कसौली गोलीकांड: भरी कैबिनेट में डीजीपी को लगाई गई फटकार, एसपी समेत पांच पुलिसवाले सस्पेंड

शिमला। बहुचर्चित कसौली गोलीकांड की गूंज आज हिमाचल कैबिनेट की बैठक में भी सुनाई दी। हिमाचल के इतिहास में शायद यह पहला मौका रहा होगा जब सीएम ने अपनी कबीना के मंत्रियों के सामने एजेंडे से हटकर कैबिनेट में ही कसौली मामले पर जवाब तलबी करने के मकसद से प्रदेश के डीजीपी को तलब किया व उन्हें खरी खोटी सुनाई। गुरूवार को चल रही हिमाचल कैबिनेट की शिमला में चल रही बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था खासकर कसौली प्रकरण पर पर गर्मागर्म चर्चा हुई। भरी कैबिनेट में डीजीपी मरड़ी की जवाब तलबी हुई। डीजीपी को मंत्रियों के गुस्से के आगे जवाब देते भी नहीं बना।

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इसके फौरन बाद जयराम सरकार ने प्रकरण पर बड़ा कदम उठाते हुए सोलन के तत्कालीन एसपी मोहित चावला सहित पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया। 9 अफसरों को चार्जशीट किया गया है। जिन अफसरों पर गाज गिरी है, वे कसौली फायरिंग से संबद्ध हैं। सस्पेंड किए गए अफसरों में सोलन के पूर्व एसपी, डीएसपी व नायब तहसीलदार व एसएचओ शामिल हैं। इनके अलावा 9 अफसरों को चार्जशीट किया गया है। बताया जा रहा है कि सरकार डीजीपी से भी नाखुश हैं व उन्हें भी हटाने के लिए प्रयास शुरू हो गये हैं।

जयराम सरकार ने कैबिनेट के तुरंत बाद फैसला लिया और अफसरों को सस्पेंड कर दिया। इतना ही नहीं, जयराम ने कैबिनेट की बैठक के दौरान डीजीपी को बुलाकर कसौली मामले के लिए लताड़ लगाई। गौरतलब है कि कसौली में 13 होटल के अवैध कब्जे तुड़वाने के लिए टीम पर गेस्ट हाउस मालिक ने गोलियां चला दीं थी। इसमें महिला अधिकारी शैलबाला की मौत हो गई थी और एक पीडब्ल्यूडी कर्मचारी घायल हो गया था, जिसकी बाद में चंडीगढ़ में मौत हो गई थी।

दरअसल, बहुचर्चित कसौली गोलीकांड को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से शिमला के डिविजनल कमीशनर की अगुवाई में करवाई गई जांच रिर्पोट में भी पहली नजर में पुलिस की लापारवाही को इसके लिए जिम्मेवार माना गया है। प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच शिमला के डिविजनल कमीशनर को सौंपी थी। बताया जा रहा है कि अपनी 130 पन्नों की रिर्पोट को डिविजनल कमिश्नर ने अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह बी.के. अग्रवाल को सौंप दिया है। रिपोर्ट में गोलीकांड की घटना के लिए सीधे तौर पर पुलिस की खामियों की तरफ इशारा किया गया है।

यानि पुलिस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद अवैध निर्माण को तोडऩे गई टीम को जो सुरक्षा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए थी, उसे नहीं करवाया गया। इस कारण सहायक नगर नियोजन अधिकारी शैल बाला की मौके पर ही मौत हो गई तथा घटना में घायल और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी गुलाब सिंह ने पी.जी.आई. चंडीगढ़ में दम तोड़ दिया। पुलिस की लापरवाही से गोली मारने वाला विजय कुमार मौके से फरार हो गया।

रिपोर्ट के बाद बंदोबस्त यानि राजस्व विभाग संबंधी कुछ खामियों की तरफ भी इशारा किया गया है। इस तरह क्षेत्र में अवैध निर्माण के लिए टी.सी.पी. सहित अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। मंडलायुक्त ने जांच रिपोर्ट में पुलिस की चूक की तरफ इशारा करते हुए कहा कि शैल बाला पर गोली चलाने के बाद विजय कुमार जिस समय भागा, उसके बाद 2 पुलिस कर्मियों ने उसका पीछा किया। उनमें से एक के पास हथियार था, दूसरे के पास नहीं। विजय कुमार की धमकी के बाद बगैर हथियार वाले पुलिस कर्मी घबरा गए, जिससे उसे मौके से फरार होने का मौका मिला गया।

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