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    सन्न कर देगा स्कूल में बच्चियों की आबरू से खेलने का ये आंकड़ा, शिक्षक ही हैं खलनायक!

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    शिमला। हिमाचल के स्कूलों में भी अब बेटी सुरक्षित नहीं। हालांकि मां बाप अपनी बेटी को भरोसे के साथ रोजाना स्कूल भेजते हैं कि उनकी बेटी स्कूल में सुरक्षित रहेगी लेकिन इस भरोसे को तोड़ने वाले कोई और नहीं बल्कि स्कूलों में तैनात शिक्षक हैं। यह सब प्राईवेट नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में भी हो रहा है। आलम यह है कि प्रदेश के स्कूलों में बेटियों के साथ रेप व छेड़छाड़ के मामले निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। बेटी कभी लोक लाज तो कभी परिवार की बदनामी के डर से यह सहने को मजबूर हैं। वहीं दबंग शिक्षकों के खिलाफ कहीं मामला उठता भी है, तो वह कानूनी पेचीदगी व राजनैतिक असर के रसूख में दब कर रह जाता है।

    shimla here are the data of school girls who got molested by school teachers

    प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ से लेकर यौन शोषण तक की ऐसी सैकड़ों घटनाएं हैं, जो दबा दी गई हैं। इस बात की तस्दीक खुद हिमाचल प्रदेश का शिक्षा विभाग कर रहा है। इससे एक बात तो तय है कि सरकारी स्कूलों में मासूम छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे ही करीब 300 मामले दबा दिए गए हैं। हैरानी इस बात की भी है कि 8 मामले ऐसे हैं, जिन पर चार्जशीट भी तैयार की गई थी। लेकिन वो भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। पांच मामले प्राइमरी स्कूल और तीन मामले हाई स्कूल से जुड़े हैं।

    दरअसल, यह सब उस समय सामने आया जब शिमला में एक शिक्षक कुछ समय से छात्राओं के साथ यौन उत्पीडन तथा अन्य विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार की गतिविधियों में लिप्त पाया गया तो पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 9 एफ के तहत एफआईआर दर्ज की। उसके बाद आरोपी शिक्षक को सरकार ने बर्खास्त कर दिया। मामला जब शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्धाज के नोटिस में आया तो उन्होंने पिछले अरसे के दौरान शिक्षकों के कारनामों का पूरा ब्यौरा निदेशालय से मांगा। शिक्षा मंत्री ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और उच्चतर शिक्षा निदेशक को सभी मामलों की फिर से समीक्षा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि जिन मामलों को दबाने में शिक्षकों या अधिकारियों की मिलीभगत पाई जाएगी, उन पर भी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    शिक्षा मंत्री का आरोप है कि पूर्व सरकार के समय में सामने आए मामलों में हल्की-फुल्की कार्रवाई कर मामले को दबा दिया। शिक्षा मंत्री कह तो रहे हैं कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और शिक्षा विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। लेकिन उस मानसिकता में कब बदलाव आएगा जो बच्चियों को नोंचने के लिए नजर गड़ाई बैठी है।

    बता दें कि 26 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश की राजधानी में एक सरकारी स्कूल में पचास साल के पीटीआई ने मासूमों से छेड़छाड़ की थी। आरोपी के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। फिलहाल आरोपी जेल में है। उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। ऐसा नहीं कि आरोपी पर पहली बार आरोप लगे थे। इससे पहले भी उसने बच्चियों से छेड़छाड़ की थी, लेकिन मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। वहीं, ऊना में एक स्कूल में छात्रों ने शिक्षक पर छेड़छाड़ के आरोप जड़े थे। अब एक ओर मामला सिरमौर जिला के रेणूका का सामने आया है, जहां शिक्षक ने प्रार्थना सभा के दौरान ही छात्रा के साथ रेप करने की कोशिश की।

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    English summary
    shimla here is the data of school girls who got molested by school teachers
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