हरियाणा: बीजेपी-जेजेपी गठबंधन में बढ़ी तल्खी, खट्टर सरकार बचाने के लिए बीजेपी ने किया निर्दलियों का रुख
हरियाणा में भाजपा और जननायक जनता पार्टी गठबंधन के बीच तनाव की स्थिति है। जिसके बाद बीजेपी सरकार बचाने की कवायद में जुट गई है।

हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन दरार पड़ती दिख रही है। बीजेपी और जेजेपी में पिछले कुछ दिनों में लगातार टकराव देखने को मिला है। इसी बीच खबर आ रही है कि, बीजेपी के हरियाणा प्रभारी बिपल्ब देब निर्दलीय विधायकों से मिल रहे हैं।
हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों में एक साल का वक्त है। लेकिन कुछ दिनों से दोनों पार्टियों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं। हाल ही में देवेंद्र सिंह बबली और जेजेपी नेताओं में तकरार देखने को मिली थी। ऐसे में गठबंधन सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हरियाणा प्रभारी बिपल्ब देब ने राज्य के 4 निर्दलीय विधायकों के साथ मीटिंग की है। बिप्लब देब ने मीटिंग के बाद बताया कि हरियाणा के इन 4 निर्दलीय विधायकों धरम पाल गोंडर, राकेश दौलताबाद, रणधीर सिंह और सोमवीर सांगवान ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताया है। इस बीच शुक्रवार को हलोपा विधायक गोपाल कांडा भी दिल्ली में प्रभारी बिप्लब देब से मिले।
कैसे शुरू हुआ विवाद
उचाना सीट को लेकर हुई इस बयानबाजी के बाद जेजेपी और बीजेपी आमने-सामने हैं। इस सीट पर मौजूदा वक्त में जेजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला विधायक हैं। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेम लता को हराकर उचाना कलां सीट अपने नाम की थी। 4 जून को उचाना कलां में एक सभा में बिप्लब कुमार देब ने कहा कि, उचाना सीट से भाजपा की प्रेमलता अगली विधायक होंगी।
बिप्लब कुमार देब के इस बयान पर दुष्यंत चौटाला नेकहा, किसी के पेट में दर्द है, दर्द की दवाई तो मैं दे नहीं सकता। न तो मेरे पेट में दर्द है और न ही मैं डॉक्टर हूं। मेरा काम अपनी पार्टी को मजबूत करना है। मैं उचाना से ही चुनाव लड़ूंगा। चौटाला के इस बयान पर पलटवार करते हुए देब ने कहा कि, जजपा ने हमें समर्थन देकर कोई अहसान नहीं किया, बदले में उन्हें मंत्री पद दिए हैं। अभी गठबंधन सरकार चल रही है लेकिन निर्दलीय विधायक भी हमारे संपर्क में हैं।
हरियाणा की विधानसभा का गणित
90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटें चाहिए। इस समय भाजपा के पास 41 और जजपा के 10 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 30, आईएनएलडी एक, हरियाणा लोकहित पार्टी एक और 7 निर्दलीय विधायक हैं। हरियाणा लोकहित बीजेपी को पहले से ही समर्थन दे रही है। वहीं छह निर्दलीय भी इस वक्त बीजेपी के साथ है।
खट्टर सरकार को नहीं है कोई खतरा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर जेजेपी समर्थन वापस ले लेती है और मुलाकात करने वाले निर्दलीय विधायक समर्थन देते हैं तो तब भी बीजेपी सरकार सुरक्षित रहेगी। राज्य में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए ये सवाल खड़े होने लगे हैं कि 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे या नहीं।
इससे पहले दुष्यंत चौटाला कह चुके हैं कि वह भाजपा के साथ ही चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, चौटाला ने एक बार अपने बयान में यह भी कहा था कि भविष्य में क्या होगा ... मैं भविष्यवाणी करने वाला ज्योतिषी नहीं हूं।












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