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कोटखाई गैंगरेप केस का हिमाचल चुनाव पर असर, पढ़िए खास रिपोर्ट

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    शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले में चल रहा जन-अंदोलन जंगल में आग की तरह फैल रहा है जिसके चलते वीरभद्र सरकार संकट के बादलों से घिर चुकी है। आंदोलन है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा।

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    'गुड़िया के हत्यारों को गोली मारो'

    'गुड़िया के हत्यारों को गोली मारो'

    शिमला में इन दिनों हर जगह दो ही नारे गूंज रहे हैं, गुड़िया के हत्यारों को गोली मारो व पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद। पुलिस के खिलाफ आज से पहले इतना बड़ा जन आक्रोश न तो यहां देखा गया, न सुना गया। अपर शिमला से चला यह अंदोलन अब प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने लगा है। राज्य सरकार की ओर से लोगों के गुस्से को शांत करने के लिये एसआईटी के गठन के बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने की बात तो मान ली गई लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो पाया हलांकि अब तक छह लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं।

    आंदोलन की आंच को महसूस कर रही सरकार

    आंदोलन की आंच को महसूस कर रही सरकार

    जिस तरीके से आंदोलन जंगल में आग की तरह फैल रहा है इसको देखते हुए कहा जा रहा है कि यह वीरभद्र सिंह सरकार को बहा कर ले जायेगा। ऐसा राजनैतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह वीरभद्र सिंह की आखिरी राजनैतिक पारी साबित होगी। लोग इस मामले में विपक्षी दल भाजपा की ओर से की जा रही राजनिति से भी नाखुश बताये जा रहे हैं। आज शिमला के लोग अपने आपको सरकार की ओर ठगा सा महसूस कर रहे हैं व मान रहे हैं कि उन्हें सरकार व प्रशासन की ओर से नीचा दिखाया गया है। यही जनभावना इस अंदोलन की आग में घी डाल रही है। आज शिमला की इस बेटी के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक अंदोलन खड़ा हो गया है। युवा शक्ति उग्र हो चुकी है जिसे शांत करने का कोई तरीका सरकार के पास नहीं है। फेसबुक, टि्वटर , यूटयूब व वाट्सएप व इंस्टाग्राम इस युवा शक्ति के आधुनिक हथियार हैं, जो अचूक हैं, जिनकी जद में अब सरकार आ चुकी है।

    लोगों में पुलिस के खिलाफ अविश्वास की भावना

    लोगों में पुलिस के खिलाफ अविश्वास की भावना

    अविश्वास की इस भावना के बीच जनता मान रही है कि मामले में जिन छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनमें से दो नेपाली व दो गढ़वाली अपराधी नहीं हैं। उन्हें फंसाया गया है। यह सब उन लोगों को बचाने के लिये किया गया है जो अपराध में शामिल इलाके के रसूखदार हैं। लोगों में यह अविश्वास की भावना न पनपती अगर इस मामले को हैंडल कर रहे डीएसपी का तबादला न होता व जांच एसआईटी को नहीं सौंपी जाती।

    आंदोलनकारी उठा रहे हैं कई सवाल

    आंदोलनकारी उठा रहे हैं कई सवाल

    शिमला के ऐतिहासिक रिट्ज मैदान पर धारा 144 को तोड़ते हुये धरने पर बैठे छात्रों के बीच बैठी कॉलेज छात्रा उल्टा सवाल पूछती हैं कि क्या आपको लगता है कि जो नेपाली व गढ़वाली मजदूर जिस इलाके में सालों से रह रहे हों वह उसी इलाके में इतना बड़ा अपराध कर सकते हैं। अगर करते तो वह भाग गये होते। चूंकि नेपाल से आने वाले लोग पहले भी यहां अपराध कर वापिस नेपाल भागते रहे हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि पुलिस दबाव के आगे किस ढंग से काम कर रही है।

    शिमला के एक ओर बाशिन्दे ने कहा कि नेपाली तो हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। वह ऐसा अपराध नहीं कर सकते। आज हमारे बागवान उनके बिना कुछ नहीं कर सकते। दोनों का आपस में गहरा रिशता है व आमतौर पर गांवों में यह धारणा रहती है कि जो अपराध करे उसे गांव से ही बाहर निकाल दो लेकिन आज तक ठियोग से लेकर कोटखाई तक कहीं कोई मामला नहीं उभरा।

    आज अंदोलनकारी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कैसे आरोपियों की तस्वीर सीएम के फेसबुक पेज पर पोस्ट हो जाती है व बाद में उन्हें हटा लिया जाता है लेकिन पुलिस बाद में उन चार में से दो को फिर हिरासत में लेती है। लोग इस बात से भी नाराज हैं कि मामले में राजनेताओं का रवैया संवेदनहीन रहा है। खासकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिन्होंने मामले को शुरू से ही हल्के में लिया व निचले स्तर पर जाकर बयानबाजी की।

