कोटखाई गैंगरेप-मर्डर केस : कुछ अहम सवाल, लोग चिल्लाकर मांग रहे जवाब

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले पर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गुस्से, गम व मातम के इस महौल में हर कोई सरकार के खिलाफ लामबंद हो गया है। यह सब यूं ही नहीं हो रहा। दरअसल वारदात के इतने दिन बीत जाने के बाद भी हर किसी को परिणाम शून्य ही दिख रहा है व लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। यही वजह है कि अंदोलन लगातार जोर पकड़ता जा रहा है।

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कांग्रेस को हो रहा खिसकती जमीन का आभास

कांग्रेस को हो रहा खिसकती जमीन का आभास

लोगों के दबाव व अपनी खिसकती जमीन का आभास होते ही स्थानीय विधायक रोहित ठाकुर भी गुम्मा में विरोध प्रर्दशन के दौरान पीड़ित परिवार के साथ खड़े नजर आये। हलांकि इससे पहले उन्होंने दूरी ही बनाये रखी थी। लोागों में सत्तारूढ़ दल के प्रति खासा गुस्सा है। कांग्रेस पार्टी की चल रही पथ यात्रा लोगों के गुस्से को देखते हुये दो विधानसभा क्षेत्रों में नहीं आयोजित होगी। इस मामले में पुलिस की ओर से की गई जांच से परिजन तो नाखुश हैं ही, लोग भी ढीली जांच से आहत हैं। लिहाजा अब अंदेशा है कि हो सकता है कि सीने में सुलग रहा आक्रोश लावा बन कर फूटे।

फोरेंसिक विशेषज्ञों को अलग-थलग क्यों रखा गया?

फोरेंसिक विशेषज्ञों को अलग-थलग क्यों रखा गया?

कोटखाई गैंगरेप व मर्डर केस को सुलझाने के लिए किस तरह मुस्तैदी बरती गई, इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि पूरे मामले में फोरेंसिक विशेषज्ञ की सेवाएं तक नहीं ली गईं। मिली जानकारी के मुताबिक, फोरेंसिक विशेषज्ञ 6 जुलाई को ही मौका ए वारदात पर पहुंचा था, जहां उसने थोड़े-बहुत सैंपल लिए। छात्रा का क्लिप उसके हाथ लगा और वह वापस आ गया। न तो पुलिस ने फोरेंसिक विशेषज्ञ के अनुभवों का कोई लाभ उठाया, न ही महत्त्वपूर्ण स्पॉट्स पर उसे ले जाया गया। आखिर अब तक की जांच में फोरेंसिक विशेषज्ञों को अलग-थलग क्यों रखा गया, ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब चिल्ला-चिल्लाकर लोग मांग रहे हैं।

गैंगरेप आखिर हुआ कहां, जंगल में या कहीं और?

गैंगरेप आखिर हुआ कहां, जंगल में या कहीं और?

यही नहीं, किसी भी महिला या युवती के मामले की जांच में महिला अफसर की जरूरत होती है, लेकिन इस मामले की एसआईटी में एक भी महिला अधिकारी शामिल नहीं की गई। खास बात यह भी कि पुलिस की थ्योरी जंगल में ही गैंगरेप साबित कर रही है जबकि पीड़ित परिजन व स्थानीय लोग इससे इत्तफाक नहीं रखते। लिहाजा वारदात के 14 दिन के बाद भी स्पॉट था कहां, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। स्कूली छात्रा की स्कूल ड्रेस उसकी नग्न लाश के पास फेंकी हुई थी यानी रेप या गैंगरेप उसके साथ यदि नग्नावस्था में किया गया तो डीएनए टेस्ट के लिए उसकी स्कूल ड्रेस मायने नहीं रखती। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि स्कूल ड्रेस में ब्लड स्टेन या फिर आरोपियों के सीमन का खुलासा होता है, तभी वे पकड़े जाएंगे, वरना नहीं।

संदिग्ध युवकों के घर की तलाशी क्यों नहीं?

संदिग्ध युवकों के घर की तलाशी क्यों नहीं?

पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनका रिमांड चल रहा है। इनमें से एक को बचाने की कोशिशें भी जारी हैं। कुछ लोगों का डीएनए टेस्ट भी करवाया गया है। सवाल यह है कि वारदात के इतने दिन बाद भी संदिग्धों के घर की तलाशी क्यों नहीं ली गई। अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक इस कार्य में यदि तत्परता बरती जाती तो कई संदेह दूर हो सकते थे।

वेजिनल स्वैब टेस्ट खोलेगा कई राज

वेजिनल स्वैब टेस्ट खोलेगा कई राज

वेजिनल स्वैब टेस्ट से इस पूरे मामले का पटाक्षेप हो सकता है। मृतक छात्रा के पोस्टमॉर्टम के दौरान यह स्वैब डीएनए के लिए लिया गया था। सूत्रों के मुताबिक एक-दो दिन में इसकी रिपोर्ट आ सकती है। इसमें यह पता चलेगा कि छात्रा के साथ एक व्यक्ति ने रेप किया या एक से अधिक ने। आरोपियों का फिर डीएनए मैच होगा, उसी के बाद यह तय होगा कि असल गुनहगार कौन रहे और उनकी तादाद कितनी थी

वहीं मामले में सीबीआई जांच के लिए प्रदेश सरकार का सिफारिशी पत्र जारी करने के बाद भी इस मामले में सीबीआई को कोई निर्देश जारी नहीं हुए हैं। लिहाजा चर्चा है कि हिमाचल में जिस तरह से बरसात व बर्फबारी के नुकसान का जायजा लेने के लिए हर साल लेटलतीफी से केंद्रीय राहत दल पहुंचता है, वह भी तब जबकि नुकसान के निशान मिट चुके होते हैं। कहीं उसी तर्ज पर सीबीआई की जांच भी लेटलतीफी के चलते बेनतीजा न निकल जाए।

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English summary
Major questions people asking in Kotkhai gang rape case.
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