हिमाचल चुनाव 2017: सीट नंबर 66 रामपुर (आरक्षित अनूसूचित जाति) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

शिमला। रामपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 66 है। शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 66,819 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में नन्द लाल इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। बुशहर राजवंश की देवी भीमाकाली की वजह से रामपुर को पहचान मिली है। सराहन का भीमाकाली मन्दिर अपनी अलग पहचान बनाये है । मन्दिर परिसर में भगवान रघुनाथ, नरसिंह और पाताल भैरव (लांकडा वीर) के अन्य महत्वपूर्ण मन्दिर भी हैं। देवी भीमा की अष्टधातु से बनी अष्टभुजा वाली मूर्ति सबसे ऊपर की मंजिल में स्थापित है।

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भीमाकाली मंदिर हिंदू और बौद्ध शैली का मिश्रण है। जिसे लकड़ी और पत्थर से सुंदर तरीके से नक्कासी कर तैयार किया गया है। पगोडा आकार की छत वाले इस मंदिर में लकड़ी पर की गई नक्काशी पहाड़ी शिल्पकारों द्वारा हाथ से उकेरी गई बारीक नक्काशी भी दर्शाता है। मन्दिर की दिवारों और बाहरी सजावट वाले स्थानों पर लकड़ी की सुंदर नक्काशी कर हिंदू देवी-देवताओं के कलात्मक चित्र बनाए गए हैं। समुद्र तल से 2165 मीटर की ऊंचाई पर बसे सराहन गांव बुशहर रियासत की राजधानी रहा है। पूर्व में सराहन को शोणितपुर कहा जता था। भीमाकाली मंदिर के साथ अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। पुरातत्ववेत्ताओं का अनुमान है कि वर्तमान भीमाकाली मंदिर सातवीं-आठवीं शताब्दी के बीच बना है।

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भीमाकाली शिवजी की अनेक मानस पुत्रियों में से एक है। मत्स्य पुराण में भीमा नाम की एक मूर्ति का उल्लेख आता है। एक अन्य प्रसंग है कि मां पार्वती जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में सती हो गई थीं तो भगवान शिव ने उन्हें अपने कंधे पर उठा लिया था। हिमालय में जाते हुए कई स्थानों पर देवी के अलग-अलग अंग गिरे। एक अंग कान शोणितपुर में गिरा और भीमाकाली प्रकट हुई। सराहन भीमा काली माँ की विख्यात और प्राचीन नगरी को पौराणिक गाथा के अनुसार शोणितपुर को सम्राट वाणासुर का स्थान माना जाता। है , जनश्रुति के अनुसार वाणासुर शिवभक्त था जो राजा बलि के सौ पुत्रों में सबसे बडा था। उसकी बेटी उषा को पार्वती से मिले वरदान के अनुसार उसका विवाह भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से हुआ। परन्तु इससे पहले अचानक विवाह के प्रसंग को लेकर वाणासुर और श्रीकृष्ण में घमासान युद्ध हुआ था जिसमें वाणासुर को बहुत क्षति पहुंची थी।

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अंत में पार्वती जी के वरदान की महिमा को ध्यान में रखते हुए असुर राज परिवार और श्रीकृष्ण में सहमति हुई। तदोपरान्त पिता प्रद्युम्न और पुत्र अनिरुद्ध के वंशजों की राज परम्परा चलती रही। महल में स्थापित भीमाकाली मन्दिर के साथ अनेक पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं भीमाकाली शिवजी की अनेक मानस पुत्रियों में से एक मना जाता है। रामपुर रियासत के अंतिम शासक वीरभद्र सिंह ही हैं। यहां भी वीरभद्र सिंह का अपना प्रभाव रहा है। इसी वजह से यहां से सिंघी राम लगातार चुनाव जीतते रहे। जब वीरभद्र सिंह ने सिंघी राम के सिर से अपना हाथ हटाया तो नंद लाल का यहां की राजनिति में अभ्युदय हुआ। यह चुनाव क्षेत्र अनूसूचित जाति के लिये आरक्षित है। जिसके चलते जातिगत समीकरण तो अभी तक नहीं बन पाये। लेकिन वीरभद्र सिंह के प्रभाव के चलते राजनिति जरूर प्रभावित होती रही है।
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रामपुर से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 नन्द लाल कांग्रेस
2007 नन्द लाल कांग्रेस
2003 सिंघी राम कांग्रेस
1998 सिंघी राम कांग्रेस
1993 सिंघी राम कांग्रेस
1990 सिंघी राम कांग्रेस
1985 सिंघी राम कांग्रेस
1982 सिंघी राम कांग्रेस
1977 निन्ज़ू राम जनता पार्टी

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एसपीजी कंमाडो जब राजनिति में आया तो यहां भी उसका निशाना अचूक रहा
रामपुर के विधायक नन्द लाल राजनिति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। राजनिति में आने के बाद दो चुनाव लड़े दोनों ही जीते। उन्होंने आईटीबीपी में बेसिक प्रशिक्षण हासिल करने के बाद कंमाडो कंटीजेंट बने। भारत तिब्बत सीमा पुलिस में उन्होंने देश के कई भागों में अपनी सेवायें दीं। बाद में 1985 में एसपीजी में शामिल हुये। 1997 तक अपनी बेहतरीन सेवायें दीं। इस दौरान राजीव गांधी व चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रीत्व काल में उन्होंने अपनी सेवायें पीएमओ में दीं। 2007 में उन्होंने वालंटरी रिटायरमेंट ली और राजनिति में आये। उन्होंने 2007 का चुनाव पहली बार जीता। उसके बाद 2012 में भी नंद लाल रामपुर से दोबारा विधायक चुने गये। उन्होंने भाजपा के प्रेम सिंह द्रेक को 9471 मतों से पराजित किया था। वीरभद्र सिंह की सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बने। अब एक बार फिर यहां से नंद लाल का मुकाबला प्रेम सिंह द्रेक से ही है।
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