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कोटखाई केस: हिमाचल पुलिस की फजीहत, लंबी छुट्टी पर गए SIT चीफ

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    शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले में अपनी किरकिरी करा चुकी पुलिस अब एक बार फिर विवादों में घिर गई है। ठियोग में हुये हिंसक प्रदर्शन और सरकार की ओर से मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद शिमला पुलिस दोबारा उन्हीं ताकतवर लोगों के पास पहुंच गई है, जिन्हें पहले पूछताछ के बाद निर्दोष करार देकर छोड़ा जा चुका था।

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    इलाके के रसूखदारों के बेटों को फिर पुलिस ने उठाया

    इलाके के रसूखदारों के बेटों को फिर पुलिस ने उठाया

    पुलिस ने इस मामले के सह अभियुक्त आशीष के साथ अन्य दो रईसजादों की कोटखाई थाने में हाजिरी भरवाकर भारी सुरक्षा के बीच शिमला पहुंचाया। इन्हें मेडिकल के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां लोगों की काफी भीड़ इकट्ठा हुई। इनमें से एक शादीशुदा बताया जाता है, जबकि दूसरा कोटखाई में ही बगीचे से जुड़ा बताया जाता है। भारी पुलिस बल की सुरक्षा में इनका मेडिकल कराया गया। दोनों ही हिरासत में लिए गए युवा इलाके के बड़े रसूखदारों की बिगड़ैल औलादें बताई जा रही हैं।

    रईसजादों के पीछे चले परिजनों के कई वाहन

    रईसजादों के पीछे चले परिजनों के कई वाहन

    शिमला के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में आरोपी आशीष और दोनों रईसजादों के सीमन एनालिसिस और डीएनए प्रोफाइलिंग के सैंपल लिए गए। पुलिस अब भी मामले में छह को ही आरोपी बता रही है। इन दोनों रईसजादों का संदेह के आधार पर मेडिकल कराने की बात पुलिस कर रही है। उनकी ताकत का इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों रईसजादों के साथ उनके परिजन भी कई वाहन लेकर थाने तक पहुंचे व शिमला तक आये।

    ये वही हैं जिनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं

    ये वही हैं जिनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं

    बता दें कि इन दोनों रईसजादों के सोशल मीडिया पर फोटो वायरल हुए थे। आक्रोशित लोग इन्हें हिरासत में लेने के लिए लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे थे। मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को पुलिस की एक टीम दोबारा पीड़िता के स्कूल भी भेजी गई। हलांकि, स्कूल में पुलिस छात्रा की सहेलियों से बातचीत नहीं कर सकी। घटना के ग्यारह दिन बाद भी पुलिस महासू में घटनास्थल पर पहुंचकर सबूत खंगालने में जुटी है। शनिवार को छात्रा की सहपाठियों से बात न होने के बाद पुलिस ने गांव के कुछ लोगों से दोबारा पूछताछ की।

    यह है पूरा मामला

    यह है पूरा मामला

    छात्रा का शव निर्वस्त्र हालत में छह जुलाई की सुबह दांदी के जंगल में बरामद किया गया। गुडिय़ा चार जुलाई शाम से लापता थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुराचार और हत्या की बात सामने आई। मामले में आशीष चौहान की पहली गिरफ्तारी हुई। उसी दिन चंद घंटों बाद दो नेपालियों, उत्तराखंड के दो लोगों समेत छह को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने प्रेस वार्ता की लेकिन पुलिस की बात लोगों के गले नहीं उतरी और उन्होंने आंदोलन खड़ा कर दिया। जन आक्रोश के आगे सरकार झुकी और सीबीआई को मामला सौंपने के आदेश दे दिए।
    मामले का खुलासा होने के बाद से जिस तरह पुलिस की पूरी जांच पर सवाल उठने लगे हैं, उसके बाद पुलिस मामले में कोई भी चूक नहीं करना चाह रही। यही कारण है कि जिन आरोपियों को क्लीन चिट दी गई उनकी भले ही गिरफ्तारी नहीं कर रही लेकिन पूछताछ के बाद रह गए शक को दूर करने के लिए उनका डीएनए सैंपल ले लिया। अब अगर सैंपल पास नहीं होता है तो पुलिस के पास ठोस वजह होगी और वह छोड़ने की वजह भी पुख्ता तरीके से बता सकेगी। वहीं, अगर सैंपल मिल गए तो भी चुपचाप गिरफ्तारी कर वाहवाही लूट सकेगी।

    पुलिस को डीएनए रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस को डीएनए रिपोर्ट का इंतजार

