IDFC First Bank Case: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड मामले में एक्शन, 24 घंटे में रिकवर हुआ हरियाणा सरकार का पैसा
IDFC First Bank Case: हरियाणा सरकार से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर अधिकांश रकम रिकवर कर ली है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 590 करोड़ रुपये में से 556 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार के अन्य अधिकृत बैंकों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। इसके साथ ही करीब 25 करोड़ रुपये की ब्याज राशि भी वसूल की जा चुकी है। सीएम के अनुसार पूरी रिकवरी प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी कर ली गई।
राज्य सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि कहीं बैंक कर्मचारियों के साथ हरियाणा सरकार के किसी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी।

IDFC First Bank Case: एंटी करप्शन ब्यूरो करेगी जांच
- इसके अलावा सरकार ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को भी सौंप दी है। बैंक प्रबंधन भी आंतरिक स्तर पर जांच कर रहा है।
- फिलहाल रिकंसिलिएशन प्रक्रिया जारी है और अंतिम राशि का निर्धारण आगे की जांच और वैलिडेशन के बाद किया जाएगा।
Haryana CM ने कहा, 'सरकार ने तत्काल कार्रवाई की'
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न बैंकों में विभागों के फंड रखती है। IDFC First Bank में भी कुछ विभागों के खाते संचालित थे। खातों के नियमित मिलान के दौरान जनवरी के मध्य में कुछ खातों में अंतर सामने आया। सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए बैंक को संबंधित खाते बंद करने और पूरी राशि ब्याज सहित अधिकृत बैंक में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि 21 तारीख को बैंक की ओर से पत्र जारी किया गया, जबकि उससे पहले ही सरकार बैंक से संपर्क कर चुकी थी।
IDFC First Bank Scam: क्या है पूरा मामला?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में खुलासा किया कि चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में अनधिकृत और धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन किए जाने की आशंका है। बैंक ने इस मामले की सूचना बैंकिंग रेगुलेटर को देने के साथ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। मिलान के दौरान विभाग द्वारा बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज राशि में अंतर पाया गया। 18 फरवरी 2026 के बाद अन्य सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों का मिलान कराया, जिसमें इसी तरह का अंतर सामने आया।












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