कोटखाई कांड: सूरज नेपाली की हत्या प्राइवेट पार्ट क्रश करने से हुई या गला घोंटने से!

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शिमला। हिमाचल के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप मर्डर मामले के बीच कोटखाई थाने में एक आरोपी की हत्या को लेकर पुलिस जो कहानी बता रही है वो भी गफलत भरी है। जिससे साफ नहीं हो पा रहा कि थाना के अंदर लॉकअप में नेपाली सूरज सिंह की आखिर हत्या कैसे हुई। बुधवार के दिन मंडी में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जानकारी दी थी कि लॉकअप में एक आरोपी ने दूसरे अरोपी का प्राइवेट पार्ट क्रश कर दिया। जिससे सूरज सिंह की मौत हुई। लेकिन शाम ढलते ही पुलिस सीएम की इस जानकारी से पीछे हटती नजर आई। पुलिस ने दावा किया कि सूरज सिंह की हत्या गला घोंटने से हई और राजू ने उसका गला घोंटा।

कोटखाई कांड: सूरज नेपाली की हत्या प्राइवेट पार्ट क्रश करने से हुई या गला घोंटने से!

अब इस विरोध के बीच बयानबाजी के बाद एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। भले ही प्रदेश हाईकोर्ट ने छात्रा से गैंगरेप मर्डर व सूरज नेपाली की हत्या के मामलों की जांच सीबीआई को दो दिनों में शुरू करने के आदेश दिए हों, लेकिन जब तक सीबीआई इस केस को अपने हाथ में नहीं लेती तब तक यह सब सरकार व पुलिस के लिए सिरदर्दी बना रहेगा। आज पुलिस बेबस है तो सरकार लाचार। उग्र अंदोलनकारियों के आगे कोई कुछ नहीं कर पा रहा। थेड़ी सी कोशिश कहीं मिल मिलाकर महौज शांत करने की होती भी है तो या पुलिस कोई गलत कदम उठा देती है या फिर खुद मुख्यमंत्री कोई उल्टा सीधा बोलने लगते हैं।

कोटखाई कांड: सूरज नेपाली की हत्या प्राइवेट पार्ट क्रश करने से हुई या गला घोंटने से!

मंगलवार रात को कोटखाई पुलिस थाना में जो कुछ हुआ, उसको लेकर सवाल अभी भी खड़े हैं। पुलिस थाने के एक ही लॉकअप में पांच आरोपी एक साथ बंद कर दिए जाते हैं। एक आरोपी राजेंद्र सिंह नेपाली आरोपी सूरज सिंह का हत्या कर देता है। उसी लॉकअप में बंद तीन नेपाली और गढ़वाली मजदूरों ने उनका बीच-बचाव नहीं करते हैं। क्योंकि पुलिस कह रही है कि मुताबिक राजेंद्र उर्फ राजू व सूरज के बीच पहले कहासुनी होती रही। पुलिस को लॉकअप खोलने में वक्त लग गया, तब तक सूरज सिंह ढेर हो चुका था।

कोटखाई कांड: सूरज नेपाली की हत्या प्राइवेट पार्ट क्रश करने से हुई या गला घोंटने से!

अब सवाल उठ रहा है कि क्या अन्य तीन आरोपी इतनी गहरी नींद में सोए हुए थे कि उन्हें पता ही नहीं चला। यही सवाल पुलिस वालों पर है कि क्या पुलिस थाना में मौजूद कर्मी कहीं शराब का सेवन करके सो तो नहीं गए थे। जिनका उस दौरान तैनात पुलिसकर्मियों की मेडिकल जांच में ही खुलासा हो सकता है। लोगों के जेहन में ही नहीं, क्राइम विशेषज्ञों की नजर में भी ये ऐसे सवाल हैं, जो जवाब मांगेंगे। क्योंकि अभी तक रात्रि के वक्त थाना में तैनात रहे पुलिस जवानों के मेडिकल की कोई सूचना तक नहीं मिली है। पुलिस ने एसएचओ थाना मुंशी व संतरी को ही इस कोताही के लिये सस्पेंड किया है। लेकिन यह नहीं बताया कि उस रात थाना में कितने पुलिस वाले मौजूद थे। पुलिस को यह भी जवाब देना पड़ेगा कि थाना के अंदर 25 पेटी शराब जो कि सीलबंद नहीं थीं थाने में क्यों रखीं गईं थीं। व इस मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारी के पुलिस रिमांड की इस अवधि में सभी आरोपियों से पूछताछ में कहीं थर्ड डिग्री फार्मला तो नहीं अपनाया।

कोटखाई कांड: सूरज नेपाली की हत्या प्राइवेट पार्ट क्रश करने से हुई या गला घोंटने से!

सवाल ये भी हैं कि पांचों आरोपी यानी राजेंद्र कुमार समेत सभी एक ही बागीचे में काम करते थे। राजेंद्र की मां ने मीडिया में जो बयान दिए हैं, उनके मुताबिक उनका बेटा तो कभी लड़ाई-झगड़े तक में संलिप्त नहीं रहा। फिर वह इतने बड़े कृत्य को अंजाम क्यों देगा। लॉकअप के भीतर आखिर कहासुनी हत्या में कैसे बदल गई, ये वे सवाल हैं, जिनका जवाब अब सीबीआई भी मांगेगी। कहा जाने लगा है कि सूरज ही इस मामले में एक ऐसा किरदार था जो शायद बहुत बड़ा राजदार था। कहीं सूरज सिंह के पास और कई बड़े राज तो नहीं थे, जिसमें कई और लोग भी शिकंजे में आ सकते थे, इसलिए उसे सुनियोजित तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया।

यह है पुलिस की ताजा थ्योरी

मुख्यमंत्री की ओर से दी गई जानकारी विपरीत पुलिस ने अब नई जानकारी दी है कि लॉकअप में पांच नहीं थे तीन लोग ही थे। इनमें एक गढ़वाली आरोपी सुभाष, दूसरा आरोपी नेपाली सूरज सिंह और राजेंद्र को बंद किया गया था। गढ़वाली आरोपी सुभाष को पूछताछ के लिए पुलिस ने बाहर बुला रखा था। इस बीच सूरज सिंह व राजेंद्र सिंह की बहस हुई और राजेंद्र सिंह ने उसे मौत के घाट उतार दिया।

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English summary
Himachal Pradesh kotkhai Gangrape Murder case truth of dead accused Nepali
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