    सीएम वीरभद्र के बयान से लोगों में नाराजगी

    सीएम वीरभद्र के बयान से लोगों में नाराजगी

    शिमला के डीसी आफिस के बाहर नारेबाजी कर रही अपर शिमला की एक युवती जो शिमला में एचपी यूनिवर्सिटी की छात्रा है, ठियोग व जुब्बल कोटखाई के विधायकों को कोसते हुये कहती हैं कि उनका रवैया देखो , दोनों विधायकों में से किसी ने भी आज तक इस मामले में कोई स्टेटमेंट तक जारी नहीं की। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हमारा मजाक उड़ाते हुये कह रहे हैं कि कोटखाई के लोग ज्यादा ही स्मार्ट हैं। हमारी बेटी की हत्या हुई है, हम चुप नहीं बैठेंगे। वह सवाल करती है कि यह सब उनकी बेटी के साथ हुआ हेाता तो क्या तब भी ऐसा हेाता जो हमारे साथ हो रहा है। ठियोग से सिंचाई मंत्री विद्या स्टोक्स चुन कर आई हैं तो कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर हैं , दोनों ही इतना सब होने के बावजूद खामोशी से नजारा देख रहे हैं व भूमिगत बताये जा रहे हैं।

    अंदोलन से जुड़े लोग कह रहे हैं कि सरकार व पुलिस शुरू से ही इस मामले में लापारवाह रूप अख्तियार करती रही। यह लोग अपने ताकतवर लोगों को बचाते रहे। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा राजनैतिक धारा को बदल सकता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अब खुद कहा है कि अंदोलन के पीछे अमीर व सेब लॉबी के कुछ लोग अपने मंसूबे व उद्देश्य हल करने के प्रयासों में हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने कहा है कि अगर लोगों में इस मामले पर गुस्सा भड़का है तो जरूर पुलिस ने कोताही बरती होगी। उन्होंने कहा कि फेसबुक पर तस्वीरें डालना व उन्हें हटा लेना भी गफलत पैदा कर गया।

    कोटखाई प्रकरण का फायदा लेने में लगी भाजपा

    कोटखाई प्रकरण का फायदा लेने में लगी भाजपा

    उधर भाजपा इस मामले को भुनाने की पूरी कोशिशों में जुटी है व चाह रही है कि चुनावों तक यह मामला गरमाया रहे। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने इस कांड के पीछे प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था को जोड़कर देख रहे हैं व उन्होंने मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगा है। सारे घटनाक्रम पर शिमला के लोअर बाजार के एक दुकानदार कहते हैं कि इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिये, न ही इस पर वोट की पालिटिक्स की जाये। यह मामला राजनिति से ऊपर उठकर है। चाहे हमारे राजनैतिक सरोकार कुछ भी हों।

    'वीरभद्र के पतन का कारण बनेगा कोटखाई केस'

    'वीरभद्र के पतन का कारण बनेगा कोटखाई केस'

    सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पहले ही इस मामले पर बैकफुट पर है। शिमला के एक बुजुर्ग पत्रकार ने बताया कि यह प्रकरण वीरभद्र सिंह के पतन का कारण बनेगा। निस्संदेह शिमला वीरभद्र सिंह की कर्मभूमि रही है व अपर हिमाचल में कांग्रेस का अच्छा खासा वोट बैंक है। हर चुनाव में अपर हिमाचल के लोग वीरभद्र सिंह के साथ चलते रहे हैं लेकिन अब उनके प्रति लोगों का विश्वास खत्म हो चुका है। वह कहते हैं कि सरकार की तरफ से दो बड़ी गलतियां हुईं। पहली मुख्यमंत्री का वह बयान जिसमें उन्होंने कहा कि कोटखाई के लोग जरूरत से ज्यादा स्मार्ट हैं दूसरी उनके फेसबुक पोस्ट में कथित आरोपियों की पहले फोटो डालना व बाद में उन्हें हटा देना।

    इस मामले की सीबीआई जांच के बाद जो भी परिणाम सामने आयें लेकिन इतना तय है कि इसी मुद्दे पर आने वाले चुनावों में प्रदेश की राजनिति की दशा व दिशा तय होगी। आज शिमला जिला के चौपाल, जुब्बल कोटखाई, शिमला व शिमला ग्रामीण,रामपुर ,रोहड़ू , ठियोग व कुसुमटी के अलावा किन्नौर विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की साख दांव पर लगी है।

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    English summary
    Kotkhai gang rape case impact on politics of Himachal.

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