हिमाचल: पढ़िए ऐसे मामले, जिनको सुलझाने में सीबीआई अभी तक रही नाकाम

कोटखाई केस को सुलझाने चली सीबीआई की हकीकत पर एक रिपोर्ट।

शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के कोटखाई की दसवीं की स्कूली छात्रा के साथ हुये गैंगरेप व मर्डर केस की जांच भले सीबीआई कर रही हो लेकिन जांच एजेंसी ने जिस तरीके से इस मामले की जांच के दौरान जेल में बंद सभी आरोपियों के डीएनए निगेटिव आने का खुलासा किया व इसी मामले के आरोपी सूरज की हवालात में मौत के मामले में आईजी सहित प्रदेश पुलिस के आठ कर्मियों को गिरफ्तार किया है, उससे सारा मामला उलझ कर रह गया है। इससे साफ हो गया है कि अभी भी सीबीआई को इस मामले को सुलझाने में समय लग सकता है।

छबील दास मर्डर केस

छबील दास मर्डर केस

प्रदेश के पिछले इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो सीबीआई अभी भी कई मामले को सुलझा नहीं पाई है जिससे लोगों का विश्वास जांच एजेंसी पर बना है, वह आने वाले दिनों में टूट भी सकता है। नवंबर 1995 में कानून की दुनिया में बड़े नाम एडवोकेट छबील दास का मर्डर हुआ था। नेपाल के रहने वाले नौकर अपने मालिक छबील दास का मर्डर कर भाग गए थे। एडवोकेट छबील दास शिमला में रहते थे। यहीं मिड्ल बाजार में उनका कार्यालय व निवास भी था। नेपाली उनके नौकर थे। बाद में ये केस सीबीआई को दिया गया लेकिन सीबीआई आज तक इस केस को सुलझा नहीं पाई है। दरअसल नेपाल के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है। यही कारण है कि नेपाली हिमाचल में अपराध करके वापिस भाग जाते हैं। छबील दास मर्डर केस में भी यही हुआ। जांच के बाद ये केस अनट्रेस घोषित कर दिया गया।

हर्ष मर्डर केस

हर्ष मर्डर केस

वहीं शिमला के मशहूर कारोबारी हर्ष बालजीज की हत्या का केस भी सीबीआई नहीं सुलझा पाई थी। वर्ष 2003 में हर्ष बालजीज को शिमला में आर्मी ट्रेनिंग कमांड के पास गोली मार दी गई थी। ये केस भी सीबीआई को सौंपा गया था। सीबीआई इस मामले में भी अपराधियों के गिरेबान तक नहीं पहुंच पाई थी।

एंटीक घंटे की चोरी केस

एंटीक घंटे की चोरी केस

तीसरा अहम केस भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान से चोरी हुए एंटीक घंटे का है। नेपाल के राजा ने ये घंटा वायसराय को भेंट किया था। करोड़ों रुपए के इस एंटीक घंटे को 21 अप्रैल 2010 को किसी ने संस्थान के गेट से चुरा लिया था। इस तरह ये मामला सात साल पहले का है। पुलिस के बाद ये जांच हाईकोर्ट के दखल पर सीबीआई को गई थी। सीबीआई ने इस केस की तफ्तीश में काफी पसीना बहाया, लेकिन शातिर अभी तक नहीं धरे गए हैं। नेपाल के राजा ने वर्ष 1903 में ये घंटा तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के वायसराय को भेंटस्वरूप दिया था। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में इसकी कीमत अरबों रुपए आंकी गई थी। पुलिस ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दे दी थी। बाद में संस्थान ने इस मामले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने सुराग देने वाले को एक लाख रुपए इनाम का ऐलान भी किया था। हलांकि सीबीआई ने दावा किया है कि इस केस में उसे अहम सुराग हाथ लगे हैं लेकिन गुनहगार अभी भी पकड़ से बाहर हैं। वहीं शिमला के पास नालदेहरा में होटल निर्माण के लिए बैंक से 1.25 करोड़ रुपए लोन के राशि ली गई। इसमें लोन में मिली राशि में 25 फीसदी का ही इस्तेमाल किया गया। बाकी कहीं और इस्तेमाल हुआ। सीबीआई के पास जांच हैं। शिमला के तारा देवी में पुलिस की गोली से युवक की मौत की जांच एजेंसी भी सीबीआई ही है। मामला फरवरी 2013 का है और जांच अधूरी है।

कोटखाई केस सीबीआई के पास

कोटखाई केस सीबीआई के पास

अब कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस में सरकार ने हिमाचल की जनता के आक्रोश के बाद दबाव में सीबीआई के पास भेजा है लेकिन इस मामले में जिस तरीके से सीबीआई की जांच आगे बढ़ रही है, उससे लगता नहीं कि असली गुनाहगारों तक जांच एजेंसी जल्द पहुंच पायेगी। यही नहीं कुछ ओर भी मामले हैं जिनके बारे सीबीआई अभी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।

सीबीआई की जांच के दायरे में मामले

सीबीआई की जांच के दायरे में मामले

1. सीएम वीरभद्र सिंह के आय से अधिक संपति के मामले की जांच सीबीआई कर ही है। इस मामले में सीबीआई ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल 500 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में दावा किया है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनकी कुल आमदनी से दोगुना अधिक है। मामले में सीएम के अलावा उनकी पत्नी और बेटा भी आरोपी हैं।

2. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पंडि़त सुख राम का मामला भी सीबीआई के जिम्मे है। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने 1996 में टेलीकॉम मंत्री रहते हुए करोड़ों रुपए का घपला किया और आय से अधिक संपति अर्जित की। इस मामले में हलांकि इन्हें सजा हो चुकी है, लेकिन सुखराम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर रखी है।

3. शिमला के दूरदर्शन केंद्र में हुई गड़बड़ियों की जांच भी सीबीआई कर रही है। केंद्र के दो अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने 2007 से लेकर 2012 तक नियमों के खिलाफ जाकर एक निजी कंपनी को प्रसारण का अधिकार दिए। इस मामले की जांच भी जारी है। इसमें केद्र के निदेशक और अन्य अधिकारी पर जालंधर की कंपनी को पचास लाख रुपए का फायदा पहुंचाने का आरोप है।

4. मनाली-सरचु-लेह सड़क मार्ग के निर्माण में करोड़ों रुपए के घोटाले में सीबीआई जांच एजेंसी है। यहां 2006 से 2010 तक केंद्रीय फंड का दुरुपयोग करने की बातें सामने आई हैं। बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) इस मार्ग का रखरखाव देखती है।

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