कुदरत का करिश्मा: भारत के इस समुद्री तट पर एक साथ नजर आए 1.48 करोड़ कछुए, VIDEO हुआ वायरल
भुवनेश्वर, 11 मई: पिछले साल फरवरी में कोरोना महामारी ने देश में दस्तक दी, जिसके बाद मार्च में सरकार को लॉकडाउन का ऐलान करना पड़ा। इस वजह से प्रकृति के अनोखे रंग देखने को मिले, जहां ओडिशा के तट पर लाखों कछुओं का समूह दिखाई दिया। इस बार भी ऐसा ही नजारा ओडिशा में दिखा है, जहां करोड़ों की संख्या में ओलिव रिडले कछुए नजर आ रहे हैं। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। (वीडियो-नीचे)

2.98 लाख घोंसले बने
दरअसल हर साल अंडों से निकलने के बाद ओलिव रिडले कछुए केंद्रपाड़ा स्थित बीच पर आते हैं। आमतौर पर इनका जन्म मादा कछुओं की गैरमौजूदगी में होता है। मामले में ओडिशा के एक अधिकारी ने बताया कि गहिरमाथा द्वीप पर इंसानों की आवाजाही प्रतिबंधित है। यहां पर ही ओलिव रिडले कछुए जन्म लेते हैं। उनके आंकलन के मुताबिक नसी-आईआई द्वीप पर मादा कछुओं ने 2.98 लाख घोंसले बनाए थे।

1.48 करोड़ नए कछुए
वहीं 25 अप्रैल से अंडों से कछुओं के बच्चों के निकलने की प्रक्रिया जारी है। पिछले गुरुवार तक की गणना के मुताबिक 1.48 करोड़ बच्चे जन्म ले चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक घोंसले से निकलने के बाद बच्चे समुद्र तट पर आते हैं, यहां पर काफी देर घूमने के बाद वो समुद्र में अपनी यात्रा शुरू करते हैं। जरूरी नहीं है कि 1.48 करोड़ बच्चे बच जाएं, कुछ समुद्री जानवारों की वजह से, तो कुछ प्राकृतिक रूप से मर जाते हैं।

कड़ी है सुरक्षा
आपको बता दें कि गहिरामाथा समुद्र तट बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा घोंसला बनाने वाला मैदान माना जाता है। यहां पर हर साल 3.50 लाख के करीब मादा आती हैं। इसमें से प्रत्येक 100 से 120 अंडे देती हैं। फिर 45-50 दिनों बाद अंडे से कछुए निकलते हैं। यहां पर मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित हैं, जिस वजह से ज्यादातर घोंसले बचे रह जाते हैं। इसको लेकर आईएफएस सुशांत नंदा ने दो वीडियो शेयर किए हैं, जिसमें एक में कछुए समुद्र तट के किनारे घूम रहे हैं, जबकि दूसरे में वो आराम से पानी में तैर रहे। वहीं उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग के कर्मचारी मौके पर तैनात हैं।

गोवा के कई इलाके आरक्षित
आपको बता दें कि उत्तरी गोवा के मोरजिम, मंदारम और दक्षिण गोवा के अगोंडा, गलजिबाग में कई इलाकों को ओलिव रिडली प्रजाति के कछुओं के लिए आरक्षित कर रखा है। इन इलाकों में कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकी कछुओं के बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचे।












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