हाईस्पीट इंटरनेट की सबसे लंबी बंदी की बात करें तो ये जम्मू कश्मीर में किया गया था जहां 552 दिनों के निलंबन के बाद बीते शुक्रवार को पूरी तरह से इंटरनेट को चालू किया गया है। जम्मू-कश्मीर में 4 जी सेवाएं चालू तो कर दी गई हैं लेकिन इसे सशर्त मंजूरी मिली है। इसे अधिकारियों द्वारा सत्यापन के अधीन रखा गया है। जम्मू कश्मीर के बाद सबसे अधिक इंटरनेट शटडाउन भारत के जिस राज्य में हुआ है वह राजस्थान है।

पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेट शटडाउन करने के मामले में भारत काफी आगे है। विभिन्न स्वतंत्र विश्लेषकों से मिले डेटा के अनुसार केवल 2019 और 2020 में ही भारत में इंटरनेट और दूसरी सेवाएं 164 स्थानों पर करीब 13,000 से अधिक घंटे तक बंद की गई थीं।

इंटरनेट शटडाउन का असर
भारत सरकार ने 2019 में 4,196 घंटे तक इंटरनेट बंद रखा था जिसके 1.3 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था जबकि 2020 में ये शटडाउन बढ़कर 8,927 घंटे को हो गया जिससे 2.5 अरब डॉलर की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा। 2020 में 83 बार इंटरनेट सेवायें निलंबित की गईं जबकि 2019 में इसे 106 बार बंद करना पड़ा था। 6 बार इसे 24 घंटे से ज्यादा बंद किया गया था वहीं 4 बार ऐसा हुआ जब इंटरनेट शटडाउन को 72 घंटे से ज्यादा समय के लिए जारी रखा गया।

2012 से 2020 के बाद इंटरनेट सेवाओं को 437 बार निलंबित किया गया था। लेकिन इसमें तेजी 2016 के बाद आई थी। 2018 में पूरे भारत में 134 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया।

इंटरनेट की बंदिशों का सबसे ज्यादा प्रभाव जम्मू-कश्मीर को झेलना पड़ा है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के पहले जम्मू-कश्मीर में 2012 के बाद से 251 बार 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए इंटरनेट को बंद किया गया था। 2020 में कश्मीर में 69 बार, 2029 में 55 और 2018 में 65 बार पूरी तरह बंद किया गया था।

क्या है इंटरनेट बंद करने का नियम ?
इंटरनेट, वॉयस कॉल के साथ ही अन्य ब्रॉडबैंड सेवाओं को सार्वजनिक सुरक्षा और सुरक्षा के लिए खतरे का हवाला देते हुए निलंबित किया जा सकता है। इसके दूरसंचार विभाग द्वारा या संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के आदेश की जरूरत होती है।

24 घंटे से अधिक समय के लिए इंटरनेट शटडाउन के लिए केंद्र या राज्य सरकार के गृह सचिव के द्वारा भारतीय टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत आदेश जारी किया जाता है। इस आदेश में इंटरनेट शटडाउन के लिए विस्तार से वजह बतानी होती है और इस अगले दिन समीक्षा के लिए रिव्यू कमेटी के पास भेजा जाता है।

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