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हिसार में लाखों प्रदर्शनकारी जुटे तो झुकी सरकार, मुकदमे वापस होंगे, जान गंवाने वाले किसान के परिजन को नौकरी

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हिसार। हरियाणा के हिसार में कई दिनों से जुट रहे किसान संगठनों के प्रदर्शनकारी आखिरकार अब वापस लौटने लगे हैं। सोमवार को हिसार जिले के क्रान्ति पार्क में दूर-दूर के प्रदर्शनकारियों का हुजूम उमड़ा। सड़कों पर डेढ़ लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी थे। भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों को जुटते देख पुलिस-प्रशासन उनकी मांग मानने के लिए तैयार हुए। दोनों पक्षों में बातचीत हुई और उसके बाद जब किसान संगठनों के अगुआ बाहर आए तो बोले- "हम जीत गए हैं..।"

hisar farmers protest successful

प्रदर्शनकारियों का हिसार घेराव सफल, प्रशासन झुका
किसान संगठनों से जुड़े बुजुर्ग जयपाल सिंह कुंडू ने अपने घर फ़ोन कर बताया, "जीत किसानों की होगी। सरकार ने माफी मांग ली है। अब ना किसानों पर कोई केस रहेगा, न जेल होगी। और जो आज किसान की जान गई है, उसके परिवार में एक नौकरी मिलेगी।"
हजारों की भीड़ में जैसे ही ये शोर गूंजा कि, "हिसार में 300 से ज्यादा किसान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे", त्यों ही किसानों ने खुशी से नारेबाजी करनी शुरू कर दी। हिसार जिले की सड़कों पर तिरंगा लिए लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली, कार, बाइक एवं अन्य वाहनों पर जश्न मनाते दिखे।

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राकेश टिकैत समेत कई नेताओं ने चेताया था
हिसार में जुटने की किसान संगठनों ने बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं। इनकी तैयारियों के आगे पुलिस-प्रशासन के इंतजाम ध्वस्त हो गए। लिहाजा ​सोमवार के दिन हिसारभर में प्रदर्शनकारी ही प्रदर्शनकारी नजर आए। राकेश टिकैत ने साफ कहा कि, ''किसान झुकेंगे नहीं। टिकैत ने कहा कि, ​किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हों और सरकार हमारी बात माने। काले कानूनों को भी वापस ले। अब दिल्ली आंदोलन का केंद्र होगी।'

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"किसान आंदोलन शाहीन बाग का धरना नहीं"
टिकैत ने इससे पहले किसानों से दिल्ली में जुटने का आवाह्न किया था। टिकैत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि, किसान आंदोलन शाहीन बाग वाला धरना नहीं है, जिसे सरकार जब चाहे उखाड़ फेंके, दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों के जत्थे नए कृषि कानून वापस होने के बाद ही हटेंगे।

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जीत का जश्न मना, और फिर लौटने लगे लोग
आज रामचरण नामक एक किसान ने बताया कि, सोमवार को जब हजारों किसान हिसार में जुटे थे तो गांव उगालन के रामचंद्र खर्ब की जान चली गई। बताया जा रहा है कि उन्हें हार्ट अटैक पड़ा.. हालांकि जांच के बाद ही उनकी मौत की वजह स्पष्ट होगी। अब प्रशासन ने उसके परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी का वादा किया है।

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80 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को बंदी बनाया था
राहुल गाहल्याण और अंटिल मंगा नाम के युवक बोले, "16 मई के दिन सैकड़ों किसान सीएम खट्टर के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए जुटे थे। तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसूगैस के गोले दागे। बहुत से प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे। वहीं, 80 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पथराव के मामले में पुलिस ने पकड़ लिया था। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे ठोके जाने लगे। हिसार का यह बड़ा प्रदर्शन उन्हीं किसान भाइयों के लिए था। हमारी जीत हुई है। प्रशासन से माफी मंगवाने के बाद अब प्रदर्शनकारी क्रान्ति पार्क से लौट रहे हैं।"

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"किसानों पर पुलिस ने की थी पत्थरबाजी"
हरियाणा के एक पत्रकार मनदीप पूनिया ने दावा किया कि, 16 मई को पुलिस की किसानों से हिंसक झड़प हुई थी। वहां पुलिस के जवान किसानों को पत्थर मार रहे थे। मनदीप ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें पुलिसकर्मी पत्थर फेंकते नजर आ रहे हैं। मनदीप ने कहा कि, पुलिस-प्रशासन के कारनामों के मेरे पास सुबूत हैं। किसानों पर लाठियां बरसाईं गईं और पत्थर भी मारे गए।

hisar farmers protest successful: thousands farmers gather in hisar kranti park, finally admin agree with them, now protesters return to home

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बुजुर्गों ने कहा- अब कृषि कानून वापस हों
हाथों में किसान संगठनों का झंडा पकड़े तीन बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, "अभी हमें पता चला है कि हमारे नेता प्रशासनिक अधिकारियों से बात करके बाहर आए हैं। प्रशासन हमारे किसान भाइयों पर दर्ज किए गए केस वापस लेने के लिए तैयार हो गया है। अब हम काले कानूनों की वापसी चाहते हैं। इनसे ​अन्नदाता को नुकसान होगा।"

English summary
hisar farmers protest successful: thousands farmers gather in hisar kranti park, finally admin agree with them, now protesters return to home
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