Toilet Seat के हिसाब से हिमाचल में अब वसूला जाएगा Tax? सीतारमण की खिंचाई के बाद प्रदेश सरकार ने दी ये सफाई
Himachal Pradesh Toilet Seat Tax: हिमाचल प्रदेश में एक नई सरकारी अधिसूचना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें कहा गया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में अब टॉयलेट सीट की संख्या के आधार पर टैक्स लिया जाएगा।
इस फैसले पर न सिर्फ राज्य में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छिड़ गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, मामले में विवाद बढ़ता देख सुक्खू सरकार और जल शक्ति विभाग ने सफाई पेश की। स्पष्ट किया है कि 'टॉयलेट सीट टैक्स' (Toilet Seat Tax) जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन इस अधिसूचना ने जनता के बीच चिंता और सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी...

क्या है 'टॉयलेट सीट टैक्स'?(What is Toilet Seat Tax)
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से उनके घरों में मौजूद टॉयलेट सीट की संख्या के आधार पर टैक्स वसूला जाएगा। प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा, जिसे सीवरेज बिल में शामिल किया जाएगा।
क्या है कांग्रेस सरकार का तर्क?
इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे राज्य में सीवरेज सिस्टम को बेहतर बनाने और पानी के उपयोग को सही तरीके से मॉनिटर करने में मदद मिलेगी। जल शक्ति विभाग का कहना है कि इस अधिसूचना का मकसद 100 फीसदी सीवरेज कनेक्टिविटी हासिल करना है, जिससे प्रदूषण कम हो और सीवरेज का सही तरीके से उपचार हो सके।
क्या है निर्मला सीतारमण का पक्ष? (Nirmala Sitharaman Target Toilet Seat Tax)
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे 'अविश्वसनीय' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "अगर यह सच है तो अविश्वसनीय है! जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्वच्छता को जन आंदोलन बना रहे हैं, वहीं कांग्रेस टॉयलेट के लिए लोगों पर टैक्स लगा रही है! शर्म की बात है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अच्छी स्वच्छता प्रदान नहीं की, लेकिन यह कदम देश को शर्मसार करेगा।"
हिमाचल सरकार ने दी सफाई (Himachal Pradesh CM Sukhwinder Singh Sukhu Government)
इस विवाद के बीच, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया है कि सरकार ने किसी 'टॉयलेट सीट टैक्स' का आदेश जारी नहीं किया है। जल शक्ति विभाग ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि अधिसूचना केवल जल शुल्क के संबंध में थी और टॉयलेट की सीट पर कर लगाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सीवरेज कनेक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है और सरकार का मुख्य लक्ष्य 100 फीसदी सीवरेज कनेक्टिविटी हासिल करना है।
क्या है असल अधिसूचना?
20 सितंबर 2023 को, जारी इस सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में सीवरेज बिल पानी के बिल का 30 फीसदी होगा। इसके अलावा, जिन लोगों के पास केवल सीवरेज कनेक्शन है और जो अपना पानी का स्रोत खुद इस्तेमाल करते हैं, उन्हें प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि, इस अधिसूचना में यह कहीं नहीं कहा गया कि टॉयलेट सीट की संख्या के आधार पर सीवरेज कनेक्शन मिलेगा।
वित्तीय संकट का सामना कर रही सरकार
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पिछले कुछ महीनों से गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। सरकार को इस संकट से निपटने के लिए कई कठिन फैसले लेने पड़ रहे हैं, जिसमें पानी और सीवरेज से जुड़े बिलों में बढ़ोतरी भी शामिल है। पहले जहां राज्य में पानी के बिल नहीं दिए जाते थे, अब हर कनेक्शन पर 100 रुपये प्रति महीने का बिल जारी करने का फैसला लिया गया है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर से हो गई है।
10 लाख की आबादी प्रभावित?
हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में करीब 10 लाख लोग रहते हैं, जो इस नए सरकारी आदेश से प्रभावित हो सकते हैं। नए शुल्क का असर उन घरों पर पड़ेगा जहां एक से ज्यादा शौचालय हैं। सीवरेज कनेक्शन की फीस घरेलू उपयोग के लिए 500 रुपये और व्यावसायिक उपयोग के लिए 1000 रुपये तय की गई है।












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