    दरअसल इस मामले में उठ रहे सवालों पर डीएनए की रिपोर्ट के बाद ही विराम लग सकता है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है। लिहाजा, अब आरोपियों के डीएनए और पीड़िता के शरीर से मिले डीएनए मैच हो जाते हैं तो पुलिस की थ्योरी और दावे सच हो जाएंगे। अगर डीएनए का मिलान नहीं हो पाया तो उनके जनता के आरोप सही हो जाएंगे। डीएनए के महत्व के बीच शनिवार को पुलिस ने कुछ आरोपियों के डीएनए सैंपल लिए। सूत्रों का कहना है कि पकड़े गए सभी आरोपियों के सैंपल फोरेंसिक लैब जुन्गा भेजे जाएंगे। इसके बाद ही पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लग सकेगा। पुलिस लगातार दावा करती रही है कि मामले का सही खुलासा हुआ है। आरोपियों ने पत्रकारों से बातचीत में भी अपने अपराध को स्वीकारा है। हालांकि, सीएम के फेसबुक पेज पर फोटो डालने और वायरल होने के बाद हटाने की वजह से पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पीड़िता का शव जंगल में पड़ा था तो दो दिन तक किसी जानवर ने उसे खाया क्यों नहीं। वहीं, शाम को हुई इस वारदात की आवाज किसी को क्यों सुनाई नहीं दी, जबकि पुलिस ने जब सीन री क्रिएट किया तो पास की एक अस्थायी बस्ती से लोगों की आवाज आ रही थी। जाहिर है छात्रा ने बचने के लिए शोर मचाया होगा, तब भी किसी को सुनाई क्यों नहीं दिया। इन सारे सवालों का पुलिस के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। यही वजह है कि पुलिस अब सिर्फ डीएनए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।

    सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

    सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

    कोटखाई प्रकरण की जल्द सीबीआई जांच शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने पीएम को मामले की संवेदनशीलता से अवगत करवा जल्द प्रकरण में सीबीआई जांच के आदेश देने का निवेदन किया है। इससे पहले इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव और एसएसपी शिमला की बैठक बुलाई। बैठक में पूरे प्रकरण पर सीएम ने अधिकारियों से अपडेट ली। अधिकारियों से मंथन के बाद सीएम ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा।

    सीबीआई जांच की सिफारिश के लिए शुक्रवार को प्रदेश गृह सचिव की ओर से केंद्र को भेजे पत्र का हवाला सीएम ने अपने पत्र में दिया है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि आपको अवगत कराना चाहूंगा कि प्रदेश में एक मासूम बच्ची के साथ दुराचार के बाद निर्मम हत्या हुई है। प्रदेश पुलिस ने मामले में कुछ गिरफ्तारियां कर ली है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने 14 जुलाई को सीबीआई जांच करवाने के लिए केंद्र से आग्रह किया है। गृह विभाग के पत्र का उल्लेख करने के बाद पत्र के अंत में सीएम ने पीएम से निवेदन किया है कि अगर आप मामले को तुरंत सीबीआई से जांच करवाने का आदेश दें, तो दोषियों को जल्द पकड़ कर छात्रा को न्याय मिल सकेगा।

    अपराधी के सिर पर पुलिस की टोपी

    अपराधी के सिर पर पुलिस की टोपी

    कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले में दो आरोपियों को पुलिस जब शिमला में मेडिकल कराने लाई तो कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। लोगों के गुस्से को देखते हुये पुलिस पूरी तरह से फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कोई आरोपी गिरफ्त से बाहर न रह जाए, इसके लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी से मामले की जांच में जुटी है। वहीं, पकड़े आरोपियों की पहचान उजागर न हो जाए, इसका भी पूरा ख्याल पुलिस रख रही है। इसके लिए कुछ भी करना पड़े पुलिस कर रही है। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भी ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला । कोटखाई मामले में पूछताछ के लिए पकड़े युवकों को जब पुलिस यहां लाई तो एक युवक के सिर पर पुलिस वाले की टोपी थी। कार में बिठाने से पहले पुलिस जवान ने युवक के सिर से टोपी उतार ली। हलांकि पकड़े गए युवकों की पहचान उजागर न हो इसका ख्याल रखना पुलिस का दायित्व है, लेकिन क्या पुलिस जवान की टोपी ऐसे युवक को पहनाना जोकि मामले में संदेह के दायरे में हो, कितना सही है?

    एसआईटी चीफ फजीहत कराने के बाद छुट्टी पर गये

    एसआईटी चीफ फजीहत कराने के बाद छुट्टी पर गये

    जिला शिमला के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले की जांच में जनता के कोप का भाजन बने एसआईटी चीफ आईजी ला एंड आर्डर जहूर जैदी लंबी छुट्टी पर चले गये। शुक्रवार को उग्र भीड़ की ओर से थाने पर किये गये हमले व नेशनल हाईवे को बंद करने के बाद बिगड़ते हालातों को देखते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री कुल्लू से शिमला पहुंचते ही चीफ सेक्रेटरी वीसी फारका व डीजीपी सोमेश गोयल के साथ बैठक में हालात का जायजा लेने के बाद जिस तरीके से सरकार को सीबीआई जांच के लिये मजबूर होना पड़ा , उससे पुलिस प्रशासन भी सकते में है। पुलिस की विशवासनीयता पर उभरे सवालों के बीच एसआईटी चीफ जहूर जैदी भी छुट्टी पर चले गये हैं।

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    English summary
    Himachal police detained two more in Kotkhai gang rape case.

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