कोटखाई कांड ने बिगाड़ी साख तो कांग्रेस ने विद्या स्टोक्स को 'ठियोग' से ही लड़ने को किया मजबूर
हालांकि इससे पहले विद्या स्टोक्स वीरभद्र सिंह को मनाने के लिए उनके आवास हॉली लॉज भी गईं, लेकिन वीरभद्र सिंह को मनाने की कसरत कामयाब नहीं हो पाई। चूंकि ठियोग से तो वीरभद्र सिंह भी खुद डरे हुए हैं।
शिमला। हिमाचल की राजनीति में विद्या स्टोक्स का कोई सानी नहीं। भले ही सिंचाई मंत्री के तौर पर इस बार वो ज्यादा सफल नहीं रहीं लेकिन उनकी ईमानदार छवि का हर कोई कायल है! ठियोग कुमारसेन विद्या स्टोक्स की कर्मभूमि रही है। स्टोक्स परिवार ने ठियोग कुमारसेन को बहुत कुछ दिया है। लेकिन मशहूर समाजसेवी सत्यानंद स्टोक्स की बहू विद्या स्टोक्स आज राजनीति के भंवर में फंस कर रह गई हैं। स्टोक्स परिवार का अपर शिमला में अपना प्रभाव रहा है। ये सत्यानंद स्टोक्स वहीं हैं जो अमेरिका से भारत में सेब का पौधा लाये थे। उन्होंने अमेरिकी होते हुए भी शिमला को अपना घर माना और यहीं के होकर रह गए। विद्या स्टोक्स हिमाचल की पहली राजनेता हैं, जिन्होंने सालों तक अन्न ग्रहण नहीं किया। वो मात्र जूस के सहारे ही हैं। यही वजह है कि उन्हें सम्मान की दृष्टि से हमेशा ही देखा जाता रहा है। लेकिन विद्या स्टोक्स इन दिनों हिमाचल प्रदेश के चुनावी समर में लगता है कि बोल रही होगी की दिल है कि मानता नहीं!

89 साल की उम्र में स्टोक्स तो क्या कोई भी हो, राजनीति से सम्मानजनक विदाई ही चाहेगा। लेकिन स्टोक्स के मामले में हालात ऐसे हैं कि इन चुनावों में जीत की गारंटी कोई नहीं दे सकता। यही वजह है कि स्टोक्स बार-बार तकाजा कर रही हैं कि उन्हें चुनाव नहीं लड़ना औप वीरभद्र सिंह उनकी जगह ठियोग से चुनाव लड़ें। लेकिन वीरभद्र सिंह भी कुछ ऐसे ही हालात से गुजर रहे हैं कि वो भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। यही वजह है कि वीरभद्र सिंह ने विद्या के लाख तकाजे के बावजूद शुक्रवार को अर्की से अपना नामांकन भर दिया। जिससे अब तस्वीर साफ हो गई है कि अब ठियोग से विद्या स्टोक्स ही चुनाव लड़ेंगी।
हालांकि इससे पहले विद्या स्टोक्स वीरभद्र सिंह को मनाने के लिए उनके आवास हॉली लॉज भी गईं, लेकिन वीरभद्र सिंह को मनाने की कसरत कामयाब नहीं हो पाई। चूंकि ठियोग से तो वीरभद्र सिंह भी खुद डरे हुए हैं। निसंदेह ठियोग अब कांगेस का गढ़ नहीं रहा। पिछले दिनों कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस में ठियोग की विधायक विद्या स्टोक्स ने जो संवेदनहीनता दिखाई, वो अब उन पर भारी पड़ने लगी है।
लोगों में विद्या स्टोक्स के खिलाफ गुस्सा साफ देखा जा रहा है। जिससे खुद स्टोक्स भी असहज महसूस कर रही हैं। स्टोक्स को एक ओर भाजपा के राकेश वर्मा ने घेरा है तो दूसरी ओर माकपा के धुरंधर नेता राकेश सिंघा मुकाबले को पेंचीदा बना रहे हैं। यही वजह है कि आखिरी क्षण तक विद्या स्टोक्स चुनाव लड़ने के लिए मना करती रहीं। लेकिन अब स्टोक्स को ठियोग में ही अपने आपको साबित करना होगा।













Click it and Unblock the Notifications