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Ravi kumar dahiya final: प्रतिद्वंद्वी को पटखनी देने पर खुशी से नाचीं दादी, बोलीं- बेटा गोल्ड ही ल्याइयो

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सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले पहलवान रवि कुमार दहिया के हर ओर चर्चे हैं। रवि कुमार ने टोक्यो ओलंपिक-2020 में कजाकिस्तान के पहलवान को मात दी। इससे रवि का रजत पदक पक्का हो गया। आज रवि का फाइनल मुकाबला होगा। ओलंपिक में रवि आज रूस के उगएव जाउर के खिलाफ उतरेंगे। उनके जोरदार प्रदर्शन को देखते हुए उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद की जा रही है। उनकी दादी समेत पूरे परिवार के लोग टीवी पर नजर गड़ाए बैठे हैं। वहीं, गांव वालों में भी उत्साह भरा हुआ है।

दादी बोलीं- रवि तूने कमाल कर द्या, अब गोल्ड ल्याइयो

दादी बोलीं- रवि तूने कमाल कर द्या, अब गोल्ड ल्याइयो

पहलवान रवि दहिया सोनीपत जिले के गांव नाहरी के रहने वाले हैं। पिछले रोज उन्होंने 57 किलो वेट कैटेगरी में चौंकाते हुए कजाकिस्तान के पहलवान को चारों खाने चित कर दिया। कजाकिस्तान के पहलवान ने रवि के हाथ को दांतों से चबाया था, तो भी रवि ने उसे नहीं छोड़ा और "विक्ट्री बाय फॉल" रूल से विजेता बने। रवि के जीतते ही उनके गांव में जोरदार जश्न मना। रवि के घर पर भारी भीड़ जुटी। उम्र की परवाह न करते हुए उनकी दादी सावित्री भी झूमने लगीं। महिलाओं ने उनका हौंसला बढ़ाया तो नाचीं भी। दादी ने कहा- "आज तो कती जी सा आग्या..., बेटा रवि तूने आखर कमाल कर दिया..।"
दादी ने आगे कहा- "के खूब खेला है, यूं लगे है जैसे सालों की मेहनत ने रंग दीख्याया। मां-बाप की तपस्या पूरी कर दी। बेटा इब गोल्ड जीत ल्याइयो।"

मां ने कहा- खीर का हलवा खिलाऊंगी

मां ने कहा- खीर का हलवा खिलाऊंगी

दादी के अलावा दादा भी बहुत खुश हुए। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। ग्रामीणों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया। वहीं पर, रवि की मां उर्मिला भी खुशी से मुस्कराते रहीं। पड़ोसन ने बताया कि, रवि की मां ने कई दिन से व्रत रखा हुआ है। उन्होंने अखंड ज्योत जला रखी है। मां कह रही हैं- "रवि जीतकर आएगा तो हाथों से खीर का हलवा खिलाऊंगी। उसे खीर-चूरमा बहुत पसंद है।" उन्होंने कहा, "बेटे नैं मेरा ही नहीं, अपने गांव और देश का नाम रोशन किया है। वो ज्यादा बोलता नहीं है, और एक बात कहता है- मां मेरा खेलना तब सफल होगा, जब ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतूंगा।"

पापा बोले- मैंने उसपै कभी दवाब न्हीं डाला

पापा बोले- मैंने उसपै कभी दवाब न्हीं डाला

रवि कुमार के पिता राकेश आत्मविश्वास से लवरेज दिखे। उन्होंने कहा कि, मुझे यकीन है...बेटा गाेल्ड जीतेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या आपने रवि को फोन करके बधाई नहीं दीं? तो पिता बोले- "मैं कभी रवि पर किसी भी तरयां दवाब न्हीं डालता। वो डिस्टर्ब न हो, इसलिए अभी फोन पर बात न्हीं की। उसकी जीत, पूरे देश की जीत होगी।"

'50-60 किलोमीटर का सफर होता था'

'50-60 किलोमीटर का सफर होता था'

रवि के छोटे भाई ने कहा कि, "पापा भइया के लिए दूध पहुंचाने के लिए 50-60 किलोमीटर का भी सफर करत थे।" वहीं, गांव वाले भइया को केतली वाला पहलवान कहते हैं, क्योंकि उनका दूध उस पर गर्म किया जाता रहा है।

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गांव वाले बोलते थे- केतली वाला पहलवान

गांव वाले बोलते थे- केतली वाला पहलवान

र​वि के परिचित पदम सिंह दहिया ने कहा, "रवि के अंदर कुश्ती का बहुत जुनून है। वह दिवाली के बाद से घर नहीं लौटा है। ओलंपिक में जाने से पहले वह छत्रसाल स्टेडियम पर समय बिताता था।​ फिर रूस चल गया। वहां से अभ्यास के बाद टोक्यो पहुंच गया।'

English summary
Ravi kumar dahiya wrestler win in Tokyo Olympics 2020, sonipat village family celebrate victory, grandmother says- i'm very happy
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