हरियाणा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने BJP को कहा? अगर सही साबित हुए तो कांग्रेस के लिए क्या होंगे मायने
Prashant Kishor: हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की मतगणना में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। कांग्रेस के लिए कहीं खुशी तो कहीं गम है। इसी बीच प्रशांत किशोर का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल, हरियाणा के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बहुमत दिख रहा था। लेकिन थोड़ी ही देर बाद कहानी पलट गई अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।

वहीं, विधानसभा चुनावों के परिणाम से पहले चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के समन्वयक प्रशांत किशोर ने एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 9 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की दिशा और स्थिरता तय करेंगे।
चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के समन्वयक प्रशांत किशोर ने सितंबर में इंडिया टीवी को इंटरव्यू दिया था। इस दौरान प्रशांत किशोर कहा था, 9 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे (जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम) इस सरकार की स्थिरता को तय करेंगे। इन राज्यों के परिणाम यह भी तय करेंगे कि यह सरकार क्या दिशा लेगी। अगर भारतीय जनता पार्टी इन 9 राज्यों में से 5 या 6 में हार जाती है, तो निश्चित रूप से स्थिरता का सवाल एक मुद्दा बन जाएगा।
2024 के लोकसभा नतीजों को अच्छा बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे सरकार चलाएं। उन्होंने उन्हें यह भी बताया है कि आप भगवान नहीं है। सरकार चलाएं, लेकिन तानाशाह की तरह नहीं, लोकतांत्रिक नेता की तरह सरकार चलाएं। लोगों ने प्रधानमंत्री को संदेश दिया है कि उन्हें सरकार सावधानी से चलानी चाहिए।
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है। हरियाणा के शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को बहुमत दिख रहा था। लेकिन थोड़ी ही देर बाद कहानी पलट गई है। अब दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस गठबंधन बहुमत के करीब है। शुरुआती रुझानों से स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर और हरियाणा दोनों ही जगहों पर भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
शुरुआती रुझानों के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है। लेकिन अगर ऐसा होता है कि हिंदी पट्टी का द्वार कांग्रेस के लिए खुल जाएगा। करीब 10 साल बात यहां कांग्रेस सत्ता में आएगी।
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