फंदे से झूलता मिला था इस खूबसूरत नर्स का शव, अब रहस्य बनकर रह गई है ज्योति ठाकुर की मौत

Posted By: Prashant
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शिमला। कोटखाई गैंगरेप मर्डर व हवालात में एक आरोपी की हत्या के केस के बाद लोगों में हिमाचल पुलिस पुलिस के प्रति अविशवास की जो भावना पनपी है। वह विशवास लोगों में अभी भी लौट नहीं रहा है। अब बिलासपुर जिला अस्पताल में तैनात एक युवा चिकित्सक की रहस्यमयी मौत के मामले में भी एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल पिछले सितंबर माह में बिलासपुर के रीजनल हास्पिटल तैनात में युवा फिजियोथैरेपिस्ट ज्योति ठाकुर की मौत का मामला प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंच गया है। इस मामले में भी तीस वर्षीय ज्योति ठाकुर की रहस्यमयी मौत के बाद पुलिस ने लोगों के विरोध के चलते एसआईटी का गठन किया। हालांकि पुलिस पहले इसे आत्महत्या का मामला ही करार दे रही थी। ज्योति के साथ ऐसा क्या हुआ कि उसे आत्महत्या करनी पड़ी या उसकी हत्या कर दी गई। यह सवाल अब भी अनसुलझा है।

फिजियोथेरेपिस्ट थी ज्योति ठाकुर

फिजियोथेरेपिस्ट थी ज्योति ठाकुर

फिजियोथैरेपिस्ट ज्योति ठाकुर का शव गत 6 सितम्बर को उसके रौड़ा सैक्टर स्थित निजी आवास में फंदे पर झूलता हुआ मिला था। लेकिन परिजनों का मानना है कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती। व पुलिस असली कातिलों को बचाने के लिये ही हत्या के केस को आत्महत्या करार दे रही है। पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट मृतका के पिता ने इस बारे में हिमाचल हाईकोर्ट को पत्र लिखकर न्याय की मांग की थी जिस पर माननीय न्यायालय ने प्रधान सचिव, डी.जी.पी., एस.पी. बिलासपुर व थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया है।

क्या कहना है एसपी बिलासपुर का

क्या कहना है एसपी बिलासपुर का

एस पी बिलासपुर अंजुम आरा ने बताया कि मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। मृतका के परिजनों द्वारा सी.बी.आई. जांच की मांग की गई थी जिस पर उन्होंने डी.सी. बिलासपुर को मामला आगे प्रेषित करने के लिए भेज दिया था। हालांकि पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मानकर चल रही थी जबकि मृतका के परिजनों ने इसे हत्या का मामला बताकर पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप भी लगाया था।

यह है मामला

यह है मामला

6 सितम्बर को बिलासपुर अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट ज्योति ठाकुर का शव उसके रौड़ा सैक्टर स्थित निजी आवास में फंदे पर झूलता हुआ मिला था लेकिन उसके परिजनों ने इस पर हत्या का अंदेशा जताकर पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया था। कार्रवाई से असंतुष्ट होकर ज्योति के भाई आशीष ठाकुर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उसका कहना था कि उसकी बहन का फोटो पुलिस के उसके आवास पर पहुंचने से पहले ही वायरल हो गया था। उसने यह भी आरोप लगाया था कि ज्योति का पोस्टमार्टम 6 सितम्बर की रात को ही कर दिया गया था जबकि नियमानुसार रात को पोस्टमार्टम नहीं होता है। वहीं मामले को लेकर 12 सितम्बर को मृतका के परिजनों ने डी.सी. कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया था तथा इस प्रदर्शन में हमीरपुर की पूर्व विधायक उर्मिल ठाकुर ने भी हिस्सा लिया था। उस दौरान बिलासपुर के विधायक बंबर ठाकुर ने भी ज्योति की मौत को हत्या करार देते हुये बिलासपुर के अस्पताल में ही तैनात एक डाक्टर को इसके पीछे बताया था। उन्होंने तो आशंका जताई थी कि ज्योति से पहले रेप हुआ व बाद में उसकी हत्या कर उसके शव को पंखे के साथ लटका दिया गया। लेकिन पुलिस ने इस पहलू की जांच ही नहीं की। व सीधे इसे आत्महत्या करार दे दिया था।

3 सदस्यीय एस.आई.टी. का हुआ था गठन

3 सदस्यीय एस.आई.टी. का हुआ था गठन

मामले के ज्यादा तूल पकडऩे पर पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए डी.एस.पी. घुमारवीं राजेश कुमार की अगुवाई में एक तीन सदस्यीय एस.आई.टी. का गठन 28 सितम्बर को किया था। मृतका के परिजनों ने एस.आई.टी. की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए उन पर इस मामले को वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया था। वहीं मामले के डेढ़ माह बाद भी न सुलझने से गुस्साए परिजनों ने बिलासपुर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर बिलासपुर में लक्ष्मीनारायण मंदिर से लेकर डी.सी. कार्यालय तक 23 अक्तूबर को कैंडल मार्च भी निकाला था तथा एस.आई.टी. की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए इस मामले की जांच सी.बी.आई. से करवाने की मांग एस.पी. बिलासपुर अंजुम आरा से की थी।

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English summary
shimla court action on nurse jyoti thakur death
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