दलाई लामा ने सुझाया इस तरह से चीन का हिस्सा बन सकता है तिब्बत
शिमला। नेहरू-जिन्ना के बयानों को लेकर चर्चाओं में आए तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। चीन से तिब्बत को मिलने को लेकर कहा है कि अगर तिब्बतियों की संस्कृति को सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार दे तो तिब्बत चीन का हिस्सा बनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन मॉडल अपनाकर चीन व तिब्बती एक-दूसरे के साथ रह सकते है।

दलाई लामा ने यह बात अपने बैंगलोर प्रवास के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ मंच साझा करते हुए कहीं। उन्होंने 'थैंक यू कर्नाटक' इवेंट को संबोधित हुए कहा कि तिब्बत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता हासिल करना कठिन कार्य है। इस समस्या के समाधान के चीन को आपसी बातचीत का माहौल तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चीन अगर तिब्बतियों की संस्कृति को सुरक्षित रखने की पूरी गारंटी दे तो तिब्बत चीन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। हम चीनी जनवादी गणराज्य के साथ बने रहने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए पूरा अधिकार दिया जाए।
पूर्वोत्तर तिब्बत के तक्तसेर गांव में पैदा हुए दलाई लामा को दो साल की उम्र में ही धर्मगुरु की मान्यता दी गई। माना गया कि उनका 13वें दलाई लामा थुबतेन ग्यातो के रूप में पुनर्जन्म हुआ है। वह वर्ष 1959 में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद भारत चले आए।












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