Kotkhai Gang Rape: गिरफ्तार आईजी जहूर जैदी की जेल में हालत बिगड़ी

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शिमला। कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस के आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में फंसे हिमाचल पुलिस के दक्षिणी रेंज के आईजी जहूर एच जैदी बुधवार को अचानक जेल में बीमार हो गये। उन्हें इलाज के लिये आईजीएमसी शिमला लाया गया है। यह भी एक संयोग ही है कि आईजी जैदी सहित सभी पुलिसकर्मी पहले कैथू जेल में रखे गये थे लेकिन वहां उन पर आरोप लगा कि उन्हें जेल में खास सुविधायें दी जा रही हैं। उसके बाद रविवार को ही सभी आठ आरोपियों को कंडा जेल में शिफ्ट कर दिया गया था लेकिन कंडा जेल में आते ही जैदी की तबीयत बिगड़ गई है। बताया जा रहा है कि सुबह उन्हें सीने में दर्द उठा है। इस समय जैदी का इलाज आईजीएमसी के कार्डियोलाजी विभाग में चल रहा है।

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Kotkhai Gangrape

एसआईटी प्रमुख आई जैदी के अलावा डीएसपी मनोज कुमार, राजेंद्र सिंह, एएसआई दीपचंद, मोहन लाल, रंजीत सिंह, रफीक अली और सूरत सिंह को सीबीआई ने सूरज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। व इन दिनों सभी आरोपी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। कोटखाई मामले की छानबीन पर सवाल उठने के बाद शिमला पुलिस से यह केस वापस जांच की जिम्मेदारी विशेष जांच टीम (एसआईटी) को दी गई। इस एसआईटी के प्रमुख जहूर हैदर जैदी बनाए गए। जैदी हिमाचल पुलिस की दक्षिणी जोन शिमला में आईजी थे। यानी उनके पास शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर जिलों के पुलिस अधीक्षकों की निगरानी भी थी। इस मामले की पुलिसिया छानबीन पर उठे बवाल के बाद आईजी जैदी का दक्षिणी रेंज शिमला से पुलिस मुख्यालय के लिए तबादला कर दिया गया।

कोटखाई मामले में हवालात में सूरज की हत्या के मामले में जैदी समेत पूरी एसआईटी सवालों के घेरे में रही है। सीबीआई को जब इसका सुराग मिला कि सूरज की मौत के जिम्मेवार पुलिस कर्मी ही हैं तो एसआईटी प्रमुख जैदी की बनाई कहानी गलत साबित होने से वे बुरी तरह से घिर गए। आरोपी आशीष चौहान की गिरफ्तारी की खबर के सार्वजनिक होने के बाद राज्य पुलिस यह मानकर चल रही थी कि वह पूरे मामले में संलिप्त है। इसके पीछे की ठोस वजह उसकी पृष्ठभूमि मानी जा रही थी। उसे नशे का आदी कहा जा रहा था। उसकी मोबाइल फोन की डिटेल और फोन के भीतर मिले डाटा के आधार पर पुलिस उसे आरोपी मानती रही।

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लेकिन आशीष चौहान के स्कूली छात्रा के कत्ल और दुराचार के मामले में संलिप्त होने के कोई भी पुख्ता सबूत सीबीआई की जांच टीम के हाथ नहीं लगे। बावजूद इसके पहली गिरफ्तारी पुलिस प्रशासन की ओर से आशीष चौहान की ही दिखाई गई। ऐसा क्यों किया गया? इसका भी एसआईटी प्रमुख जैदी कोई साफ जवाब नहीं दिया।

कोटखाई प्रकरण में शुरू से ही एसआईटी प्रमुख आईजी जहूर एच जैदी की जल्दबाजी से पुलिस प्रशासन कटघरे में रहा। सभी आरोपियों की गिरफ्तारी एक साथ नहीं की गई। पहले आशीष चौहान को आरोपी बताया गया और चंद घंटों बाद ही राजू, सुभाष सिंह, दीपक, सूरज, लोकजन उर्फ छोटू को गिरफ्तार करने की बात सामने आई। इसके बाद जब डीजीपी के साथ प्रेस वार्ता की गई तो उसमें आशीष चौहान को छोड़ बाकी सभी आरोपियों को हत्या और दुराचार करने का आरोपी बताया गया। ऐसे में सवाल ये भी उठा कि आशीष का इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है तो उसकी गिरफ्तारी क्यों की गई, इस सवाल पर भी जैदी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाए थे। यही नहीं, ऐसे कई अनसुलझे सवालों पर जैदी लगातार घिरते रहे। बाद में जब आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में मौत हुई तो जैदी की मुश्किलें और बढ़ गईं। वारदात वाले दिन ड्यूटी पर तैनात संतरी के खुलासे ने जैदी समेत आठ पुलिसवालों को हवालात में पहुंचा दिया।

घटना वाली सुबह पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट में सिर्फ आशू की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। खास बात यह है कि प्रेस नोट जारी करने के दो घंटे बाद ही पांच अन्य लोगों की गिरफ्तारी की चौंकाने वाली कहानी सामने आई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पुलिस के पास जानकारी थी कि आशू मुख्य आरोपी नहीं है तो 13 जुलाई वीरवार की सुबह 11 बजे तक सिर्फ उसे गिरफ्तार क्यों दिखाया गया। केस में अगर 55 घंटे की तफ्तीश थी और पुलिस शुरू से सही दिशा में काम कर रही थी तो सभी छह आरोपियों की गिरफ्तारी एक साथ क्यों नहीं दिखाई गई? सिर्फ आशू की गिरफ्तारी का खुलासा करने की क्या जल्दी थी? ऐसी सब बातों को एसआईटी प्रमुख जैदी साफ नहीं कर पाए। इसके बाद जब सूरज की कस्टोडियल डेथ हुई तो उसका इल्जाम भी राजू पर लगाया गया और उस पर मामला दर्ज किया गया। जहूर एच जैदी पर कस्टोडियल डेथ मामले में गुनाहगारों को बचाने का आरोप है और गुड़िया मामले के आरोपी राजू पर हत्या का झूठा मामला बनाने के भी इल्जाम हैं। सीबीआई मान चुकी है कि पुलिसकर्मियों ने ही सूरज को मारा।

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English summary
Arrested IG in Kotkhai case shifted to hospital from jail in Himachal Pradesh.
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