Haryana Chunav: हरियाणा में BJP की OBC वाली रणनीति क्यों हो गई फेल?
Haryana result 2024: हरियाणा में विपक्षी कांग्रेस को उसी की चुनावी बिसात पर पटखनी देने के लिए बीजेपी ने बहुत ही ठोस रणनीति अपनाई थी। क्योंकि, जहां कांग्रेस का मुख्य फोकस जाटों की गोलबंदी पर नजर आ रहा था, तो बीजेपी उससे बड़ी आबादी ओबीसी वोटरों को साधने में लगी हुई थी। लेकिन, कम से कम एग्जिट पोल के अनुमानों से लग रहा है कि भाजपा की यह रणनीति बुरी तरह से फेल हो चुकी है।
इस साल लोकसभा चुनावों से ठीक पहले जब हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी ने पंजाबी नेता की जगह ओबीसी समाज से आने वाले नायब सिंह सैनी को कुर्सी सौंपी तभी से उसकी रणनीति साफ हो गई कि वह कांग्रेस की घेरेबंदी को तोड़ने के लिए कमर कस चुकी है।

एग्जिट पोल के अनुमानों के हिसाब से भाजपा की ओबीसी रणनीति हुई फेल!
एक दशक की केंद्र और राज्य की अपनी ही सरकारों की एंटी-इंकंबेंसी को कमतर करते हुए पार्टी ने जब लोकसभा की 10 में से 5 सीटें जीतीं तो लगा कि पार्टी का ओबीसी कार्ड काम करने लगा है। कांग्रेस के 42 के मुकाबले पार्टी को 44 विधानसा क्षेत्रों में बढ़त भी मिली।
लेकिन, अधिकतर एग्जिट पोल के अनुमान बता रहे हैं कि विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओबीसी मुख्यमंत्री वाली रणनीति नहीं काम कर सकी है।
हरियाणा में जाटों से ज्यादा ओबीसी आबादी
हरियाणा में कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के माध्यम से अपने कोर वोटर जाट वोट बैंक पर फोकस किया था। 2014 से यह बिरादरी उसे काफी हद तक गच्चा देती आ रही थी। लेकिन, बीते लोकसभा चुनावों में वह फिर से पार्टी की तरफ होते दिखाई पड़े।
इसकी काट में बीजेपी ने एक सैनी सीएम के रहते अन्य ओबीसी जातियों पर फोकस किया था। क्योंकि, हरियाणा में अगर अनुमानित 27-28% जाट आबादी सबसे बड़ी है, तो 35% से ज्यादा ओबीसी समूह उससे कहीं ज्यादा बड़ा ग्रुप है।
बीजेपी ने ओबीसी वोटरों को साधने की बनाई थी क्या रणनीति?
मतदान से ठीक पहले के दिनों में पार्टी ने ओबीसी की विभिन्न जातियों को गोलबंद करने के मिशन पर केंद्रीय मंत्री और पार्टी के दिग्गज रणनीतिकार धर्मेंद्र प्रधान को जमीन पर उतार दिया था।
उन्होंने पार्टी को तीसरी बार सत्ता दिलाने के लिए इन बिरादरी के नेताओं से सीधा संपर्क भी किया। उनके साथ बैठकें कीं। पार्टी के लिहाज से राज्य में जो ओबीसी जातियां अहम रही हैं, उनमें यादव और अहीर, पाल, कश्यप, कुम्हार, खाटी, गुर्जर, नाई और सैनी अहम हैं।
बीजेपी ने प्रदेश में कांग्रेस से कहीं ज्यादा ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट भी दिया। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इस वर्ग के लिए अनेकों कल्याणकारी योजनाएं भी चलाई गईं।
एग्जिट पोल में भाजपा, कांग्रेस को मिले कितने वोट?
अगर हम सीटों के अनुमानों को छोड़ भी दें तो सी-वोटर के मुताबिक हरियाणा में कांग्रेस 43.5% वोट ले रही और बीजेपी मात्र 37.2% पर अटक रही है। वहीं एक्सिस माय इंडिया ने कांग्रेस को 43% और बीजेपी को 35% वोट मिलने का अनुमान जाहिर किया है। इन अनुमानों के गलत होने की संभावना 3% प्वाइंट रखी गई है।
लोकसभा चुनावों के मुकाबले बहुत गया भाजपा का वोट शेयर!
अगर लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को मिले वोट से तुलना करें तो एग्जिट पोल की भविष्यवाणी के अनुसार उसे 9% से लेकर 11% वोटों का नुकसान हुआ है। जबकि, कांग्रेस का वोट शेयर लगभग उसी स्थिति में बना हुआ है या उसमें भी बहुत मामूली गिरावट आई है।
क्योंकि फेल हो गई बीजेपी की ओबीसी वाली रणनीति
सवाल है कि अगर बीजेपी ने हरियाणा में ब्राह्मण, बनिया और पंजाबी मतदाताओं के अलावा सबसे ज्यादा फोकस ओबीसी मतदाताओं पर किया था तो वह एग्जिट पोल के अनुमानों में नजर क्यों नहीं आ रहा है?
क्योंकि, अगर ओबीसी वोटरों ने पार्टी के पक्ष में एकजुट होकर वोट डाला होता तो उसके वोट शेयर में इतनी गिरावट नहीं आती। (डिस्क्लेमर: एग्जिट पोल के अनुमानों पर आधारित विश्लेषण)












Click it and Unblock the Notifications