ट्रांसजेंडरों का जीवन आसान बनाने से झिझक रहे हैं कई देश

इंटरनेशनल लेस्बियन एंड गे एसोसिएशन (आईएलजीए) के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 24 सदस्य देशों ने कानूनी तौर पर लोगों को आत्म-पहचान के आधार पर अपना लिंग बदलने की अनुमति दी है.
जबकि लगभग 40 अन्य देशों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में वर्षों लग सकते हैं और इसमें मनोरोग निदान, हार्मोन उपचार, लिंग पुष्टिकरण सर्जरी या यहां तक कि नसबंदी जैसी आवश्यकताएं भी शामिल हो सकती हैं.
अर्जेंटीना ने 2012 से एक साधारण घोषणा के साथ राष्ट्रीय पहचान पत्र पर लिंग परिवर्तन की अनुमति देकर ट्रांसजेंडर अधिकारों पर मार्ग प्रशस्त किया है. इसके बाद कई लैटिन अमेरिकी देशों ने भी इसका अनुसरण किया है.
यूरोपीय देशों की स्थिति
2014 में डेनमार्क पहला यूरोपीय देश था जिसने वयस्कों को बिना चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के लिंग परिवर्तन के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, बेल्जियम, आयरलैंड, माल्टा, नॉर्वे, पुर्तगाल और हाल ही में स्पेन ने भी इसी तरह की सुविधा दी है.
2017 से फ्रांस ने ट्रांसजेंडर लोगों को उपचार, सर्जरी या नसबंदी के बिना अपने आईडी दस्तावेजों पर अपनी स्थिति बदलने की अनुमति दी है, लेकिन उन्हें इसके लिए अदालत की मंजूरी लेनी होगी.
ट्रांसजेंडर अधिकारों के मुद्दे ने 2022 में स्कॉटलैंड में एक भयंकर विवाद को जन्म दिया, जहां संसद ने एक विधेयक पारित किया जिससे लोगों के लिए अपने लिंग की पहचान करना आसान हो गया. विधेयक को लंदन ने वीटो कर दिया था.
अगस्त 2023 में जर्मन कैबिनेट ने उन योजनाओं पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत जर्मन नागरिक अपने स्थानीय रजिस्ट्री कार्यालय में एक साधारण आवेदन करके अपना नाम या कानूनी लिंग बदल सकते हैं. इस कानून को अभी भी संसद से मंजूरी मिलना बाकी है.
इस मामले में स्वीडन दुनिया के सबसे उदार देशों में से एक है, जो 1972 में वयस्कों के लिए शारीरिक और कानूनी लिंग परिवर्तन को अधिकृत करने वाला दुनिया का पहला देश था.
लेकिन पिछले साल स्वीडन ने सावधानी की आवश्यकता का हवाला देते हुए लिंग डिस्फोरिया से पीड़ित बच्चों, जैसे कि यौवन अवरोधक के लिए उपलब्ध हार्मोन थेरेपी को प्रतिबंधित करना शुरू कर दिया.
कुछ देशों में पहचान पाना मुश्किल
रूस ने जुलाई 2023 में "किसी व्यक्ति के लिंग को बदलने के उद्देश्य से चिकित्सा हस्तक्षेप" और "ऑपरेशन के बिना लिंग परिवर्तन के राज्य पंजीकरण" पर प्रतिबंध लगाने वाला नया कानून अपनाया. राष्ट्रपति पुतिन अपने भाषणों में लगातार ट्रांसजेंडर अधिकारों के खिलाफ आवाज उठाई है.
पाकिस्तान की धार्मिक न्यायपालिका ने इसी साल मई में फैसला सुनाया कि 2018 से ऐतिहासिक ट्रांसजेंडर कानूनी सुरक्षा गैर-इस्लामिक है और इसलिए अमान्य है. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में एक अपील याचिका दायर की गई है.
पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय लंबे समय से अपने अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. 2012 में देश के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर लोगों को "तीसरे जेंडर" के रूप में कानूनी मान्यता दी थी. उसके बाद 2018 में देश में ऐतिहासिक कानून के तहत उन्हें मतदान का अधिकार, रोजगार में बराबर अवसर का अधिकार और राष्ट्रीय पहचान पत्र पर अपना लिंग इंगित कराने का अधिकार मिला.
भारत में लंबे समय से समलैंगिक शादी को मान्यता देने की मांग कर रहा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने समलैंगिक जोड़ों के शादी करने के अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया और कहा कि इस पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जरूर कहा था कि समलैंगिक जोड़े संयुक्त रूप से बच्चा गोद ले सकते हैं.
एए/सीके (एएफपी)
Source: DW
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